Bangladesh में क्या खिचड़ी पका रहे हैं American Army अफसर! चटगांव के रेडिसन ब्लू होटल में गुमनाम बनके क्यों रह रहे!
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Bangladesh में क्या खिचड़ी पका रहे हैं American Army अफसर! चटगांव के रेडिसन ब्लू होटल में गुमनाम बनके क्यों रह रहे!

मीडिया में अंदेशे जताए जा रहे हैं कि अगर बांग्लादेश में अमेरिकी मौजूदगी बढ़ी तो यह चीन और भारत के बीच ताकत के संघर्ष की नजर से एक रणनीतिक कदम हो सकता है

Written byAlok GoswamiAlok Goswami
Sep 18, 2025, 12:16 pm IST
in विश्व, विश्लेषण
अंदरखाने खबर है कि अमेरिका सैन्य दृष्टि से बांग्लादेश में कुछ बड़ा करने की सोच रहा है!

अंदरखाने खबर है कि अमेरिका सैन्य दृष्टि से बांग्लादेश में कुछ बड़ा करने की सोच रहा है!

खबर है कि इस समय ‘अमेरिकी सेना/वायुसेना के 120 सैनिक बांग्लादेश की राजधानी ढाका के रास्ते चटगांव में हैं। उनके आने का ब्योरा देखें तो पता चलता है कि वे गत 10 सितम्बर को ढाका पहुंचे थे और वहां से फिर आगे चटगांव गए। ये सभी अमेरिकी सैन्य अधिकारी रेडिसन ब्लू होटल में ठहरे हैं। इस तरह का दावा एक प्रमुख अखबार द्वारा किया जाना दक्षिण एशिया के इस क्षेत्र में सैन्य विशेषज्ञों में कौतुहल का विषय बना है। इसके पीछे अनेक संभावनाएं जताई जा रही हैं जिनकी पुख्ता पुष्टि अभी नहीं हो पाइ है। लेकिन उठ रहे सवाल अपने में बहुत महत्वपूर्ण हैं। इस विषय पर अभी ठोस जानकारी तो नहीं है लेकिन अंदरखाने खबर है कि अमेरिका सैन्य दृष्टि से बांग्लादेश में कुछ बड़ा करने की सोच रहा है। ऐसे में आवश्यक है कि इस घटनाक्रम पर बांग्लादेश और अमेरिकी के रुख, मीडिया में आई रिपोर्ट और रणनीतिक निहिता​र्थों की थोड़ी छानफटक की जाए।

कहने को तो फैक्ट चैक करने वाली एक विदेशी एजेंसी ने इस बात को पुख्ता नहीं बताया है कि बांग्लादेश के कोक्स बाजार में अमेरिकी सैनिकों की उपस्थिति है। लेकिन एक नहीं अनेक मीडिया स्रोतों ने रिपोर्ट प्रकाशित की है कि ‘लगभग 120 अमेरिकी सैन्य अफसर’ चटगांव के रेडिसन ब्लू होटल में 10 सितंबर को आए तो हैं, लेकिन इसे गुप्त रखते हुए होटल के रजिस्टर में उनके नाम दर्ज नहीं किए गए हैं। आखिर क्यों? क्या वजह हो सकती है इस गोपनीयता के पीछे?

बांग्लादेश की सरकारी या आधिकारिक मीडिया/सूचना माध्यमों (जैसे ढाका ट्रिब्यून, द डेली स्टार और सरकारी वक्तव्य) ने अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के इस तरह से आने को ‘स्थायी आधार’ स्थापित करने की कोशिश नहीं माना है।

बांग्लादेश‑अमेरिका के बीच सैन्य साझेदारी की बात करें तो उस दृष्टि से यह अभी भी संयुक्त अभ्यासों, सामरिक उपकरण लेने, समुद्री सुरक्षा समन्वय व सीमा निगरानी उपकरणों का विकास करने तक ही बताई जाती है।

बांग्लादेश में पूर्ववर्ती शेख हसीना की सरकार इस ओर बहुत सतर्क रही थी कि कोई विदेशी, विशेषकर अमेरिकी सैन्य अड्डा उनके यहां स्थापित न हो पाए। पिछले आम चुनावों से पहले खुद तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अमेरिका से जबरदस्त दबाव डाले जाने का दावा किया था। साथ ही, हसीना ने यह स्पष्ट कहा था कि बांग्लादेश की सरकार ऐसा कोई निर्णय नहीं लेने वाली है। कोई विदेशी ‘स्थायी सैन्य अड्डा’ नहीं बनने दिया जाएगा। कहते हैं, अमेरिका में मौजूद डीप स्टेट ने ही गत वर्ष शेख हसीना के विरुद्ध ‘छात्र आंदोलन’ भड़काया था।

वर्कर्स पार्टी के नेता रशीद खान ने कहा है कि अमेरिकी दबाव तो है कि बांग्लादेश में स्थायी अड्डे आदि की अनुमति मिल जाए (File Photo)

