कतर की राजधानी दोहा में गत दिनों हमास के कुछ अगुआओं के मौजूद होने की पुष्टि करने के बाद इस्राएल ने वहां बमबारी करके उनके ठिकानों को ढेर कर दिया। इस हमले के बाद दुनिया के सारे मुस्लिम देश भड़क गए और एक आपात शिखर बैठक रख ली गई। दोहा में हुई इस बैठक में जुटे सभी मुस्लिम देशों ने इस प्रस्ताव पर हामी भरी नाटो की तर्ज पर एक इस्लामिक गठजोड़ जैसा बनना चाहिए। साथ ही सब देशों के सहयोग से एक संयुक्त सेना बनाने की भी बात चली, ऐसी सेना जो किसी भी मुस्लिम देश पर हमले की स्थिति में फौरन हरकत में आ सके। सभी ने मिलकर इस्राएल की दोहा पर हमले की निंदा की। लेकिन दोहा बैठक में यह बात होने के चंद घंटों के भीतर ही इस्राएल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेत्यनाहू ने कह दिया कि हमास पर हमले आगे भी जारी रहने वाले हैं।
गत दिनों इस्राएल ने कतर की राजधानी दोहा में हमास नेताओं को निशाना बनाकर जबरदस्त मिसाइलें दागीं। इस हमले में हमास के कई वरिष्ठ सरगना मारे गए, जबकि खलील अल-हैय्या के नेतृत्व वाला वार्ता करने वाला प्रतिनिधिमंडल बाल-बाल बचा। कतर ने इस हमले को ‘कायरतापूर्ण’ करार देते हुए इस्राएल पर अंतरराष्ट्रीय नियमों की अवहेलना करने का आरोप लगाया।
जैसा पहले बताया, इस घटना के बाद कतर में कल हुई आपातकालीन अरब-इस्लामी शिखर बैठक बुलाई गई, जिसमें खाड़ी सहयोग परिषद के सदस्य देशों सहित कई मुस्लिम राष्ट्रों ने भाग लिया। सबसे महत्वपूर्ण चर्चा एक संयुक्त इस्लामिक रक्षा तंत्र अर्थात ‘इस्लामी नाटो’—गठित करने को लेकर हुई। कतर, सऊदी अरब, यूएई, बहरीन, ओमान और कुवैत जैसे देशों ने इस विचार का समर्थन किया कि किसी एक सदस्य देश पर हमला होने की सूरत में उसे सभी पर हमला माना जाए।
यह प्रस्ताव नाटो के अनुच्छेद 5 से मेल खाता है, जिसमें सामूहिक रक्षा की अवधारणा शामिल है। बैठक में तय पाया गया कि मुस्लिम देशों के जुट की सेनाओं के बीच एकीकृत सैन्य कमान की बैठक जल्दी ही दोहा में आयोजित की जाएगी। मोटे तौर पर इस पहल का उद्देश्य है, इस्राएल की आक्रामकता को सामूहिक रूप से जवाब देना, क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करना, मुस्लिम देशों के बीच सैन्य सहयोग को बढ़ाना
उधर इस्राएल ने आक्रामक रुख अपनाया हुआ है। नेतन्याहू ने हमास पर हमले आगे भी जारी रखने की चेतावनी दे डाली है। उन्होंने दोहा पर मिसाइल हमले की जिम्मेदारी लेते हुए साफ किया कि वह हमास के नेताओं को जहां देखेगा वहीं निशाना बनाएगा। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा, ‘जो देश आतंकियों को शरण देते हैं, उन्हें या तो बाहर निकालना चाहिए या न्याय के कटघरे में लाना चाहिए।’
नेतन्याहू का यह बयान ऐसे समय में आया है जब कतर और मिस्र गाजा में संघर्षविराम के लिए मध्यस्थता कर रहे हैं। नेतन्याहू के इस कदम ने बंधकों की रिहाई की संभावनाओं को भी कमजोर कर दिया है। इस्लामिक गठजोड़ की चर्चा और इस्राएल की आक्रामकता के बीच तनाव बढ़ता दिख रहा है। यदि मुस्लिम गुट के देशों द्वारा संयुक्त सेना की स्थापना हुई तो यह न केवल इस्राएल के लिए एक चुनौती होगी बल्कि अमेरिका और यूरोप के लिए भी एक नई मुसीबत की वजह बन सकती है।
संतोष की बात है कि यह सैन्य गठजोड़ अभी सैद्धांतिक रूप से सामने लाया गया है। लेकिन इसे सच करके दिखाने के लिए राजनीतिक सहमति, सैन्य समन्वय और आर्थिक संसाधनों की आवश्यकता होगी। कतर की इस इस्लामी देशों की बैठक ने यह साफ कर दिया है कि मुस्लिम देशों में इस्राएल की नीतियों को लेकर असंतोष बढ़ रहा है। संयुक्त इस्लामिक सेना की चर्चा इस असंतोष को संगठित प्रतिक्रिया में बदलने की कोशिश है।

















