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संघर्ष विराम भारत की शर्तों पर

पाकिस्तान ने टकराव को आगे नहीं बढ़ाने और संघर्षविराम का उल्लंघन न करने की बात कही है। भारत-पाकिस्तान के डीजीएमओ के बीच हॉटलाइन पर बातचीत के बाद दोनों पक्षों में सीमावर्ती इलाकों और अग्रिम मोर्चों पर सैनिकों की संख्या घटाने और हमला न करने पर सहमति बनी

Written byPanchjanyaPanchjanya
May 17, 2025, 11:22 am IST
in भारत, रक्षा, विश्लेषण, जम्‍मू एवं कश्‍मीर
प्रेस कांफ्रेंस के दौरान (बाएं से) एयर मार्शल एके भारती, डीजीएमओ ले.जनरल राजीव घई और वाइस एडमिरल एएन प्रमोद

प्रेस कांफ्रेंस के दौरान (बाएं से) एयर मार्शल एके भारती, डीजीएमओ ले.जनरल राजीव घई और वाइस एडमिरल एएन प्रमोद

भारत ने एक बार नहीं, अनेक बार स्पष्ट कहा है कि कश्मीर पर भारत की नीति में कोई बदलाव नहीं आया है। इसमें किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं हो सकती। भारत के इस बयान को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान की प्रतिक्रिया माना जा रहा है। इसके अलावा, भारत ने संघर्ष विराम के लिए ट्रंप द्वारा व्यापार को हथियार बनाए जाने के दावे को भी खारिज किया है।
विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘हमारा लंबे अरसे से राष्ट्रीय पक्ष यही रहा है कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर से संबंधित किसी भी मुद्दे को भारत और पाकिस्तान को द्विपक्षीय तरीके से ही हल करना है। पीओके पर भारत का रुख स्पष्ट है। लंबित मामला केवल पाकिस्तान की ओर से अवैध रूप से कब्जा किए गए भारतीय क्षेत्र को खाली करने का है।’’ साथ ही, यह भी स्पष्ट किया कि डीजीएमओ स्तर की वार्ता पाकिस्तान की पहल पर हुई है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार, 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू होने से लेकर 10 मई को सैन्य कार्रवाई और फायरिंग रोकने पर बनी सहमति के बीच भारत और अमेरिका के नेताओं के बीच सैन्य हालात को लेकर बातचीत हुई थी। लेकिन इन चर्चाओं में व्यापार का कोई मुद्दा नहीं उठा। आतंकियों के पाकिस्तान कनेक्शन के सबूत हैं। पाकिस्तान की गोली का जवाब गोली से देंगे। सिंधु जल संधि पर उन्होंने कहा कि पाकिस्तान जब तक आतंक के साथ रहेगा तब तक संधि स्थगित रहेगी। पाकिस्तान ने दशकों से सीमा पर आतंकवाद को बढ़ावा देकर इन सिद्धांतों को ताक पर रख दिया है। पाकिस्तान की ओर से किए जा रहे दावों पर जायसवाल ने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान ने बहावलपुर, मुरीदके, मुजफ्फराबाद और अन्य स्थानों पर अपने आतंकवादी केंद्रों को नष्ट होते देखा है। हमारी सेनाओं ने उसकी सैन्य क्षमताओं को काफी हद तक कम कर दिया और प्रमुख हवाई ठिकानों को प्रभावी रूप से निष्क्रिय कर दिया। फिर भी पाकिस्तानी विदेश मंत्री इसे उपलब्धियों के रूप में पेश करना चाहते हैं, तो उनका स्वागत है।

पाकिस्तान ने घुटने टेके

पहलगाम आतंकी हमले के बाद से ही पाकिस्तान डरा हुआ था। भारत के कोप से बचने के लिए उसने मित्र देशों से गुहार लगाना शुरू कर दिया। पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री ईशाक डार ने अमेरिकी राजदूत नताली बेकर से भी गुहार लगाई। पाकिस्तान के दुस्साहस पर जब भारत ने जवाबी कार्रवाई की तो एक बार फिर पाकिस्तान अमेरिका की शरण में गया। विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘भारत का रुख शुरू से ही स्पष्ट और सुसंगत था कि हम पाकिस्तान से संचालित आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाएंगे। यदि पाकिस्तानी सेना इससे बाहर रहती तो कोई समस्या नहीं होती। 9 मई की रात तक पाकिस्तान भारत को बड़े हमले की धमकी दे रहा था। 10 मई की सुबह जब उनका प्रयास विफल हो गया और उन्हें भारत की ओर से विनाशकारी जवाबी कार्रवाई का सामना करना पड़ा तो उनके सुर बदल गए और उनके डीजीएमओ ने आखिरकार हमसे संपर्क किया।’’

पाकिस्तान विदेश मंत्रालय के बयान पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ‘‘हमने पाकिस्तानी पक्ष की ओर से दिया गया बयान देखा है। जिस देश ने औद्योगिक स्तर पर आतंकवाद को बढ़ावा दिया है, उसका यह सोचना कि वह इसके परिणामों से बच सकता है, खुद को मूर्ख बनाना है। पाकिस्तान जितनी जल्दी इसे समझ लेगा, उतना ही बेहतर होगा।’’

