खुफिया एजेंसी इंटेलिजेंस ब्यूरो यानी आईबी ने देश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर एक गंभीर और चौंकाने वाला खुलासा किया है। पड़ोसी देश पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद (JeM) अब भारतीय महिलाओं को निशाना बनाने के लिए एक नया और खतरनाक डिजिटल जाल बुन रहा है। जैश की महिला विंग जमात-उल-मोमिनात सोशल मीडिया के जरिए भोली-भाली भारतीय लड़कियों को शादी का झांसा देकर अपने जाल में फंसा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य भारत की संवेदनशील जानकारियां चुराना और देश के भीतर एक बड़ा स्लीपर सेल नेटवर्क तैयार करना है।
आतंकी मसूद अजहर की बहन ने बनाई खतरनाक महिला विंग
आईबी के अधिकारियों के अनुसार, जैश-ए-मोहम्मद ने अक्टूबर 2025 में अपनी पहली विशेष महिला विंग की स्थापना की थी। इस खतरनाक विंग का नाम जमात-उल-मोमिनात है जिसकी कमान खूंखार आतंकी सरगना मसूद अजहर की बहन सादिया अजहर के हाथों में है। इस विंग का मुख्य काम भारतीय महिलाओं और युवाओं को कट्टरपंथी बनाना, उनकी भर्ती करना और आतंकी हमलों के लिए फिदायीन दस्ता तैयार करना है।
आईबी के अधिकारियों ने बताया कि इस साजिश के तहत जैश के हैंडलर्स मुख्य रूप से उन लड़कियों को सोशल मीडिया, चैटिंग ऐप्स और ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म्स पर निशाना बनाते हैं जो भावनात्मक रूप से अकेली होती हैं या जिनके अपने परिवार के साथ संबंध अच्छे नहीं होते। इन लड़कियों का विश्वास जीतने के लिए जैश के ट्रेंड लड़के उनसे रोजाना घंटों बात करते हैं।
यह बातचीत का दौर करीब 6 महीने से भी अधिक समय तक चलता है। इस दौरान हैंडलर्स लड़कियों से कोई भी संदिग्ध या देश की सुरक्षा से जुड़ा संवेदनशील सवाल नहीं पूछते जिससे लड़कियों को लगता है कि यह एक सामान्य रिलेशनशिप में हैं। जब लड़की पूरी तरह प्यार के जाल में फंस जाती है तो उसे शादी का प्रस्ताव देकर पाकिस्तान आने के लिए बहलाया-फुसलाया जाता है।
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जम्मू-कश्मीर के बाद अब राजस्थान पर है आतंकियों की नजर
खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, पहले इस तरह की साजिशें जम्मू-कश्मीर में अधिक होती थीं लेकिन अब आतंकियों ने राजस्थान का रुख किया है। इसका मुख्य कारण यह है कि राजस्थान की पाकिस्तान के साथ 1070 किलोमीटर लंबी एक विशाल अंतरराष्ट्रीय सीमा लगती है जो श्रीगंगानगर से लेकर बाड़मेर तक फैली है। आईबी ने इन सीमावर्ती क्षेत्रों में सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने वाली कई लड़कियों की पहचान की है जिन्हें आईएसआई (ISI) के गुर्गों द्वारा ऑनलाइन अप्रोच किया जा रहा है।
पाकिस्तान पहुंचने के बाद शुरू होता है असली खेल
जब कोई भारतीय लड़की शादी के झांसे में आकर पाकिस्तान जाने के लिए तैयार हो जाती है तो ये हैंडलर्स उसे सबसे पहले एक वैध भारतीय पासपोर्ट बनवाने के लिए कहते हैं। आतंकियों की पहली पसंद यह होती है कि लड़की को राजस्थान सीमा के जरिए सीधे पाकिस्तान में लाया जाए। अगर वहां सुरक्षा एजेंसियों की सख्ती की वजह से ऐसा संभव नहीं हो पाता तो उन्हें नेपाल या सऊदी अरब जैसे देशों के रास्ते पाकिस्तान पहुंचने का वैकल्पिक रूट दिया जाता है। इन देशों में जैश के एजेंट पहले से तैनात होते हैं जो इन महिलाओं को आगे भेजने का काम करते हैं।
एक बार जब ये महिलाएं पाकिस्तान पहुंच जाती हैं, तो उनके लौटने के सारे रास्ते बंद हो जाते हैं। वहां जमात-उल-मोमिनात के शिविरों में उनका ब्रेनवाश किया जाता है। इसके बाद उनसे दो तरह के टास्क पूरे करवाए जाते हैं।
1. भारत वापस भेजकर जासूसी कराना
कुछ चुनिंदा महिलाओं को वापस भारत भेजने की योजना बनाई जाती है। भारत लौटने पर इन महिलाओं से उम्मीद की जाती है कि वे सीमावर्ती और संवेदनशील सैन्य ठिकानों की खुफिया जानकारी, तस्वीरें और वीडियो इकट्ठा करके पाकिस्तान भेजें।
2. ऑनलाइन नेटवर्क का विस्तार करना
जो महिलाएं भारत वापस नहीं आतीं उन्हें पाकिस्तान में ही रखकर सोशल मीडिया के जरिए अन्य भारतीय महिलाओं और युवाओं को इस दलदल में खींचने के काम पर लगा दिया जाता है ताकि आतंकियों का यह गैंग बड़ा हो सके।
जैश के इस बड़े नेटवर्क के बारे में पता चलने के बाद भारत की तमाम खुफिया एजेंसियां अत्यधिक सतर्क हो गई हैं और आतंकियों के इस नए नेटवर्क को खत्म करने के लिए उचित कदम उठा रही हैं।

















