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Italy: Palestine समर्थकों पर बरसीं Melony, कहा-इस्लामी जिहादी Hamas को बाहर करो, तब देंगे फिलिस्तीन को मान्यता’

पीएम मैलानी ने कहा, 'इटली फिलिस्तीनी राज्य को तभी मान्यता देगा जब सभी इस्राएली बंधकों को रिहा कर दिया जाएगा और आतंकवादी संगठन हमास को किसी भी सरकारी भूमिका से बाहर कर दिया जाएगा'

Written byAlok GoswamiAlok Goswami
Sep 24, 2025, 12:17 pm IST
in विश्व, विश्लेषण
प्रधानमंत्री जियोर्जिया मैलोनी

प्रधानमंत्री जियोर्जिया मैलोनी

दो दिन पहले इटली में जिस प्रकार से फिलिस्तीन के वोक समर्थकों ने रोम, मिलान और अन्य शहरों में उत्पात मचाया हुआ है, वह यूरोप के लिए एक और खतरे की घंटी ही है। गत 22 और 23 सितंबर को हजारों मजहबी उन्मादी उपद्रवियों के साथ ‘वोक’ गुटों ने रोम के मुख्य स्टेशन पर फिलिस्तीन समर्थक प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर उतर कर इटली सरकार के फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता देने से इनकार करने का विरोध किया। लेकिन इस उपद्रव पर प्रधानमंत्री जियोर्जिया मैलोनी का सख्त रुख देखने में आया है। इस्लामोफोबिया की गिरफ्त में जकड़ने को तैयार मजहबी तत्वों को मैलोनी ने कड़ा संदेश दिया है और संयुक्त राष्ट्र में भी इटली की इस भूमिका को अच्छे से रेखांकित किया है। साथ ही उन्होंने कहा कि विश्व में चल रहे युद्धों को रोकने में भारत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

संयुक्त राष्ट्र की वर्तमान में चल रही महासभा में अनके यूरोपीय देशों, जैसे ब्रिटेन, आस्ट्रेलिया, कनाडा, स्पेन, नॉर्वे और आयरलैंड ने फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता देने की घोषणा की है। लेकिन इस पृष्ठभूमि में, इटली का स्वाभिमान देखने लायक है। प्रधानमंत्री मैलोनी ने फिलिस्तीन को फिलहाल मान्यता न देने का रास्ता अपनाया है, और इसकी वजह बताते हुए स्पष्ट तर्क दिया है। इसी से नाराज होकर इटली को मजहबी तत्व सिर पर उठाने की कोशिश कर रहे हैं।

फिलिस्तीन समर्थकों के प्रदर्शन का केंद्र रोम का तेरमिनी स्टेशन रहा, जो देश का सबसे व्यस्त रेलवे हब है। हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारियों ने स्टेशन के बाहर एकत्र होकर प्रदर्शन किया। लेकिन कुछ क्षेत्रों से हिंसक झड़पें और उत्पात की भी खबरें सामने आईं, विशेषकर मिलान और नेपल्स जैसे शहरों से।

गत 22 और 23 सितंबर को हजारों मजहबी उन्मादी उपद्रवियों के साथ ‘वोक’ गुटों ने रोम के मुख्य स्टेशन पर फिलिस्तीन समर्थक प्रदर्शन किया

इटली के स्वाभिमान से समझौता न करने वाली प्रधानमंत्री कही गईं जियोर्जिया मैलोनी, ने इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन स्थल पर मीडिया के सामने और सोशल मीडिया पर बहुत ही स्पष्ट और सख्त बयान दिया है। उन्होंने कहा: ‘इटली फिलिस्तीनी राज्य को तभी मान्यता देगा जब सभी इस्राएली बंधकों को रिहा कर दिया जाएगा और आतंकवादी संगठन हमास को किसी भी सरकारी भूमिका से बाहर कर दिया जाएगा।’ पत्रकारों से बात करते हुए, मेलोनी ने कहा, “मैं फिलिस्तीन को मान्यता देने के खिलाफ़ नहीं हूं, लेकिन हमें अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट रखनी होंगी।”

सोशल मीडिया एक्स पर अपनी पोस्ट में मैलोनी ने मिलान के केंद्रीय रेलवे स्टेशन पर हुई हिंसक झड़पों पर नाराजगी जताई। उन्होंने लिखा, “मिलान से बेहद शर्मनाक तस्वीरें आ रही हैं।… स्वघोषित ‘पाल समर्थक’ लोग, स्वघोषित ‘एंटीफा’ सदस्य, स्वघोषित ‘शांतिवादी’ रेलवे स्टेशन पर उत्पात मचा रहे हैं।”

इटली की प्रधानमंत्री का उक्त बयान उन यूरोपीय देशों से इटली की दूरी को दर्शाता है जिन्होंने मान्यता की प्रक्रिया शुरू की है। साफ है कि मैलोनी की नीति में दो प्रमुख पहलू हैं। पहला है, सुरक्षा और आतंकवाद का मुद्दा। हमास को यूरोपीय संघ और अमेरिका ने एक आतंकवादी संगठन घोषित किया हुआ है। इसलिए इटली का मानना है कि जब तक हमास फिलिस्तीनी राजनीति से पूरी तरह बाहर नहीं होता, तब तक मान्यता देना आतंकवाद को वैधता देने जैसा होगा।

दूसरा प्रमुख पहलू है, बंधकों की रिहाई। 2023 के गाजा संघर्ष के दौरान कुछ इस्राइली नागरिकों को बंधक बनाया गया था। इटली इस मानवीय मुद्दे को प्राथमिकता दे रहा है और फिलिस्तीन की मान्यता को इससे जोड़ कर देख रहा है।

उधर इटली में प्रदर्शनकारियों का मानना है कि फिलिस्तीन को मान्यता देना सिर्फ एक राजनीतिक कदम नहीं, बल्कि ‘मानवाधिकारों की रक्षा’ का प्रतीक है। उनके मुख्य तर्क हैं—फिलिस्तीनियों की दशकों से उपेक्षा की जा रही है। उन्हें न्याय, जमीन और पहचान से वंचित किया जा रहा है।

उनके अनुसार, मान्यता देने का कदम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बातचीत के रास्ते खोल सकता है और दोनों पक्षों पर दबाव बना सकता है। वे कह रहे हैं कि जब अन्य यूरोपीय देश फिलिस्तीन को मान्यता दे रहे हैं, तो इटली का अलग रुख यूरोपीय संघ की एकता को कमजोर कर देगा।

हैरानी की बात है कि संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ और कई मानवाधिकार संगठन भी इटली पर दबाव बना रहे हैं कि वह एक मध्यस्थ की भूमिका निभाए, न कि सिर्फ एक पक्ष का समर्थन करे।

Topics: Italyइटलीpm melonyसंयुक्त राष्ट्रeuropeफिलिस्तीनPalestineUnited Nations
Alok Goswami
Alok Goswami
A Delhi based journalist with over 25 years of experience, have traveled length & breadth  of the country and been on foreign assignments too. Areas of interest include Foreign Relations, Defense, Socio-Economic issues, Diaspora, Indian Social scenarios, besides reading and watching documentaries on travel, history, geopolitics, wildlife etc. [Read more]
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