नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का कहना है कि हमने राष्ट्रीय महामार्ग के क्वालिटी स्टैंडर्ड्स को निश्चित किया है। हमारे हाईवे की क्वालिटी इंटरनेशनल स्टैंडर्ड के साथ जुड़ती है। उन्होंने कहा कि अभी रोड के बाजू में पानी बहने के लिए जो नालियां होती हैं, उनमें पानी अटक जाता है और फिर वो पानी रोड में आने से रोड खराब हो जाती है। हमने इसमें सुधार किया है और प्री कास्ट ड्रेन को मैंडेटरी किया है।
उन्होंने कहा कि एक नई टेक्नोलॉजी का प्रेजेंटेशन हुआ है। जिसमें वेस्ट प्लास्टिक से रोड के बीच में ऐसी एक एक लेयर तैयार होती है, जिसे डालने के बाद रोड की लाइफ चार से पांच साल बढ़ा सकते हैं। इसमें वेस्ट प्लास्टिक का उपयोग होगा और रोड की लाइफ भी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि एक दिन रोड ही फैक्ट्री में बने। मैं लगातार इसकी कोशिश कर रहा हूं।
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देश को कचरा मुक्त करके, उस कचरे से बना देंगे रोड
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि हमने शहरों में बसी 80 लाख टन लीगसी सॉलिड वेस्ट को सेग्रगेट करके दिल्ली मुंबई हाईवे और अहमदाबाद बोलेरो हाईवे जैसे अनेक जगहों पर इस्तेमाल किया है। उन्होंने कहा कि हमने योजना तैयार की है कि देश को कचरा मुक्त करेंगे और पूरी रोड ही वेस्ट से बना देंगे। उन्होंने कहा कि हम टॉयलेट का पानी बेचकर 300 करोड़ रुपये कमाते हैं। उन्होंने कहा कि अभी हमने 5 करोड़ से ज्यादा पेड़ लगाए हैं। 20 लाख से ज्यादा पेड़ ट्रांसप्लांट किए हैं। महाराष्ट्र में मराठवाड़ा में एकनाथ महाराज की पैठन में 100 साल पुराने बड़ के पेड़ का ट्रांसप्लांट किया है। यह पेड़ रोड के बीच में आ रहा था।

कॉस्ट ऑफ कंस्ट्रक्शन कम और क्वालिटी ऑफ कंस्ट्रक्शन इंप्रूव करना है
उन्होंने कहा कि हमने बांस की मदद से स्टील से भी मजबूत क्रैश बैरियर तैयार किए हैं। नॉर्थ ईस्ट में वहीं का बांस लेकर यह काम कर रहे हैं। यह पर्यावरण के लिए भी अच्छा है और रोड के लिए भी। नितिन गडकरी ने कहा कि वेस्ट मटेरियल को यूज करने में प्रायोरिटी देना है। उन्होंने कहा कि रोड इतनी मजबूत बने कि किसी भी प्रकार की परिस्थिति आए, उसके ऊपर किसी प्रकार के गड्ढे न पड़े। यह चैलेंज है। इसमें स्वाभाविक रूप से इसमें नई-नई टेक्नोलॉजी का भी उपयोग करना है। नितिन गडकरी ने कहा कि क्वालिटी में कॉस्ट ऑफ कंस्ट्रक्शन को कम करना और क्वालिटी ऑफ कंस्ट्रक्शन को इंप्रूव करना है। ‘पाञ्चजन्य आधार इंफ्रा कॉन्फ्लुएंस 2025’ कार्यक्रम में पांचजन्य के संपादक हितेश शंकर ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से पूछा था- आज आपका मंत्रालय प्रतिदिन 30 किलोमीटर या 30 किलोमीटर से ज्यादा राजमार्गों का निर्माण कर रहा है। तो जब गति इतनी ज्यादा है तो इसके साथ गुणवत्ता का ध्यान कैसे रखेंगे? क्योंकि एक कहावत सड़क पर लिखी हुई मिलती है कि सावधानी हटी तो दुर्घटना घटी। यह गति के साथ गुणवत्ता का संतुलन कैसे साधेंगे?
















