भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह दो दिन के लिए मोरक्को में थे। यह पहली बार था जब भारत का कोई रक्षा मंत्री उस उत्तरी अमेरिकी देश की यात्रा पर गया था। वहां एक रक्षा सम्मेलन में शामिल हुए भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान अधिक्रांत जम्मू कश्मीर (पीओजेके) को महत्वपूर्ण बयान दिया। प्रवासी भारतीयों के एक कार्यक्रम में दिया भारतभक्ति से ओतप्रोत उनका वह बयान भारत के पड़ोसी जिन्ना के देश को गहरे तक असर कर रहा है। उसे यह इतना चुभ रहा है कि राजनीतिक गलियारों में गहमागहमी बढ़ गई है। बेशक, राजनाथ के बयान के गहरे भू-राजनीतिक और सामरिक असर होने ही हैं। रक्षा मंत्री ने कहा था कि भारत बिना किसी आक्रामक कदम के पीओजेके पर नियंत्रण वापस पा लेगा, क्योंकि वहां की जनता मौजूदा पाकिस्तान सरकार से आजादी चाहती है। इस बयान ने न सिर्फ पाकिस्तान के राजनीतिक और सैन्य प्रतिष्ठानों में हलचल मचाई हुई है, बल्कि बलूच नेताओं ने भी इस बयान का स्वागत कर जिन्ना के देश के माथे पर बल डाले हुए हैं।
इसमें संदेह नहीं है कि भारत लंबे समय से पीओजेके को अपना अभिन्न हिस्सा बताता रहा है। भारतीय संसद ने 1994 में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर यह स्पष्ट कर दिया था कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के साथ-साथ पीओजेके और गिलगित-बाल्टिस्तान भी भारत का अभिन्न हिस्सा हैं। हाल के वर्षों में केन्द्र में राष्ट्रनिष्ठ सरकार के सत्ता में आने के बाद, भारत का यह रुख और मुखर हुआ है। अनुच्छेद 370 हटाने के बाद से भारत ने वैश्विक मंचों पर यह साफ संदेश दिया है कि पीओजेके पर पाकिस्तान का कब्जा अवैध है।

मोरक्को से आया राजनाथ सिंह का बयान भारत की इसी कूटनीतिक रणनीति का विस्तार माना जा सकता है। इस बयान के जरिए भारत अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह दिखाना चाहता है कि पीओजेके के लोग पाकिस्तान की दमनकारी नीतियों से परेशान हैं और स्वेच्छा से भारत से जुड़ना चाहते हैं। यदि यह धारणा मजबूत होती है तो पाकिस्तान के लिए वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति को यथावत रख पाना कठिन होगा।
जिन्ना का देश पहले ही राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक संकट और आतंरिक आतंकवाद की चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे में भारत के रक्षा मंत्री का यह बयान पाकिस्तान की जनता और विपक्षी दलों के बीच एक नई बहस छेड़ने वाला होना ही था।
पाकिस्तानी की सेना अब तक पीओजेके को लेकर अपने शैतानी ‘कश्मीर एजेंडे’ को कसकर पकड़े हुए है। लेकिन वहां की जनता के बीच असंतोष और भारत के इस बयान के समर्थन की खबरें सेना के भी पसीने छुड़ा रही हैं। बलूचों ने पाकिस्तानी सेना को पहले से कंपाया हुआ है। बलूचिस्तान में सेना कोई भी कार्रवाई करने से अब कतराने लगी है।
सबसे दिलचस्प पहलू तो बलूचिस्तान के नेताओं द्वारा राजनाथ सिंह के बयान का स्वागत करना रहा। बेशक, बलूचिस्तान लंबे समय से पाकिस्तान की आतताई सत्ता से आजादी की मांग करता आ रहा है। वहां के आंदोलनकारी पाकिस्तान सेना पर मानवाधिकार उल्लंघन और संसाधनों के शोषण का आरोप लगाते रहे हैं। ध्यान रहे, बलूच नेताओं का यह समर्थन दो संकेत तो जरूर देता है, एक, पीओजेके, गिलगित-बाल्टिस्तान और बलूचिस्तान, तीनों क्षेत्रों में पाकिस्तान की नीतियों के खिलाफ असंतोष है। भारत इस असंतोष को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाकर पाकिस्तान को नैतिक और राजनीतिक रूप से घेर सकता है।
बलूच समर्थन यह भी दर्शाता है कि पाकिस्तान केवल भारत से नहीं, बल्कि अपने ही प्रांतों से चुनौती का सामना कर रहा है। यदि यह असंतोष संगठित होता है तो पाकिस्तान के लिए अपनी अवाम को संभालना कठिन हो जाएगा।
भारत फिलहाल देश को अखंड बनाने के अपने प्रस्ताव पर कोई आक्रामक कदम भले नहीं उठा रहा है, लेकिन पाकिस्तान की अंदरूनी कमजोरी और स्थानीय असंतोष को रेखांकित करने से वैश्विक राय भारत के पक्ष में बनती दिख रही है। भारतीय सेना पहले ही नियंत्रण रेखा पर मजबूत स्थिति में है। पाकिस्तान के भीतर बढ़ती अस्थिरता भारत को बिना किसी आक्रामक कार्रवाई के रणनीतिक लाभ देती है।
कूटनीतिक तौर पर बात करें तो नया भारत सिर्फ रक्षात्मक रुख नहीं अपनाकर नहीं बैठ जाता, बल्कि सक्रिय रूप से पीओजेके का मुद्दा उठाता है। इससे पाकिस्तान के ‘कश्मीर नैरेटिव’ की धार कुंद पड़ती जा रही है। राजनाथ सिंह का मोरक्को से आया उक्त बयान पाकिस्तान को और मिर्ची लगा सकता है, जिस पर पाकिस्तान शायद कड़ी भाषा का इस्तेमाल करे, लेकिन उसके पास व्यावहारिक विकल्प बहुत सीमित हैं।
ऐसे में अगर पीओजेके और बलूच नेताओं की आवाजें और मुखर होती हैं, तो पाकिस्तान को बिखरने में देर नहीं लगेगी। दूसरी तरफ भारत शांतिपूर्ण ढंग से पीओजेके को लेकर स्पष्टता लाता जा रहा है। विश्व बिरादरी भारत के तर्कों को मान रही है, संयुक्त राष्ट्र में भी चीन के अलावा जिन्ना के देश का कोई आका नहीं है। वहां भी पाकिस्तान की आंतरिक अस्थिरता, बलूच नेताओं का आजादी का नारा और पीओजेके के लोगों में असंतोष, ये सभी मिलकर भारत के पक्ष को मजबूत बना रहे हैं।

















