AI को सदैव मानवता की सेवा में प्रयोग करना होगा : ओम बिड़ला
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AI को सदैव मानवता की सेवा में प्रयोग करना होगा : ओम बिड़ला

भारत की प्राचीन ज्ञान-परंपरा को विश्व तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बन सकता है एआई : लोकसभा अध्यक्ष

Written byउत्तराखंड ब्यूरोउत्तराखंड ब्यूरो
Sep 16, 2025, 05:46 pm IST
in उत्तराखंड

हरिद्वार । लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने आज कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को सदैव मानवता की सेवा करनी चाहिए और इसे मनुष्य पर नियंत्रण का साधन नहीं बनने देना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि एआई को आध्यात्मिक ज्ञान और नैतिक जिम्मेदारी से जोड़ा जाना आवश्यक है, तभी यह समाज के लिए कल्याणकारी शक्ति बन सकता है।

लोकसभा अध्यक्ष ने यह उद्गार हरिद्वार स्थित देव संस्कृति विश्वविद्यालय में “फेथ एंड फ्यूचर : इंटेग्रटिंग एआई विद स्पिरिचुअलिटी” अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर व्यक्त किए। यह सम्मेलन फ्यूचर ऑफ लाइफ इंस्टीट्यूट (अमेरिका) के सहयोग से आयोजित किया गया है।

इस अवसर पर संबोधित करते हुए श्री बिरला ने कहा कि प्रौद्योगिकी का वास्तविक उद्देश्य मानव जीवन को समृद्ध और उन्नत करना है, उसे प्रतिस्थापित करना नहीं। उन्होंने कहा कि यद्यपि एआई अनेक चुनौतियाँ प्रस्तुत करता है, किन्तु इसमें नवाचारपूर्ण समाधानों के बीज भी निहित हैं। भारत की नैतिकता और सत्य की मूलभूत शक्ति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इन मूल्यों को विश्व स्तर पर साझा किया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि एआई भारत की प्राचीन ज्ञान और परंपराओं को वैश्विक स्तर पर प्रसारित करने का सशक्त माध्यम बन सकता है।

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि एआई जैसी शक्तिशाली तकनीक को विवेक और धैर्य के साथ संतुलित किया जाना चाहिए ताकि इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ सकें। उन्होंने यह भी कहा कि करुणा, सहानुभूति और मानवीय मूल्यों के आधार पर ही एआई और आध्यात्मिकता का संगम सही दिशा में आगे बढ़ेगा और एक न्यायसंगत एवं समानतामूलक भविष्य की नींव रखेगा। श्री बिरला ने स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और लोककल्याण जैसे क्षेत्रों में एआई की परिवर्तनकारी क्षमता का भी उल्लेख किया और कहा कि इससे करोड़ों लोगों के जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार लाया जा सकता है।

भारत के प्राचीन आदर्श “वसुधैव कुटुम्बकम्” (सम्पूर्ण विश्व एक परिवार है) और “सर्वे भवन्तु सुखिनः” (सभी सुखी हों) का उल्लेख करते हुए श्री बिरला ने कहा कि एआई का विकास समावेशी और समानतामूलक होना चाहिए, ताकि इसके लाभ सम्पूर्ण मानवता तक पहुँच सकें। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह सम्मेलन आध्यात्मिकता और आधुनिक प्रौद्योगिकी के बीच सार्थक वैश्विक संवाद की शुरुआत करेगा और मानवता को अधिक करुणामय एवं नैतिक भविष्य की ओर अग्रसर करेगा।

इस अवसर पर सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा आध्यात्मिकता और विज्ञान के बीच समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से आयोजित एआई सम्मेलन का आयोजन करने के लिए देव संस्कृति विश्वविद्यालय और डॉक्टर चिन्मय पांडे का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्राचीन भारतीय संस्कृति में ज्ञान विज्ञान और अध्यात्म का एक अद्वितीय संगम देखने को मिलता है।  हमारी सनातन संस्कृति केवल आस्था और विश्वास पर आधारित नहीं है, बल्कि एक गहरी वैज्ञानिक दृष्टिकोण चिंतन और शोध का परिणाम है। हमारी सनातन संस्कृति निश्चित रूप से अपना एक वैशिष्ठय लिए हुए है, यही कारण है कि भारतीय संस्कृति ने विश्व को अनगिनत वैज्ञानिक खोजे दी हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के साथ साथ एआई भी व्यापक रूप से हमारे जीवन के हर पहलुओं को प्रभावित कर रहा है। एआई तकनीक हमारे दैनिक जीवन को न केवल आसान बना रही है बल्कि उद्योग में, चिकित्सा, शिक्षा, कृषि और अनेक क्षेत्रों में नवाचार की प्रगति का भी प्रमुख कारण बन गई है। यदि हम इस शक्ति का सही दिशा में सही प्रकार से उपयोग करें तो हम अनेकों क्षेत्र में सुधार ला सकते हैं। यदि हम ए.आई की शक्ति का सही दिशा और उद्देश्य के साथ उपयोग करें, तो ये अनेक क्षेत्रों में सुधार लाकर लोगों के जीवन को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

संयुक्त राष्ट्र द्वारा आस्था एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए स्थापित विशेष आयोग के एशिया क्षेत्र के कमिश्नर डॉ. चिन्मय पंड्या ने कहा कि वर्तमान में एआई केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं है बल्कि यह शिक्षा, चिकित्सा, उद्योग और सुरक्षा सहित अनेक क्षेत्रों में क्रांतिकारी परिवर्तन ला रहा है। हालांकि इसके साथ ही नैतिकता, गोपनीयता, डेटा सुरक्षा तथा रोजगार पर इसके प्रभाव को लेकर कई चिंताएँ भी सामने आ रही हैं।

स्विटजरलैण्ड के इन्टर पार्लियामेंट्री यूनियन के सक्रेटरी जनरल मार्टिल चुंगोंग ने वीडियों संदेश के माध्मय से एआई की वैश्विक भूमिका को सभी के समक्ष रखा।

इस कार्यक्रम में भारत सरकार के एआई मिशन के सीईओ डॉ अभिषेक सिंह, रॉबर्ट ट्रैगर, विलीयम जोन्स, स्वामी रूपेन्द्र प्रकाश, स्टुअर्ट रसेल, जान टैलिन, नालंदा विवि के कुलपति डॉ सचिन चतुर्वेदी आदि अनेक एआई विशेषज्ञों ने भी अपने विचार साझा किये।

इस अवसर पर विधायक  मदन कौशिक, पूर्व विधायक स्वामी यतीश्वरानंद, जिला पंचायत अध्यक्ष किरण चौधरी, राज्यमंत्री डॉ जयपाल सिंह चौहान, ओम प्रकाश जमदग्नि सुनील सैनी, जिलाध्यक्ष आशुतोष शर्मा, सहित देव संस्कृति के छात्र छात्राएं मौजूद रहे।

Topics: देव संस्कृति विश्वविद्यालयआध्यात्मिकताओम बिरलाAI conference Haridwarओम बिरला आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसAI और spiritualityAI conferenceपुष्कर सिंह धामीआर्टिफिशियल इंटेलिजेंसहरिद्वार
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