ढाका ट्रिब्यून के अनुसार, अमेरिकी सैन्य अधिकारी भी आम बातचीत में कहते रहे हैं कि उनके वर्तमान कार्यक्रम साझेदारी, अभ्यास और क्षमता निर्माण व आपदा प्रबंधन जैसी गतिविधियों से ही जुड़े हैं, ‘स्थायी उपस्थिति’ बनाने का उनका कोई इरादा नहीं है।

लेकिन ताजा घटनाक्रम पर बांग्लादेश की मीडिया रिपोर्ट ‘120 सैनिकों के लिए 85 कमरे आरक्षित’ होने के दावे कर रही हैं। लेकिन होटल के रजिस्टर में नाम न दर्ज होने से ढाका में बैठी अंतरिम सरकार और अमेरिकी सेना इसे ‘अफवाहें’ ही बताने में अधिक संतुष्ट दिखती है।

इसलिए, वर्तमान हालात में यह पुख्ता तौर पर नहीं कहा जा सकता कि अमेरिका वहां कोई ‘स्थायी अड्डा’ स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। क्योंकि कागज पर ऐसा कुछ दर्ज नहीं किया गया है। इसलिए कुछ जानकारों को अधिक संभावना युद्ध अभ्यासों, तैयारियों और सैन्य‑सहयोग की योजनाओं की लग रही है। शायद इसके माध्यम से दोनों देशों के रणनीतिक और राजनयिक लक्ष्य पूरे होने को हों।

बांग्लादेश के मीडिया में ऐसी चर्चाएं भी चलीं कि यूनुस सरकार के रहते कुछ देश बांग्लादेश को भू‑राजनीतिक मोहरे की तरह उपयोग करना चाहते हैं। उदाहरण के लिए कह सकते हैं कि वर्कर्स पार्टी के नेता रशीद खान ने कहा है कि अमेरिकी दबाव तो है कि बांग्लादेश में स्थायी अड्डे आदि की अनुमति मिल जाए।

जैसा पहले बताया, पूर्व प्रधानमंत्री शेख़ हसीना ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि अमेरिका ने उनसे बंगाल की खाड़ी में सेंट मार्टिन द्वीप पर समझौता करके उनके अड्डे के लिए जगह बनाने का दबाव डाला था।

इधर बांग्लादेश के प्रमुख विपक्षी दल, बीएनपी ने रिपोर्ट को अविश्वसनीय या तर्क से परे बताया है, उसने इन्हें राजनीतिक बयानबाजी या डर फैलाने की कोशिश बताया है।

वैसे इसमें दोराय नहीं है कि अमेरिका की विदेश नीति और रक्षा संबंधों के लिए बांग्लादेश को रणनीतिक रूप से आंका जा रहा है, विशेषकर बंगाल की खाड़ी, समुद्री मार्गों, समुद्री सुरक्षा, चीन‑भारत के बीच संतुलन बैठाने आदि वैश्विक रणनीति के हिस्से के संदर्भ में।

हालांकि अमेरिकी राज्य या वहां का सुरक्षा विभाग समय‑समय पर कहता आया है कि वे लोकतंत्र, मानवाधिकार, चुनाव एवं पारदर्शिता के महत्व पर जोर देते हैं। बांग्लादेश में राजनीतिक स्थिरता और क्षेत्रीय सुरक्षा उनकी प्राथमिकताएं हैं। लेकिन क्या बात इतनी भर है? विशेषज्ञों में यह सवाल उठना स्वाभाविक है।

मीडिया में अंदेशे जताए जा रहे हैं कि अगर बांग्लादेश में अमेरिकी मौजूदगी बढ़ी तो यह चीन और भारत के बीच ताकत के संघर्ष की नजर से एक रणनीतिक कदम हो सकता है।

हालांकि सार्वजनिक सूचनाओं के आधार पर तो फिलहाल यही कहा जा सकता है कि अमेरिका बांग्लादेश में अभी कोई घोषित स्थायी सैन्य आधार नहीं बना रहा है। कोई आधिकारिक समझौता, संधि या सार्वजनिक घोषणा इस तरह की योजना के समर्थन में नहीं देखने में आई है। लेकिन जो दिखता नहीं, रणनीतिक क्षेत्र में उसके होने की प्रबल संभावना होती है। लेकिन इसमें संदेह नहीं है कि बांग्लादेश की सरकार, मीडिया और राजनीतिक दलों की इस मुद्दे में गहरी दिलचस्पी है। लेकिन जनता एवं विपक्षी दलों में संदेह है तो वह स्वाभाविक ही है।

Topics: बंगाल की खाड़ीBay of Bengaldhakastrategic partnershipअमेरिकाChittagongAmericaarmy baseBangladeshUS Armyबांग्लादेशशेख हसीनाSheikh Hasina
Alok Goswami
Alok Goswami
A Delhi based journalist with over 25 years of experience, have traveled length & breadth  of the country and been on foreign assignments too. Areas of interest include Foreign Relations, Defense, Socio-Economic issues, Diaspora, Indian Social scenarios, besides reading and watching documentaries on travel, history, geopolitics, wildlife etc. [Read more]
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