पाञ्चजन्य ‘आधार इंफ्रा कॉन्फ्लुएंस 2025’ : भारत की विकास दृष्टि और बदलता इंफ्रास्ट्रक्चर
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पाञ्चजन्य ‘आधार इंफ्रा कॉन्फ्लुएंस 2025’ : भारत की विकास दृष्टि और बदलता इंफ्रास्ट्रक्चर

दिल्ली के द अशोक होटल में आयोजित आधार इंफ्रा कॉन्फ्लुएंस 2025 में राघव चन्द्रा, हेमंत जैन, रंजन ढींगरा व अवनीश सिंह ने भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर अपने विचार रखे।

Written byShivam DixitShivam Dixit
Sep 15, 2025, 05:03 pm IST
in भारत, पाञ्चजन्य इवेंट

दिल्ली के द अशोक होटल में आयोजित पाञ्चजन्य के ‘आधार इंफ्रा कॉन्फ्लुएंस 2025’ में Hemant Jain जी (President, PHD Chamber), Avneesh Singh जी (Member Legislative Council), पूर्व आईएएस राघव चन्द्रा जी और Ranjan Kumar Dhingra जी ने भाग लिया।

पूर्व आईएएस राघव चन्द्रा का वक्तव्य

इस दौरान पूर्व आईएएस अधिकारी राघव चन्द्रा जी ने कहा— “पिछले 10 वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में अद्भुत कार्य हुआ है, जिसे सचमुच Transformative Work कहा जा सकता है। यह विकास हर क्षेत्र में हुआ है। इंफ्रास्ट्रक्चर हमारे देश के लिए इसलिए आवश्यक है, क्योंकि यह न केवल आर्थिक स्थिति को मजबूत करता है, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी एक ‘सोशल लेवलर’ का काम करता है।

इंफ्रास्ट्रक्चर एक सामाजिक सेतु

उन्होंने कहा- किसी क्लब में कुछ ही लोग शामिल हो सकते हैं, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर ऐसा माध्यम है, जिसका लाभ हर नागरिक को समान रूप से मिलता है—कोई भी सड़क पर चल सकता है, कोई भी पुल पर जा सकता है, कोई भी आज एयरपोर्ट का उपयोग कर सकता है। यह देश की बड़ी तरक्की का संकेत है।

राष्ट्रीय राजमार्गों का विस्तार

राघव जी ने कहा- मैं कुछ उदाहरण देना चाहूँगा। पहले हमारे अधिकांश राष्ट्रीय राजमार्ग (National Highways) दो लेन के हुआ करते थे। आज अधिकांश हाईवे चार लेन के हो गए हैं। पहले लगभग 33% हाईवे दो लेन के थे, जो अब घटकर 5–6% रह गए हैं। आज देश में राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लंबाई लगभग 2 से 3 लाख किलोमीटर तक पहुँच चुकी है।

लॉजिस्टिक्स कॉस्ट में भारी कमी

इससे लॉजिस्टिक्स कॉस्ट में भारी कमी आई है। पहले किसी इंडस्ट्रियल ट्रक या कंटेनर को माल ढुलाई में जितना खर्च आता था, अब वह लगभग 25–30% तक घट गया है। इसका सीधा लाभ उद्योग क्षेत्र, सामाजिक क्षेत्र और पूरी अर्थव्यवस्था को हुआ है।

कृषि क्षेत्र में आत्मविश्वास की वृद्धि

उन्होंने कहा- साधारण नागरिक का आत्मविश्वास भी बहुत बढ़ा है। कृषि क्षेत्र को देखें—पहले अक्सर कहा जाता था कि किसान उत्पादन तो कर लेता है, लेकिन उसकी उपज समय पर बाज़ार तक नहीं पहुँच पाती। अब वह यह कल्पना कर सकता है कि उसका उत्पाद तेजी से दूसरे बाज़ारों तक पहुँचेगा। इसके लिए लॉजिस्टिक्स हब तैयार हो रहे हैं, नए राष्ट्रीय राजमार्ग और एक्सप्रेसवे बन रहे हैं।

जहाँ पहले हमारे पास एयरपोर्ट्स की संख्या भी दोगुनी से अधिक हो चुकी है।

ऊर्जा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव

राघव जी ने कहा- ऊर्जा के क्षेत्र में भी भारी बदलाव आया है। एक समय था जब लोग नए शहरों में जाते समय डीज़ल जनरेटर खरीदने पर मजबूर थे। आज शहर ही नहीं, गाँवों में भी 24 घंटे बिजली उपलब्ध है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर

