दिल्ली के लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देश को संबोधित करते हुए विकसित भारत (विकसित भारत) के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सात मुख्य क्षेत्रों वाली रूपरेखा रखी। इसे उन्होंने ‘शक्ति की सप्तधारा’ या सप्तधारा कहा। यह विचार पुराने ‘सप्त सिंधु’ (सात नदियों) के संदर्भ से जुड़ा है। मोदी ने कहा कि अब विकसित भारत बनाने के लिए विकास की नई धारा चाहिए। उन्होंने बताया कि अगले पांच से सात साल में इस सप्तधारा की मदद से वे काम पूरे होंगे जो पिछले कई दशकों में नहीं हो सके। इसमें युवाओं की ताकत को भी पूरी तरह शामिल करने की बात कही गई।
विनिर्माण
पहला फोकस मैन्युफैक्चरिंग पर है। मोदी ने कहा कि भारतीय उत्पादों को लागत, गुणवत्ता और पैमाने पर प्रतिस्पर्धी बनाना होगा। छोटे पार्ट्स से लेकर बड़े उत्पादों तक पूरी वैल्यू चेन भारत में होनी चाहिए। गुणवत्ता पर कोई समझौता नहीं और ग्लोबल स्टैंडर्ड पूरा करना जरूरी है।
कृषि और खाद्य प्रसंस्करण
दूसरा क्षेत्र खेती और फूड प्रोसेसिंग का है। कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाना और उन्हें अंतरराष्ट्रीय ब्रांड बनाना है। फूड प्रोसेसिंग को बढ़ाकर किसानों को फायदा पहुंचाने पर जोर दिया गया।
तकनीक और नवाचार
तीसरा स्तंभ टेक्नोलॉजी और इनोवेशन है। डिजिटल और कम्युनिकेशन तकनीकों के साथ एआई, क्वांटम, स्पेस, रोबोटिक्स और डेटा सेंटर्स जैसी उभरती तकनीकों पर क्षमता बढ़ानी होगी। भारत सिर्फ बाजार न बने, बल्कि इन क्षेत्रों में खुद मजबूत हो।
गति शक्ति
यह गतिशीलता और कनेक्टिविटी से जुड़ा है। हाई-स्पीड ट्रांसपोर्ट और इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए लोगों और सामान की आवाजाही को तेज और आसान बनाना है।
रक्षा शक्ति
पांचवां क्षेत्र रक्षा सुरक्षा का है। रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भरता बढ़ाने और ड्रोन तथा सुपरसोनिक जैसी अगली पीढ़ी की क्षमताओं को विकसित करने पर जोर दिया गया।
हरित और नीली अर्थव्यवस्था
छठा फोकस ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी पर है। प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल करके टिकाऊ अर्थव्यवस्था बनाना और नए विकास के रास्ते खोलना।
सॉफ्ट पावर
सातवां क्षेत्र सॉफ्ट पावर है। योग, आयुर्वेद, समग्र स्वास्थ्य, रचनात्मक उद्योग और पर्यटन जैसी भारत की ताकतों को आगे बढ़ाने की बात कही गई। ये सात धाराएं मिलकर अगली पीढ़ी के सुधारों की नींव बनेंगी और विकसित भारत की दिशा में देश को आगे बढ़ाएंगी।
















