नई दिल्ली । भारत का शिक्षा और शोध (Education & Research) क्षेत्र लगातार साइबर हमलों का सबसे बड़ा शिकार बना हुआ है। नैस्डैक-लिस्टेड कंपनी चेक प्वाइंट सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजीज़ लिमिटेड (Check Point Software Technologies Ltd) की नवीनतम थ्रेट इंटेलिजेंस रिपोर्ट के अनुसार, इस सेक्टर पर औसतन प्रति संगठन 7,095 साप्ताहिक साइबर अटैक हुए। यह संख्या सरकारी संस्थानों और उपभोक्ता वस्तु कंपनियों से अधिक है और वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य क्षेत्र के बाद दूसरा सबसे ज्यादा निशाना है।
सरकारी और उपभोक्ता क्षेत्रों पर भी बढ़ा खतरा
रिपोर्ट में बताया गया कि शिक्षा क्षेत्र के बाद सबसे ज्यादा निशाना सरकारी संस्थान बने, जिन पर 5,140 साप्ताहिक हमले दर्ज हुए। वहीं, उपभोक्ता सामान और सेवाओं के क्षेत्र पर 3,889 साप्ताहिक हमले हुए। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि अलग-अलग उद्योगों पर साइबर खतरा लगातार बढ़ रहा है और कोई भी क्षेत्र इससे अछूता नहीं है।
भारत में औसत साइबर हमले वैश्विक औसत से कहीं ज्यादा
चेक प्वाइंट सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजीज़ के प्रेस रिलीज़ के अनुसार, भारत में संगठनों को पिछले छह महीनों में औसतन प्रति सप्ताह 3,233 साइबर अटैक का सामना करना पड़ा। यह आंकड़ा वैश्विक औसत 2,002 हमलों से कहीं ज्यादा है।
शिक्षा क्षेत्र पर बढ़ते साइबर हमलों के मुख्य कारण
– विस्तारित डिजिटल उपस्थिति (Expanded Digital Footprint) : हाइब्रिड लर्निंग मॉडल, व्यक्तिगत/साझा डिवाइसों का उपयोग और हाई-कनेक्टेड कैंपस ने अटैक सरफेस को काफी बढ़ा दिया है।
– संसाधनों की कमी (Resource Constraints) : कई संस्थान सीमित साइबर सुरक्षा बजट, पुराने आईटी इन्फ्रास्ट्रक्चर और छोटे आईटी स्टाफ पर निर्भर हैं, जिससे हैकर्स को आसानी से निशाना साधने का मौका मिलता है।
– ओपन एक्सेस प्लेटफॉर्म (Open Access Platforms) : रिसर्च, वर्चुअल क्लासरूम और कोलैबोरेशन के लिए इंटरनेट-फेसिंग टूल्स पर भारी निर्भरता हमलावरों को कई प्रवेश बिंदु देती है।
– हाई-वैल्यू टार्गेट (High-Value Targets) : इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी, संवेदनशील छात्र डेटा और सरकारी फंडेड रिसर्च तक पहुंच इस सेक्टर को साइबर अपराधियों के लिए बेहद आकर्षक बनाती है।
चेक प्वाइंट सॉफ्टवेयर का सुझाव
चेक प्वाइंट सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजीज़ इंडिया और साउथ एशिया के मैनेजिंग डायरेक्टर सुंदर बालासुब्रमणियन ने कहा, “भारत का शिक्षा और शोध क्षेत्र लगातार साइबर खतरों के केंद्र में बना हुआ है। इंफोस्टीलर्स और रिमोट एक्सेस ट्रोजन (RATs) हाइब्रिड लर्निंग मॉडल और कनेक्टेड इकोसिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठा रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि संस्थानों को क्लाउड-नेटिव सिक्योरिटी, एंडपॉइंट प्रोटेक्शन और एक्शन योग्य थ्रेट इंटेलिजेंस के जरिए “प्रिवेंशन-फर्स्ट” (Prevention First) रणनीति अपनानी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि इंटेलेक्चुअल कैपिटल की सुरक्षा और शैक्षणिक निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए हर डिजिटल रणनीति में कोर लेवल पर रेज़िलिएंस जरूरी है।
क्या है चेक प्वाइंट
चेक प्वाइंट सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजीज़ लिमिटेड (www.checkpoint.com) एआई-संचालित साइबर सिक्योरिटी सॉल्यूशंस के जरिए वैश्विक संगठनों की डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करने वाली प्रमुख कंपनी है। यह डिजिटल ट्रस्ट की रक्षा करने के लिए उन्नत साइबर सुरक्षा तकनीकों का उपयोग करती है और विश्वभर में संगठनों को मजबूत सुरक्षा प्रदान करती है।

