चारों तरफ इंफ्रास्ट्रक्चर की जो प्रगति हुई है, वह सचमुच अद्भुत और अनुपम है। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जब आप Economist जैसी पत्रिकाओं या अन्य लेखों को पढ़ते हैं, तो वहाँ भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को ‘माउथ-वॉटरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट’ कहा जाता है—यानी ऐसा विकास जिसे देखकर लोग दंग रह जाते हैं।

पीएचडी चैंबर अध्यक्ष हेमंत जैन का संबोधन

पीएचडी चैंबर के अध्यक्ष हेमंत जैन जी ने कहा— मेरा मानना है कि जब भी कोई अच्छा काम होता है, उसकी खुशबू दूर तक फैलती है, और आज हम वही देख रहे हैं।

भारत का सड़क नेटवर्क विश्व में दूसरे स्थान पर

आज हम दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क रखने वाला देश हैं। हमारे से आगे केवल अमेरिका है, लेकिन यह अंतर ज्यादा दिनों तक नहीं रहेगा। जिस गति से हम सड़क निर्माण कर रहे हैं, बहुत जल्द हम अमेरिका को पीछे छोड़ देंगे।

सड़क निर्माण की रफ्तार चार गुना बढ़ी

आपने पूछा कि 10 सालों में क्या बदलाव आया है—तो पहले देश में सड़कें केवल 7–8 किलोमीटर प्रतिदिन की रफ्तार से बनती थीं। आज यह दर चार गुना बढ़ चुकी है। पहले हमारे पास लगभग 90,000 किलोमीटर सड़कें थीं, आज हम लगभग डेढ़ लाख किलोमीटर तक पहुँच चुके हैं।

इंफ्रास्ट्रक्चर का बदलता परिदृश्य

यदि आज के दिन हम इंफ्रास्ट्रक्चर को देखें—चाहे सड़कें हों, पोर्ट्स हों या एयरपोर्ट्स—तो तस्वीर बिल्कुल अलग है। छोटे-छोटे कस्बे अब एयरपोर्ट्स से जुड़ चुके हैं। जिस काम को पहले 50 साल में किया गया, वही अब केवल 10–12 साल में हो रहा है। जितने एयरपोर्ट हमने 50 वर्षों में बनाए थे, उतने ही एयरपोर्ट पिछले 10 सालों में बन चुके हैं।

भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती

मेरे अनुसार इंडस्ट्री अब महसूस कर रही है कि भारत ग्लोबली बहुत कॉम्पिटिटिव हो रहा है। हमारे लोग बेहद सक्षम हैं, टेक्नोलॉजी के मामले में हम बहुत आगे हैं। लेकिन लॉजिस्टिक्स के मामले में हम पहले काफी पीछे थे।

लॉजिस्टिक्स में हुए बड़े सुधार

यूरोप या अमेरिका का उदाहरण लें—वहाँ ट्रेनें सीधे फैक्ट्री तक माल लेने पहुँच जाती हैं। भारत में पहले यह अंतराल बहुत बड़ा था। लेकिन पिछले 10 वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े स्तर पर निवेश हुआ है और इससे भारी बदलाव आया है।

नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर

हालाँकि, अभी भी इंफ्रास्ट्रक्चर में और निवेश की आवश्यकता है। आज भारत में न केवल नीतियाँ बनती हैं, बल्कि उनका प्रभावी क्रियान्वयन भी होता है। यही भारत की सबसे बड़ी ताकत है।”

उद्योगपति रंजन ढींगरा का संबोधन

उद्योगपति रंजन ढींगरा ने कहा – प्रधानमंत्री मोदी जी ने 2014 से अब तक बहुत स्पष्ट रूप से कहा है कि वे किस मंत्र पर चल रहे हैं। वह मंत्र है – “Reform, Perform और Transform”। यदि हम इन तीनों का समन्वय कर लें तो हमें आसानी से समझ आ जाएगा कि आज ‘गति शक्ति’ के माध्यम से हमारा भारत किस दिशा में आगे बढ़ रहा है।

कचरा प्रबंधन और सड़क निर्माण में तकनीक

पहले आपने देखा होगा कि कचरे के बड़े-बड़े पहाड़ बन जाया करते थे, लेकिन आज वे धीरे-धीरे गायब हो रहे हैं। अब उस कचरे का उपयोग सड़क निर्माण में किया जा रहा है। रोड कंस्ट्रक्शन की टेक्नोलॉजी लगातार विकसित हो रही है और हम उसका भरपूर उपयोग कर रहे हैं। इससे निर्माण लागत कम होती जा रही है और टेक्नोलॉजी भी साथ-साथ आगे बढ़ रही है।

