UNGA में Palestine को मान्यता देने को तैयार हैं 147 देश, Netanyahu ने कड़ा संदेश दिया-'फिलिस्तीन राज्य रहेगा ही नहीं'
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UNGA में Palestine को मान्यता देने को तैयार हैं 147 देश, Netanyahu ने कड़ा संदेश दिया-‘फिलिस्तीन राज्य रहेगा ही नहीं’

फिलिस्तीन के प्रति बढ़ते समर्थन से स्पष्ट हो रहा है कि इस्राएल पर इस वक्त नैतिक और कूटनीतिक दबाव बढ़ रहा है। लेकिन प्रधानमंत्री नेतन्याहू को अपने देश का अधिकांशत: समर्थन प्राप्त है और इस्राएल चाहता है कि हमास जैसे जिहादी नासूर हो हमेशा के लिए अंत हो जाए

Written byAlok GoswamiAlok Goswami
Sep 22, 2025, 12:17 pm IST
in विश्व, विश्लेषण
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संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में आज का दिन इस्राएल—हमास तनाव की दृष्टि से विशेष महत्व का रहने वाला है। आज की बैठक में विश्व के सदस्य देश फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता देने या न देने की ​कवायद में शामिल होंगे। कुछ पश्चिमी देशों ने तो फिलिस्तीन के प्रति अपना समर्थन सार्वजनिक रूप से व्यक्त भी कर दिया है। जैसे, ब्रिटेन, कनाडा और आस्ट्रेलिया घोषणा कर चुके हैं कि वे इस प्रस्ताव के पक्ष में हैं। अन्य अनेक देश भी आज की बैठक में आधिकारिक रूप से इस प्रस्ताव को समर्थन देने का मन बना चुके हैं। यह निर्णय ऐसे समय में आ रहा है जब गाजा पट्टी में इस्राएल और हमास के बीच संघर्ष और तेज हो चला है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पैदा हुए मानवीय संकट को लेकर दुनियाभर में बहस तो छिड़ी है, लेकिन अधिकांश विशेषज्ञ 7 अक्तूबर 2024 को फिलिस्तीन और हमास के कट्टर जिहादी तत्वों द्वारा दर्शाई बर्बरता और यहूदी विरोध को अनदेखा कर रहे हैं। इस बात से इस्राएल को शिकायत होना स्वाभाविक है जो हमास को नेस्तोनाबूद करने का प्रण लिए हुए है। ‘दो-राष्ट्र समाधान’ के प्रति इस्राएल के प्र​धानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार को आपत्ति क्यों है, इस मौके पर इस पर विशद चर्चा आवश्यक प्रतीत होती है।

UNGA में फिलिस्तीन के प्रति बढ़ते समर्थन से स्पष्ट है कि इस्राएल पर इस वक्त नैतिक और कूटनीतिक दबाव बढ़ रहा है

हाल में आईं रिपोर्ट बताती हैं कि लगभग 147 से 151 देशों ने फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता देने का मन बना लिया है। इस परिस्थिति में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का बयान भी गौर करने लायक है कि ‘फिलिस्तीन रहेगा ही नहीं’।

संयुक्त राष्ट्र में पेश प्रस्ताव ‘दो-राष्ट्र समाधान’ के पक्ष और विपक्ष में मत विभाजन की मांग करता है। यह दो राष्ट्र समाधाल असल में एक राजनीतिक अवधारणा है, जिसके तहत इस्राएल और फिलिस्तीन के बीच भूमि को दो हिस्सों में विभाजित कर, दोनों को स्वतंत्र, संप्रभु राष्ट्र के रूप में मान्यता दिए जाने का प्रस्ताव है। इस ‘समाधान’ का उद्देश्य यही है कि इस्राएल को एक यहूदी बहुल सुरक्षित राष्ट्र के रूप में मान्यता दी जाए, और फिलिस्तीनियों को वेस्ट बैंक, गाजा पट्टी और पूर्वी यरुशलम में एक स्वतंत्र राष्ट्र स्थापित करने की अनुमति दी जाए।

असल में यह ‘समाधान’ 1993 के ‘ओस्लो समझौते’ और उसके बाद की कई वार्ताओं के केंद्र में रहा है। हालांकि अब तक इस पर कोई ठोस परिणाम नहीं निकल सका है। संयुक्त राष्ट्र महासभा में इसी प्रस्ताव पर लंबी बहसें चल चुकी हैं और तनाव बढ़ने के कारण किसी नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सका है।

प्रधानमंत्री नेतन्याहू को अपने देश का अधिकांशत: समर्थन प्राप्त है और इस्राएल चाहता है कि हमास जैसे जिहादी नासूर हो हमेशा के लिए अंत हो 

