नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगी चार्ली किर्क की हत्या कर दी गई है। वह दक्षिणपंथी कार्यकर्ता और टिप्पणीकार थे। उनकी हत्या यूटा के ओरेम स्थित यूटा वैली यूनिवर्सिटी (Utah Valley University) में एक कार्यक्रम के दौरान की गई। उनके गर्दन में गोली मारी गई थी। सोशल मीडिया पर इस घटना के कई वीडियो भी वायरल हो रहे हैं। जिनमें चार्ली किर्क को गोली मारने के दृश्य सामने आए हैं।
सफेद तंबू…माइक्रोफोन और तभी गर्दन में लगी गोली
हत्या के मोबाइल वीडियो क्लिप में किर्क यूनिवर्सिटी में मौजूद एक बड़ी भीड़ को संबोधित करते हुए दिखाई दे रहे हैं। उसी वक्त अचानक से उनको गोली मार दी जाती है। वह 31 साल के थे। वह जिस सफेद तंबू के नीचे बैठे थे, उसमें “द अमेरिकन कमबैक” और “प्रूव मी रॉन्ग” नारे लिखे हुए थे। वह एक हैंडहेल्ड माइक्रोफोन में बोल रहे थे, तभी उनकी गर्दन पर गोली लगती है।

गोली लगने से पहले बंदूक नियंत्रण की ही बात कर रहे थे किर्क
गोली लगने के बाद उन्होंने अपना दाहिना हाथ ऊपर उठाया था। प्रत्यक्षदर्शी रेडॉन डेचेन ने सीबीएस न्यूज को बताया कि गोली लगने से पहले किर्क बंदूक नियंत्रण के बारे में बात कर रहे थे। तभी उन्होंने अचनाक गर्दन पकड़ी और हर जगह खून ही खून था।
3 हजार लोग थे कार्यक्रम में शामिल, हत्यारे का अभी तक पता नहीं
प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि कार्यक्रम में कोई बड़े सुरक्षा उपाय या मेटल डिटेक्टर नहीं थे। बताया जा रहा है कि इस कार्यक्रम में करीब 3,000 लोग शामिल थे। गर्दन में गोली लगने के तुरंत बाद किर्क को अस्पताल ले जाया गया, इसके कई घंटे बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने उनके मौत की पुष्टि की। अभी तक किर्क के हत्यारे की गिरफ्तारी नहीं हुई है। कहा जा रहा है कि हमलावर ने आसपास के किसी छत की इमारत से गोलीबारी की है। हालांकि, गोली लगने के बाद दो लोगों को हिरासत में लिया गया था लेकिन पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया।
क्या किर्क के मर्डर के पीछे है वामपंथियों का घृणा अभियान?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि इस राजनीतिक हत्या में शामिल हर शख्स को खोज निकाला जाएगा। वहीं, हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बन ने सोशल मीडिया साइट X पर लिखा है कि चार्ली किर्क की मौत प्रगतिशील-उदारवादी वामपंथियों द्वारा चलाए जा रहे अंतरराष्ट्रीय घृणा अभियान का परिणाम है। किर्क कई वर्षों से कहते आ रहे थे कि गैर-वामपंथी विचारों वाले लोगों के लिए यूटा वैली यूनिवर्सिटीपरिसर असुरक्षित हैं। किर्क ने अपने बेबाक बयानों के लिए जाने जाते थे। 2018 में पार्कलैंड स्कूल गोलीबारी के बाद उन्होंने तर्क दिया कि बंदूक रखने पर प्रतिबंध लगाने के बजाय, स्कूलों में सुरक्षा गार्ड और मेटल डिटेक्टर लगाकर उन्हें सख्त किया जाना चाहिए। चार्ली किर्क ने साल 2024 में हुए राष्ट्रपति चुनाव के दौरान युवाओं को एकजुट करने में बड़ी भूमिका निभाई थी। कॉलेज छात्रों के साथ उनकी कई डिबेट्स सोशल मीडिया पर वायरल होती रही हैं। वह इजरायल का भी खुलकर समर्थन करते थे।

















