राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी वोट चोरी का गलत आरोप बढ़-चढ़ कर लगा रहे हैं। राहुल गांधी का आरोप महज मिथ्या हैं। राहुल गांधी इस तरह का आरोप लगा करके केवल अपनी लगातार चुनावी हार से अपने समर्थकों और जनता को दिग्भ्रमित करना चाहते हैं। देश में सैकड़ों ऐसे उद्धरण हैं जब एक ही साथ मतदान होने पर विधानसभा और लोकसभा के चुनाव में अलग-अलग परिणाम देखने को मिला है।
वोट चोरी के झूठ का पर्दाफाश
हम कुछ उद्धरण से राहुल गांधी के इस वोट चोरी के आरोप का पर्दाफाश करेंगे। महाराष्ट्र की धुले लोकसभा की सीट कांग्रेस पार्टी ने लगातार तीन लोकसभा 2009, 2014 और 2019 में हार के बाद इस बार जीतने में सफल हुई है। इस जीत के भी कई आयाम हैं। इस लोकसभा के अंतर्गत आने वाली छह विधानसभा की सीटों में पांच पर भाजपा ने बढ़त बनाया था, जबकि सिर्फ एक विधानसभा की सीट मालेगाव सेंट्रल की सीट पर कांग्रेस ने 194327 वोटों की बढ़त बनाकर यह सीट कांग्रेस पार्टी के बच्छाव शोभा दिनेश ने 3831 मतों से जीतने में सफलता प्राप्त की। मालेगाव सेंट्रल विधानसभा की सीट पर कुल पड़े मतों का 96.73 मत था। मगर कुछ समय के बाद हुए विधानसभा के चुनाव में कांग्रेस पार्टी को महज 3.13 प्रतिशत मत मिलता है। इस सीट पर विधानसभा के चुनाव में ओवैसी की पार्टी को जीत मिलती है।
असम की धुबरी लोकसभा सीट के आंकड़े
दूसरा असम के धुबरी लोकसभा सीट पर 2009 से 2019 तक लगातार बदरुद्दीन अजमल ने बड़े मतों के अंतर से चुनाव जीता था। इस सीट पर विगत लगातार तीन लोकसभा चुनाव 2014, 2019 और 2024 में सबसे ज्यादा 88.36, 90.66 और 92 .10 प्रतिशत से ज्यादा मतदान होने का रिकॉर्ड दर्ज है। मगर इस बार के लोकसभा के चुनाव में कांग्रेस पार्टी के रकीबुल हुसैन ने बदरुद्दीन अजमल को देश में सबसे अधिक 10,12,476 मतों के अंतर से हरा दिया। रकीबुल हुसैन के जीत का अंतर कांग्रेस पार्टी के एक तिहाई से अधिक 34 सांसदों की जीत के कुल वोटों के अंतर से भी अधिक है। इस लोकसभा के अंतर्गत आने वाली 11 विधानसभा की सीटों में एक पर भी बदरुद्दीन अजमल प्रथम पायदान पर आने में नाकाम रहे। अतएव क्या धुबरी लोकसभा की सीट पर कांग्रेस पार्टी ने बदरुद्दीन अजमल का मत चोरी कर लिया। कांग्रेस पार्टी का वोट चोरी का आरोप मिथ्या से ज्यादा कुछ और नहीं है।
बात बिहार की
संयुक्त बिहार के आखिरी लोकसभा चुनाव 1999 में 41 लोकसभा की सीट जीतती है और कुल 324 विधानसभा की सीटों में एनडीए कुल 196 विधानसभा की सीटों पर बढ़त बनाने में कामयाब होती है। लेकिन, कुछ समय के बाद हुए विधानसभा चुनाव में एनडीए 123 विधानसभा की सीट ही जीत सकी थी। कर्नाटक में 1984 के लोकसभा के चुनाव में कांग्रेस पार्टी 24 लोकसभा की सीट जीतती हैं वही कुछ समय के बाद हुए विधानसभा के चुनाव में जहां जनता पार्टी 139 सीट जीतती है, तो वहीं कांग्रेस पार्टी महज 65 सीटों पर सिमट जाती है।
2024 के लोकसभा चुनाव के साथ ही चार राज्यों ओडिशा, आंध्र प्रदेश, नागालैंड और सिक्किम के विधानसभा के चुनाव भी संपन्न हुए थे। ओडिशा में जहाँ विधानसभा चुनाव में जहाँ भाजपा 78 विधानसभा की सीट जीतती है। साथ ही लोकसभा के चुनाव में 111 विधानसभा की सीटों पर बढ़त बनाने में कामयाब हुई थी। नागालैंड में लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने इस सीट पर जीत दर्ज़ की। नागालैंड विधानसभा में कुल 60 सीटें हैं, जिनमें लोकसभा के चुनाव में केवल 40 सीटों पर ही मतदान हुआ था। कांग्रेस पार्टी 27 विधानसभा सीटों पर लोकसभा चुनाव में बढ़त बनाने में कामयाब रही, मगर नागालैंड के विधानसभा में कांग्रेस पार्टी का एक भी विधायक नहीं है।
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अरुणाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव
लोकसभा चुनाव के साथ ही पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश में विधानसभा के चुनाव हुए। अरुणाचल प्रदेश में लोकसभा चुनाव में जहां कांग्रेस पार्टी को 16 विधानसभा की सीटों पर बढ़त मिली, वहीं विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी केवल एक सीट ही जीत सकी थी।
कांग्रेस का पश्चिम बंगाल विधानसभा में एक भी विधायक नहीं है, लेकिन फिर भी 2024 के लोकसभा के चुनाव में पार्टी ने 10 विधानसभा की सीटों पर बढ़त बनाई थे। पश्चिम बंगाल की तरह ही दिल्ली विधानसभा में कांग्रेस पार्टी का एक भी विधायक नहीं है, मगर लोकसभा के चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने 8 विधानसभा की सीटों पर बढ़त बनाने में कमयाब हुई थी। नागालैंड का उद्धरण सबके सामने है, जहां कांग्रेस का एक भी विधायक नहीं होने के बावजूद भी कांग्रेस पार्टी अच्छे मतों से लोकसभा चुनाव में सीट जीतने में कामयाब रही थी।

















