नई दिल्ली । विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय संयुक्त महामंत्री डॉ. सुरेंद्र जैन ने हालिया हिंसक घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि “आई लव मोहम्मद” के नाम पर देशभर में घृणा, अराजकता और हिंसा का नंगा नाच हो रहा है। उन्होंने बताया कि कई स्थानों पर “सर तन से जुदा” जैसे भड़काऊ नारे लगाए जा रहे हैं, पुलिस थानों पर हमले हो रहे हैं और पुलिसकर्मियों को पीटा जा रहा है। वाहनों को जलाया जा रहा है और इस्लाम की ताकत के प्रदर्शन के नाम पर हिंसा की जा रही है।
हिंदू और मुस्लिम त्यौहार पर हमले और हिंसा
डॉ. जैन ने कहा कि चाहे हिंदुओं का त्यौहार हो या मुसलमान का, दंगाई कभी मौका नहीं छोड़ते। मिलाद-उल-नबी और अन्य मौकों पर भी यही हिंसक घटनाएं हुई हैं। उन्होंने मुस्लिम समाज से पूछा कि “आई लव मोहम्मद” का नारा लगाने वाले क्या कभी “आई लव भारत माता” भी बोल सकते हैं? इस तरह की हिंसा से समाज में भय और अविश्वास फैल रहा है।
नई रणनीति और नाबालिगों का इस्तेमाल
विश्व हिंदू परिषद के नेता ने आगाह किया कि हिंसा में अब नई रणनीति अपनाई जा रही है। नाबालिग बच्चों को हिंसा में आगे किया जा रहा है। यह मानसिकता आत्मघाती है और देश के युवा पीढ़ी को खतरे में डाल रही है। जिनके हाथों में लैपटॉप होना चाहिए था, उन्हें पत्थर और हथियार पकड़ा जा रहा है। उन्होंने कश्मीर के अनुभव से सबक लेने की आवश्यकता पर जोर दिया।
विश्व स्तर पर हिंसा और प्रतिक्रिया
डॉ. जैन ने कहा कि यह हिंसा अब विश्व व्यापी हो गई है। फ्रांस, इटली, जर्मनी, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देशों में भी इसी तरह की अंधी, हिंसक और जिहादी गतिविधियां दिखाई दे रही हैं। कई स्थानों पर इसके प्रतिकूल प्रतिक्रिया भी देखने को मिली है, जो मानवता की स्वाभाविक प्रतिक्रिया है।
“काफिरोफोबिया” का खतरनाक स्वरूप
विहिप नेता ने स्पष्ट किया कि आज की समस्या इस्लामोफोबिया नहीं, बल्कि “काफिरोफोबिया” बन गई है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज का एक वर्ग मुल्लाह-मौलवी के भड़कावे में आकर हिंसा कर रहा है। अदालत और न्यायपालिका के आदेशों की अनदेखी कर हिंसा की तैयारी करना पूरी तरह अनुचित है। उनका कहना था कि केवल जिहादी जुनून और हिंसा में विश्वास रखना आत्मघाती रास्ता है।
शांतिपूर्ण सह अस्तित्व और चेतावनी
डॉ. जैन ने आगाह किया कि मुस्लिम नेताओं और मौलवियों को अपनी जुबान और जवानों पर काबू रखना चाहिए। सभी को शांतिपूर्ण सह अस्तित्व और देश प्रथम की नीति पर चलना चाहिए। विश्व हिंदू परिषद इस बात को लेकर स्पष्ट है कि हिंसा और अराजकता किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं और सभी को जिम्मेदारीपूर्वक आचरण करना चाहिए।

