एआई (AI) का महत्व और उपयोग

अब बात करें एआई (AI) की, तो हमें सोचना पड़ेगा कि यह अभिशाप है या आशीर्वाद। असल में, यह इस बात पर निर्भर करता है कि हम इसे किस दिशा में ले जाते हैं। यह भी सच है कि आजकल एआई के बिना गुजारा मुश्किल है, क्योंकि यह लगभग हर क्षेत्र में उपयोग में आ रहा है।

टेक्नोलॉजी और सरकार की क्षमता

मेरे विचार से आज बिना टेक्नोलॉजी के कोई काम नहीं चल सकता। आज हमारे पास शक्ति भी है और संकल्प भी। सरकार के पास देश को दिशा और दशा देने की पूरी क्षमता है। मेरा मानना है कि हमें इन सभी संसाधनों का अधिकतम उपयोग करना चाहिए, ताकि देश की प्रगति को कोई भी रोक न सके।

अवनीश सिंह का सनातन संस्कृति पर वक्तव्य

यूपी विधान परिषद के सदस्य अवनीश सिंह ने कहा – हम सनातन संस्कृति में रचे-बसे लोग हैं। हमारी परंपरा रही है कि अगर कोई भूखा हमारे दरवाजे पर आ जाए तो हम अपनी थाली का अन्न भी उसके साथ बांट देते हैं, चाहे खुद हमें भूखे पेट सोना पड़े। भारत के गांव आज भी इसी जज़्बे के साथ जीते हैं—आपसी सहयोग और साझा ज़िम्मेदारी पर। गांवों में हमेशा यह परंपरा रही है कि “मेरी ज़रूरत के समय आप मेरा साथ दें और आपकी ज़रूरत पर मैं आपका साथ दूं।” यही हमारी असली ताकत है।

जीएसटी सुधारों का ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर

जीएसटी सुधारों का असर अब गांवों तक गहराई से पहुंच रहा है। जिन उत्पादों पर जीएसटी कम की गई है, उसकी वजह से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई गति और ऊर्जा आ रही है। यह बढ़ती गति सीधे-सीधे भारत की जीडीपी को भी मजबूत कर रही है।

हाईवे और सड़क निर्माण से ग्रामीण विकास

सुबह की चर्चा का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जब कोई हाईवे या नई सड़क बनती है, तो शुरुआत में ज़मीन अधिग्रहण के बाद किसानों को बहुत लाभ नहीं दिखता। लेकिन जैसे ही सड़क पूरी होती है, उस जमीन की कीमत अचानक 10 से 15 गुना तक बढ़ जाती है। यही नहीं, किसान या ग्रामीण सड़क के किनारे अपना व्यवसाय शुरू कर सकते हैं, जिससे उनकी रोज़ी-रोटी के नए साधन बनते हैं। पहले जिन्हें अपनी उपज को बाजार तक ले जाने में कठिनाई होती थी, अब वे सड़क किनारे ही अपनी सब्जियां और अनाज बेच पाते हैं।

बुंदेलखंड में नल जल योजना का लाभ

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि बुंदेलखंड, जहां कभी लोग आधा दिन सिर्फ पानी लाने में गुजार देते थे, आज वहां हर घर तक नल जल योजना के जरिए पानी पहुंच रहा है। अब उनका समय और उनकी ऊर्जा दूसरे उत्पादक कामों में लग रही है।

आधारभूत ढांचे के बदलने से नई संभावनाएं

अवनीश सिंह ने ज़ोर देकर कहा कि यह वही विकास का असली चेहरा है—जहां आधारभूत ढांचे के बदलने से आम आदमी की जिंदगी में सीधा सुधार आता है और गांव से लेकर शहर तक नई संभावनाएं जन्म लेती हैं।

Topics: अवनीश सिंहभारत का इंफ्रास्ट्रक्चरनल जल योजनाराष्ट्रीय राजमार्गग्रामीण विकासलॉजिस्टिक्स सुधारजीएसटी सुधारमोदी सरकार विकास कार्यएआई तकनीकआधार इंफ्रा कॉन्फ्लुएंस 2025राघव चन्द्राहेमंत जैनरंजन ढींगरा
Shivam Dixit
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अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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