न्यायिक व्यवस्था विकसित भारत के लिए सबसे बड़ी रुकावट: PM मोदी के EAC संजीव सान्याल
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न्यायिक व्यवस्था विकसित भारत के लिए सबसे बड़ी रुकावट: PM मोदी के EAC संजीव सान्याल

पीएमईएसी के संजीव सान्याल ने 'न्याय निर्माण 2025' में न्यायिक सिस्टम को आर्थिक विकास की सबसे बड़ी बाधा बताया। कानूनी जटिलताओं, अनिवार्य मीडिएशन और 'माय लॉर्ड' जैसे पुराने शब्दों पर तीखी आलोचना की। विकसित भारत के लिए सुधार जरूरी।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
Sep 21, 2025, 12:40 pm IST
inविश्व
Sanjeev Sanyal legal battle

संजीव सान्याल, प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC) के सदस्य संजीव सान्याल ने देश की न्यायिक व्यवस्था पर बड़ा सवाल उठाते हुए कहा कि यही देश को विकसित भारत बनाने की राह में बड़ा रोड़ा है। ये बातें उन्होंने ‘न्याय निर्माण 2025’ कार्यक्रम के दौरान कही। सान्याल ने कहा कि न्यायिक सिस्टम और कानूनी पारिस्थितिकी, लेकिन खासकर न्यायिक सिस्टम, अब मेरी नजर में विकसित भारत बनने और तेजी से बढ़ने की सबसे बड़ी रुकावट है।

जनरल काउंसल्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (जीसीएआई) की ओर से आयोजित कार्यक्रम में ‘विकसित भारत @ 2047’ विषय पर ये बातें कही। जिस वक्त सान्याल ने ये बातें कही उस दौरान सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस मनमोहन और पंकज मिठल भी वहां मौजूद थे। इसके अलावा इसमें मंत्री, जज, नीति निर्माता और उद्योग जगत के लोग शामिल हुए।

सान्याल ने यहां जोर देकर कहा कि भले ही हम भौतिक इंफ्रास्ट्रक्चर या शहरों के विकास पर कितना भी पैसा लगाएं, लेकिन अगर अदालतें समय पर कॉन्ट्रैक्ट्स लागू नहीं कर पातीं या न्याय नहीं दे पातीं, तो आर्थिक विकास रुक जाएगा। उन्होंने कानूनी दुनिया की उन कमियों पर उंगली उठाईं जो रोजमर्रा की जिंदगी को जटिल बना रही हैं। सान्याल ने ये भी बताया कि वो पहले भी नौकरशाहों, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और अर्थशास्त्रियों से सीधी बातें कर चुके हैं, और अब कानूनी भाइयों-बहनों से भी यही उम्मीद है।

इसे भी पढ़ें: आज शाम 5 बजे देश को संबोधित करेंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

कानूनों की जटिलता

सान्याल ने एक दिलचस्प ’99-1 समस्या’ का जिक्र किया। उन्होंने समझाया कि भारत के ज्यादातर नियम-कानून एक छोटे से हिस्से (1%) के दुरुपयोग को रोकने के लिए बनाए जाते हैं, क्योंकि हमारी न्यायिक व्यवस्था उन अपवादों को जल्दी सुलझा नहीं पाती। नतीजा? बाकी 99% लोगों के लिए कानून इतने उलझे हो जाते हैं कि जिंदगी मुश्किल। सान्याल बोले, “क्योंकि वहां ये ठीक नहीं होगा, इसलिए बाकी 99% कानून और नियम उस 1% को संभालने के लिए जटिल हो जाते हैं, जो एक चक्र में फंस जाता है।” ये समस्या न सिर्फ आर्थिक फैसलों को लटकाती है, बल्कि पूरे सिस्टम को बोझिल बना देती है।

प्री-लिटिगेशन मीडिएशन की आलोचना

कमर्शियल कोर्ट्स एक्ट की धारा 12ए के तहत प्री-लिटिगेशन मीडिएशन पर सान्याल ने तीखी आलोचना की। मुंबई की कमर्शियल कोर्ट्स के डेटा से पता चला कि ये मीडिएशन 98-99% मामलों में फेल हो जाता है। इससे केस कोर्ट में लौटने से पहले महीनों की देरी और खर्च बढ़ जाता है। सान्याल ने कहा, “मीडिएशन का आइडिया बुरा नहीं, लेकिन इसे अनिवार्य बनाने से समस्या हो गई। आपने बस प्रक्रिया में छह महीने जोड़ दिए। क्यों न इसे स्वैच्छिक बना दें?” उनकी और दूसरों की कोशिशों से मीडिएशन एक्ट 2023 से ऐसी अनिवार्य धारा हटा दी गई।

कानूनी पेशे की पुरानी संरचना पर सवाल

सान्याल ने बार काउंसिल की ‘मध्ययुगीन गिल्ड’ जैसी संरचना पर चुटकी ली। सीनियर एडवोकेट्स, एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड और बाकी वकीलों के बीच ये भेदभाव क्यों? उन्होंने पूछा, “21वीं सदी में इन सबकी जरूरत क्यों? कई स्तर के कानूनी कामों के लिए कानूनी डिग्री क्यों जरूरी? ये एआई का जमाना है।” सान्याल का मानना है कि कानूनी पेशा अपनी कमियों को स्वीकार करे, न कि कानूनी कॉन्फ्रेंस में खुद की तारीफ करने में व्यस्त रहे।

लोकतंत्र के लिए शर्मनाक है माय लार्ड जैसा शब्द

सान्याल ने कोर्ट की पुरानी भाषा और प्रथाओं पर भी निशाना साधा। ‘माय लॉर्ड’ कहना या पिटिशन को ‘प्रेयर’ बोलना—ये लोकतांत्रिक गणराज्य के लिए शर्मनाक है। उन्होंने कहा, “आप ऐसी प्रोफेशन में ये शब्द इस्तेमाल नहीं कर सकते। हम सब एक ही लोकतांत्रिक गणराज्य के नागरिक हैं।” लंबी कोर्ट वेकेशन पर भी सवाल उठाया—पुलिस या अस्पताल तो महीनों बंद नहीं होते, तो न्यायपालिका क्यों? न्यायपालिका भी एक पब्लिक सर्विस है, जो रुकना चाहिए ही नहीं।

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कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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