ट्रंप बोले- हमने नहीं की मध्यस्थता

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

संघर्ष विराम की घोषणा से कुछ देर पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक्स पर ट्वीट कर भारत-पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता करने का दावा किया था। लेकिन अब वे अपने कहे से पलट गए हैं। उन्होंने सफाई देते हुए कहा, ‘‘हमने भारत-पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता नहीं कराई है। केवल दोनों देशों के बीच तनाव कम कराने में मदद की है।’’ ट्रंप ने कतर के दोहा में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा, ‘‘मैं यह नहीं कहना चाहता कि मैंने मध्यस्थता की, लेकिन मैंने मदद जरूर की।’’ ट्रंप का यह बदला हुआ सुर भारत के रुख की पुष्टि करता है। यह भारत की कूटनीतिक जीत भी है।

पाकिस्तान के डीजीएमओ ने फोन किया

इससे पहले, 10 मई को संघर्ष विराम के बाद 12 मई को भारत के डीजीएमओ लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई और पाकिस्तान के डीजीएमओ मेजर जनरल काशिफ अब्दुल्ला के बीच हॉटलाइन पर बातचीत हुई। इसमें दोनों पक्षों की सीमावर्ती इलाकों और अग्रिम मोर्चों पर सैनिकों को संख्या घटाने और किसी भी तरह का हमला न करने पर सहमति बनी। पाकिस्तान ने टकराव को आगे नहीं बढ़ाने और संघर्ष विराम का उल्लंघन न करने की भी बात कही है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने शाम 6 बजे प्रेस कांफ्रेंस कर बताया कि दोनों देश अब एक-दूसरे पर सैन्य कार्रवाई नहीं करेंगे।

पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री इशाक डार ने भी युद्ध विराम पर सहमति जताई थी। लेकिन 3 घंटे बाद ही पाकिस्तान ने भारत के 4 राज्यों पर हमला किया था, जिसका भारतीय सैन्यबलों ने मुंहतोड़ जवाब दिया। 11 मई को सेना ने प्रेस कांफ्रेस की। इसमें डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन (डीजीएमओ) लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई, वाइस एडमिरल एएन प्रमोद और एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सिलसिलेवार जानकारी दी। डीजीएमओ राजीव घई ने बताया कि पाकिस्तान के डीजीएमओ ने 10 मई को उनके पास फोन आया था, जिसमें उन्होंने संघर्ष विराम की गुजारिश की थी। भारत ने अपनी शर्तों पर पाकिस्तान के साथ संघर्ष विराम किया। उन्होंने बताया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में मारे गए आतंकियों में कंधार विमान अपहरण और पुलवामा हमले में शामिल 3 बड़े आतंकी भी थे। इस कार्रवाई के बाद पाकिस्तान ने ड्रोन और मिसाइल से हमारी सीमा और सैन्य ठिकानों पर हमला करने का प्रयास किया। लेकिन सेना ने उन्हें हवा में ही मार गिराया। इस हमले के बाद भारतीय सेना की जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तानी सेना के 35 से 40 सैनिक और अफसर मारे गए।

नियंत्रण रेखा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए दोनों देशों के बीच 2021 में नए सिरे से संघर्ष विराम समझौता हुआ था, जिस पर भारत-पाकिस्तान के डीजीएमओ ने हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत नियंत्रण रेखा पर शांति बहाली और संबंधित मुद्दों पर दोनों देशों के डीजीएमओ हॉटलाइन पर बात करते हैं। इससे पहले, अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के समय दोनों देशों के बीच 26 नवंबर, 2003 को संघर्ष विराम को लेकर जो समझौता हुआ था, दोनों देश इसका पालन करते थे। इस समझौते के तहत यह तय हुआ था कि पाकिस्तान न तो भारतीय सैन्य चौकियों पर और न ही रिहायशी इलाकों पर गोलीबारी करेगा। भारत ने तो समझौते का पालन किया, लेकिन पाकिस्तान आदतन हर बार इसका उल्लंघन कर सीमावर्ती इलाकों में गोलीबारी करता रहा, जिसमें बड़ी संख्या में नागरिक मारे गए और सैकड़ों घायल हुए।

अनुच्छेद-370 के हटने के बाद पाकिस्तान कितना बौखलाया, इसका अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि जिस महीने केंद्र सरकार ने यह कदम उठाया उसी माह यानी अगस्त में पाकिस्तान ने 1,565 बार संघर्ष विराम का उल्लंघन किया। इस तरह, 2019 में पाकिस्तान ने 3,289 बार संघर्ष विराम का उल्लंघन किया था। इसके बाद 2020 में उसने सर्वाधिक 5,100 बार संघर्ष विराम का उल्लंघन किया, यानी प्रतिदिन औसतन 14 बार। इस बार भी संघर्ष विराम की घोषणा के कुछ घंटे बाद ही इसका उल्लंघन किया।
बहरहाल, पाकिस्तान ने नया बयान जारी करते हुए कहा है कि दोनों देशों के बीच 18 मई तक संघर्ष विराम पर सहमति बनी है।

#ऑपरेशन सिंदूर : हम भांप रहे हैं, वो कांप रहे हैं

 

Topics: Pahalgam Terror Attackपहलगाम आतंकी हमलेऑपरेशन सिंदूरपाकिस्तान ने घुटने टेकेसंघर्ष विराम की घोषणाPakistan surrendersPresident Donald Trumpपाञ्चजन्य विशेषराष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
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