खाड़ी में चल रहे युद्ध के बीच अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता चल रही है। ये वार्ता लगातार फेल हो रही है। इसी क्रम में एक बार फिर से अमेरिका के द्वारा दिए गए शांति प्रस्ताव का ईरान ने जबाव दे दिया है। ये जबाव कथित मध्यस्थ पाकिस्तान के जरिए ये जवाब वाशिंगटन भेजा गया। हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप ने इसे पूरी तरह से अस्वीकार कर दिया है। उनका कहना है कि यह मुझे पसंद ही नहीं है।
द गॉर्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, एक तरफ दोनों देशों के बीच शांति वार्ता चल रही है, तो वहीं दूसरी ओर उसी दिन इलाके में ड्रोन हमलों की खबरें आईं और युद्धविराम टूटने के संकेत मिले। इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने भी कहा कि लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई। जबकि, ईरान ने शांति वार्ता में अमेरिकी प्रतिबंध हटाने, होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका की नौसेना की रोक हटाना और युद्ध तुरंत खत्म करने के साथ हमले न दोहराने की गारंटी मांगी है।
शांति प्रस्ताव क्या था?
एक हफ्ता पहले अमेरिका ने 14 पॉइंट का छोटा MoU दिया था। इसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और ईरान के न्यूक्लियर कार्यक्रम पर आगे बातचीत का रास्ता था। ईरान अब इसी पर अपना जवाब दे रहा है।
न्यूक्लियर स्टॉकपाइल पर विवाद
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने CBS के 60 मिनट्स को बताया कि जब तक ईरान के पास हाईली एनरिच्ड यूरेनियम (HEU) का स्टॉक है, जो न्यूक्लियर हथियार बनाने के करीब है, तब तक लड़ाई खत्म नहीं मानी जा सकती। उन्होंने कहा, “हमें वह सामग्री निकालनी होगी और एनरिचमेंट साइटें खत्म करनी होंगी।” उन्होंने सुझाव दिया कि अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान में जाकर इसे सुरक्षित कर सकते हैं।
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ट्रंप बोले सेटेलाइट से रख रहे नजर
वहीं ईरानी परमाणु जखीरे को लेकर ट्रंप का कहना है कि फिलहाल सैटेलाइट से निगरानी की जा रही है। उन्होंने कहा, “स्पेस फोर्स की वजह से हम देख रहे हैं। अगर कोई पास गया तो हम जान जाएंगे और उड़ा देंगे।” उन्होंने ये भी कहा कि जरूरत पड़ी तो अमेरिका दो हफ्ते और हमले कर सकता है, क्योंकि पहले के टारगेट्स में से करीब 70% पूरे हो चुके हैं।
अमेरिका का दावा है कि ईरान के पास करीब 440 किलो 60% शुद्धता वाला है। माना जाता है कि यह हथियार बनाने के बहुत करीब है। ईरानी सेना ने कहा है कि वे इस स्टॉक की पूरी सुरक्षा के लिए तैयार हैं।
क्या है होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति
युद्ध शुरू होने के बाद ईरान ने जलडमरूमध्य बंद कर दिया था। अब वहां तनाव बना हुआ है। ट्रंप ने ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ शुरू किया था ताकि फंसे जहाजों को निकाला जा सके, लेकिन सऊदी अरब ने अपने बेस इस्तेमाल नहीं करने दिया, इसलिए इसे जल्दी बंद कर दिया गया।
ईरान कहता है कि वहां से गुजरने वाले सभी जहाजों को उसके साथ समन्वय करना चाहिए और 20 लाख डॉलर टोल देना चाहिए। एक पनामा फ्लैग वाला जहाज हाल ही में ब्राजील के लिए निकलने की इजाजत मिली। फ्रांस और ब्रिटेन समुद्री सुरक्षा के लिए मिशन की बात कर रहे हैं, लेकिन ईरान ने चेतावनी दी है।

















