भारत के राष्ट्रीय ध्वज का अपमान एवं पाकिस्तान का महिमामंडन करने वाले वासिक की जमानत अर्जी इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने ख़ारिज कर दी. वासिक के खिलाफ मुजफ्फरनगर के थाना चरथावल में एफआईआर दर्ज की गई थी.
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा कि “अभियुक्त की ओर से विवादित पोस्ट करने के बारे में संतोषजनक उत्तर प्राप्त नहीं हुआ. भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करते हुए यह “गंभीर चिंता का विषय” है. इसलिए रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री को देखते हुए यह भी कहा जाता है कि याचिकाकर्ता की भारत के प्रति भावनाएं देशभक्तिपूर्ण नहीं हैं.
प्रथम दृष्टया, ऐसा प्रतीत होता है कि उसने जानबूझकर भारत की गरिमा को कम करने के लिए पोस्ट की थी.
वासिक त्यागी के पोस्ट “राष्ट्र-विरोधी विचारधारा के महिमामंडन की ओर झुकाव दर्शाते हैं” और “सार्वजनिक शांति एवं व्यवस्था को भंग करने में सक्षम” हैं।
इस प्रकार, न्यायालय ने निष्कर्ष निकाला कि आरोपों की गंभीरता, अपराध की प्रकृति और सामाजिक सद्भाव पर इसके संभावित प्रभाव को देखते हुए याचिकाकर्ता को ज़मानत पर रिहा करने का कोई आधार नहीं है.”
एफआईआर और आरोपों का विवरण
गत 16 मई को एक तहरीर में दी गई थी. तहरीर में कहा गया था कि अभियुक्त वासिक त्यागी ने अपने फेसबुक अकाउंट पर पाकिस्तान का महिमामंडन किया. यही नहीं उसने भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का अपमान भी किया. वासिक ने अपनी पोस्ट में पाकिस्तान के पायलट कामरान भट्टी की तारीफ की थी. और पाकिस्तान के समर्थन में बातें लिखी थीं, इसके साथ ही वासिक ने भारतीय राष्ट्रीय ध्वज की फोटो को फोटोशॉप से अपमानजनक बनाया था और फिर फेसबुक पर पोस्ट किया था. पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने के बाद जांच शुरू की.
साइबर जांच और गिरफ्तारी
पुलिस ने वासिक के मोबाइल नंबर पर रजिस्टर्ड फेसबुक अकाउंट से पोस्ट के बारे में छानबीन की. मेटा से भी सम्पर्क किया गया. साइबर रिपोर्ट में यह प्रमाणित हुआ कि पोस्ट से जुड़े आईपी एड्रेस का वासिक के फोन नंबर पर इस्तेमाल किया गया था. गत 7 जून को वासिक को गिरफ्तार कर लिया गया. उसके बाद उसके फोन को जब्त करके उसकी फोरेंसिक जांच भी कराई गई.

















