केंद्र सरकार ने बिहार से अवैध बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं की पहचान कर उन्हें वापस भेजने का निर्देश दिया है। गृह मंत्रालय (MHA) ने इस संबंध में सभी जिलाधिकारियों (DM), पुलिस अधीक्षकों (SP) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों (SSP) को पत्र लिखकर निर्देशित किया है। साफ-साफ हिदायत दी है।
क्या हैं निर्देश
इस पत्र में कहा गया है कि बिहार में रह रहे सभी अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या लोगों की तुरंत पहचान की जाए। उन्हें बांग्लादेश और म्यांमार की सीमा सुरक्षा बलों को सौंप दिया जाए। जिन लोगों को वापस भेजा जाना है, उनकी बायोमेट्रिक जानकारी ली जाए और उसे गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया जाए, ताकि वे दोबारा देश में न घुस सकें।
हर जिले में बनेगी टास्क फोर्स
हर जिले में इस काम के लिए एक खास टास्क फोर्स बनाई जाएगी। काम की प्रगति पर हर महीने केंद्र को रिपोर्ट भेजनी होगी। यह निर्देश पिछले साल के एक पुराने आदेश का हवाला देते हुए जारी किया गया है, लेकिन अब इसे सख्ती से लागू करने पर जोर है। बिहार के सीमावर्ती जिलों में यह समस्या ज्यादा बताई जाती है। किशनगंज, अररिया, पूर्णिया और कटिहार जैसे इलाकों में पिछले दस सालों में अवैध आव्रजन की वजह से जनसांख्यिकी में बदलाव देखा गया है। अनुमान है कि बिहार में ऐसे 25 से 30 लाख लोगों के रहने की बात कही जा रही है। हालांकि हर जगह एक समान संख्या नहीं है, कुछ जिलों में यह संख्या ज्यादा है तो कुछ में कम।
केंद्रीय गृह मंत्री ने की थी डेमोग्राफी चेंज की समीक्षा
केंद्र में गृह मंत्री अमित शाह ने पिछले महीने बिहार के सीमावर्ती जिलों में हो रहे जनसांख्यिकीय बदलावों की समीक्षा की थी। उसी के बाद यह कदम तेज हुआ है। बांग्लादेश में नई सरकार बनने के बाद भी इस मुद्दे पर नजर रखी जा रही है। अधिकारी अब जिलों में विशेष टास्क फोर्स गठित करके काम शुरू करेंगे।
पहचान के बाद इन लोगों को संबंधित देशों की सीमा पर सौंपा जाएगा। बायोमेट्रिक रिकॉर्ड अपलोड करने से भविष्य में उनकी दोबारा एंट्री रोकी जा सकेगी। यह पूरा अभियान बिहार सरकार और केंद्र के बीच समन्वय से चलाया जाएगा। DM और SP को इस काम को प्राथमिकता देने को कहा गया है। अभी तक पिछले आदेशों पर ज्यादा अमल नहीं हुआ था, लेकिन अब स्थिति बदल रही है।
