अब ताजा हालात में आमसभा में फिलिस्तीन को राष्ट्र का दर्जा देने के समर्थन में बढ़ती संख्या के कई कारण हैं। एक, गाजा में चल रहे हमास-इस्राएल युद्ध में हजारों नागरिकों की मौत और विस्थापन के दृश्य देखकर विश्व की सेकुलर बिरादरी हैरान हो रही है। दो, फिलिस्तीन की वकालत करने वालों को इस्राएल द्वारा वेस्ट बैंक में रिहायशी बस्तियों का विस्तार करना और सैन्य कार्रवाई करना गले नहीं उतर रही है, उन्हें यह असंतुलित और अन्यायपूर्ण लग रही है। फिलिस्तीन 2012 से संयुक्त राष्ट्र में गैर-सदस्य पर्यवेक्षक राज्य है। अब विश्व का एक बड़ा वर्ग इसे पूर्ण सदस्यता दिलाने के पक्ष में है।

इस्राएली प्रधानमंत्री नेतन्याहू और उनकी सरकार इसी के विरुद्ध हैं। वे ‘दो-राष्ट्र समाधान’ का खुलकर विरोध करते आ रहे हैं। उनके पास भी इसके अनेक तर्क हैं। जैसे, इस्राएल का कहना है कि अगर वेस्ट बैंक और गाजा को पूरी तरह संप्रभुता दी जाती है, तो यह क्षेत्र आतंकवादी गतिविधियों का अड्डा बन सकता है, जैसा कि हमास के नियंत्रण वाले गाजा क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। फिर यरुशलम का मुद्दा भी चुभने वाला है। इस्राएल पूरे यरुशलम को अपनी अविभाज्य राजधानी मानता है, जबकि फिलिस्तीनी पूर्वी यरुशलम को अपने ‘भावी राष्ट्र की राजधानी’ मानते हैं।

इसके अलावा, नेतन्याहू की सरकार ‘दक्षिणपंथी राष्ट्रवादी विचारधारा’ की सरकार मानी जाती है, जो फिलिस्तीन को अलग राष्ट्र मानने की विरोधी है। कुछ पांथिक यहूदी गुटों का मानना है कि ‘यहूदी राज्य’ की भूमि ‘ईश्वर द्वारा दी गई है’ इसलिए उसे विभाजित नहीं किया जाना चाहिए।

इन सब परिस्थितियों के बीच नेतन्याहू का ताजा बयान भी है कि अब ‘फिलिस्तीन रहेगा ही नहीं’। नेतन्याहू, जो खुद संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाग लेने के लिए न्यूयार्क में ही हैं, उन्होंने एक कड़ा बयान जारी करके कहा है कि “मुझे उन नेताओं को एक स्पष्ट संदेश देना है जो 7 अक्तूबर के भयानक नरसंहार के बाद एक फिलीस्तीनी राज्य को मान्यता दे रहे हैं: आप आतंकवाद को महिमामंडित करके उसे सम्मान दे रहे हैं। मेरे पास आपके लिए एक और संदेश है: यह होने वाला नहीं है।”

नेतन्याहू का यह बयान गाजा में इस्राएल की मौजूदा नीति को झलकाता है। इसके विभिन्न निहितार्थ हो सकते हैं। जैसे, इसका मतलब हो सकता है कि हमास को जड़ से खत्म कर दिया जाएगा और उसका कोई राजनीतिक या सैन्य अस्तित्व शेष नहीं रहेगा। दूसरे, संभावना है कि इस्राएल गाजा को फिलिस्तीनी प्रशासन से छीनकर सीधे या किसी मित्र राष्ट्र के माध्यम से नियंत्रित करना चाहता है।

नेतन्याहू का उक्त बयान दुनिया को यह दर्शाता है कि इस्राएल अब ‘यथास्थिति’ बनाए रखने के पक्ष में नहीं है। अब वह फिलिस्तीनियों को नियंत्रण में रखने के लिए और भी कठोर कदम उठा सकता है। साफ है कि अगर इस्राएल फिलिस्तीन को राष्ट्र मानने की वैश्विक पहल का विरोध करता है, तो वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अलग-थलग पड़ सकता है। UNGA में फिलिस्तीन के प्रति बढ़ते समर्थन से स्पष्ट है कि इस्राएल पर इस वक्त नैतिक और कूटनीतिक दबाव बढ़ रहा है। लेकिन प्रधानमंत्री नेतन्याहू को अपने देश का अधिकांशत: समर्थन प्राप्त है और इस्राएल चाहता है कि हमास जैसे जिहादी नासूर हो हमेशा के लिए अंत हो जाए।

Topics: GazaPalestineHamasnetyanahuनेतन्याहूइस्राएलगांजाungaIslamic Terrortwo nation solutionफिलिस्तीन
Alok Goswami
Alok Goswami
A Delhi based journalist with over 25 years of experience, have traveled length & breadth  of the country and been on foreign assignments too. Areas of interest include Foreign Relations, Defense, Socio-Economic issues, Diaspora, Indian Social scenarios, besides reading and watching documentaries on travel, history, geopolitics, wildlife etc. [Read more]
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