Rajasthan News: राजस्थान के अनूपगढ़ इलाके में मतांतरण से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां एक ऐसा गिरोह सक्रिय है, जो हिंदू लोगों को ईसाई मत अपनाने के लिए मजबूर कर रहा है। यह गिरोह चेन्नई से चल रहे एक संगठन फ्रेंड्स मिशनरी प्रेयर बैंड से जुड़ा है। इस संगठन के जरिए अब तक सैकड़ों लोगों का मतांतरण करवाया जा चुका है।
मामला कैसे सामने आया- इस मामले का खुलासा तब हुआ जब अनूपगढ़ के गांव 24 एपीडी के 23 वर्षीय युवक संदीप ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। संदीप ने बताया कि आर्यन नाम का एक युवक, जो रेलवे स्टेशन के पास बाइक स्पेयर पार्ट्स की दुकान चलाता है और उसके पिता विनोद कुमार ने उससे शादी की बात की और बाद में उसे पौलुस बारजो नाम के व्यक्ति से मिलवाया। पौलुस ने संदीप से कहा कि अगर वह ईसाई मत अपना लेता है, तो उसके जीवन में खुशियां आएंगी और उसकी शादी हो जाएगी। बाद में इन लोगों ने संदीप को प्रेम नगर की नहर पर ले जाकर ईसाई मत की विधि से मतांतरण करवा दिया। मतांतरण के बाद, इन लोगों ने संदीप पर दबाव बनाया कि वह और लोगों को भी ईसाई मत अपनाने के लिए राजी करे। जब संदीप ने ऐसा करने से मना किया, तो उसे प्रताड़ित किया जाने लगा। आखिरकार संदीप ने हिम्मत दिखाकर पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई।
पौलुस बारजो कौन है- पौलुस बारजो इस पूरे गिरोह का मुख्य संचालक है। वह झारखंड के एक गांव का रहने वाला है और पहले हिंदू था। उसने 1995 में ईसाई मत अपनाया और फिर चेन्नई स्थित एफएमपीबी संगठन से जुड़ गया। संगठन ने उसे ट्रेनिंग के लिए झांसी भेजा और फिर राजस्थान के सीकर और अनूपगढ़ सहित कई जिलों में भेजा, जहां उसने लोगों का मतांतरण करवाया। पौलुस ने पुलिस को बताया कि वह अब तक 454 हिंदुओं का मतांतरण करवा चुका है। संगठन की तरफ से हर साल उसे 20 लोगों का धर्म बदलवाने का टारगेट दिया जाता है। पौलुस और उसकी टीम पहले उन लोगों को चिन्हित करती थी जो गरीब, बीमार या किसी परेशानी में होते थे। फिर ये लोग उनके घर जाकर उन्हें बहलाते-फुसलाते और ईसाई मत अपनाने के लिए मनाते। खास बात यह है कि पौलुस के पास पहले से मतांतरण कर चुके लोगों की एक टीम है, जिसमें महिलाएं भी शामिल हैं। ये महिलाएं गांव-गांव जाकर ऐसे घरों की पहचान करती थीं, जहां मतांतरण की संभावना हो।
आर्थिक सहायता और संगठन की गतिविधियां- संगठन की ओर से पौलुस को 9000 रुपए महीने की सैलरी, भत्ता, बच्चों की पढ़ाई का खर्च और अन्य सुविधाएं दी जाती थीं। संगठन उसे निर्देश देता था कि कितने लोगों का मतांतरण हुआ, प्रार्थना सभा में कितने लोग शामिल हुए और कितनी रकम इकट्ठी हुई, इसकी पूरी रिपोर्ट रखनी होती थी। संगठन के फंड से गांवों में चर्च बनवाने की योजना भी थी। जैसे कि गांव दो पीजीएम और 36 जीबी में चर्च बनवाने की तैयारी चल रही थी। विनोद कुमार ने चर्च निर्माण के लिए 3.5 लाख रुपए भी दिए थे और जमीन भी खरीद ली गई थी। विश्व हिंदू परिषद के जिला मंत्री कृष्ण राव ने इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यह गिरोह न सिर्फ मतांतरण कर रहा है, बल्कि हिंदू देवी-देवताओं के लिए अपमानजनक शब्दों का भी प्रयोग करता है। संदीप ने हिम्मत दिखाकर यह मामला उजागर किया है और अब पुलिस को इस पूरे नेटवर्क को खत्म करने के लिए सख्ती से काम लेना चाहिए।

















