क्यों पनाह देता आ रहा है Qatar Hamas और Taliban जैसे मजहबी उन्मादी संगठनों को? दोहा पर Israel के हमले से उभरे संकेत
June 28, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम विश्व

क्यों पनाह देता आ रहा है Qatar Hamas और Taliban जैसे मजहबी उन्मादी संगठनों को? दोहा पर Israel के हमले से उभरे संकेत

खाड़ी देश कतर की मध्य पूर्व में भूमिका और अमेरिका के दखल के संदर्भ में अनेक मौकों पर ऐसा दिखा है कि कतर खुद को तटस्थ दिखाकर पश्चिम का विश्वास जीतता रहा है

Written byAlok GoswamiAlok Goswami
Sep 10, 2025, 12:17 pm IST
in विश्व, विश्लेषण
कतर में आईडीएफ हमलों में हमास के नेताओं के मारे जाने की खबर ने एक बार फिर से दुनिया का ध्यान इस खाड़ी देश की ओर खींचा

कतर में आईडीएफ हमलों में हमास के नेताओं के मारे जाने की खबर ने एक बार फिर से दुनिया का ध्यान इस खाड़ी देश की ओर खींचा

कतर में आईडीएफ हमलों में हमास के नेताओं के मारे जाने की खबर ने एक बार फिर से दुनिया का ध्यान इस खाड़ी देश की ओर खींचा है। इससे पहले इस्राएल—हमास संघर्षविराम वार्ता के भी अनेक दौर कतर की राजधानी दोहा में ही रखे गए थे। इस्राएली सेना के वहां ह​मास नेताओं को निशाना बनाते हुए हमले बोले गए थे, जिसके बाद अमेरिका की ओर से बयान आया था कि इस्राएल की तरफ से ये हमले उसकी सहमति से नहीं किए गए थे। इसके फौरन बाद कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरमान अल थानी का वक्त्व्य जारी हुआ कि कतर इन हमलों से घबराकर मध्यस्थता की अपनी भूमिका से मुंह नहीं मोड़ेगा। इन परिस्थितियों के बीच, विश्लेषकों के बीच बड़ा सवाल यह उभर कर आ रहा है कि आखिर कतर ने हमास के नेताओं के लिए अपने यहां ठिकाना क्यों उपलब्ध कराया? क्या इसके पीछे अमेरिका है? इससे पहले तालिबान नेता भी कतर में शरण पा चुके हैं।

खाड़ी देश कतर की मध्य पूर्व में इस भूमिका और अमेरिका के दखल को लेकर ऐतिहासिक रूप से भी अनेक मौके आए हैं जब ऐसा दिखा है कि कतर खुद को तटस्थ दिखाकर पश्चिम का विश्वास जीतता रहा है।

कतर वर्षों से ‘मध्यस्थता’ को अपनी विदेश नीति की बनाए रखे है। यह नीति एक मानक जैसी है, जिसके सूत्र उस देश के अनुसार हैं, निष्पक्ष रहना, संवाद और अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए प्रयास करना। उस देश के संविधान के अनुच्छेद 7 में भी इस बात को रेखांकित किया गया है कि कतर विवादों के शांतिपूर्ण समाधान में विश्वास रखता है और इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय शांति सुनिश्चित करना है।

कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरमान अल थानी

दरसल कतर अपनी सिर्फ लगभग 30 लाख की आबादी और ऊर्जा में संपन्न होने के बावजूद, खुद को क्षेत्रीय और वैश्विक मंच पर प्रभावशाली बनाना चाहता है। इसके लिए उसने ‘अपने दरवाजे खुले रखने’ की नीति अपनाई हुई है यानी संघर्ष में उलझे विभिन्न पक्षों, आतंकी कहे जाने वाले संगठनों से लेकर पश्चिमी देशों तक, उसने सभी के साथ संवाद बनाये रखा है। यही वजह है कि कतर को संयुक्त राष्ट्र, अफगानिस्तान, बेनिन, यमन और लेबनान जैसे देशों के विवाद में मध्यस्थ की भूमिका निभाने का अवसर मिलता रहा है।

कतर ने 2013 में अपने यहां तालिबान का राजनीतिक कार्यालय खोलने का स्थान उपलब्ध कराया। बताया गया कि यह कदम अमेरिकी सरकार के अनुरोध पर उठाया गया था, ताकि तालिबान से बातचीत और संवाद के लिए सही माहौल बनाने में मदद मिले। तब अमेरिका और तालिबान के बीच बातचीत संभव हुई थी और अंततः 2020 में मशहूर दोहा समझौता हुआ, जिसने अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी करवाई थी।

अगस्त 2021 में जब तालिबान ने काबुल पर कब्जा किया, तब कतर की भूमिका ऐसी रही कि यह देश एक बड़ा ‘ट्रांज़िट हब’ बन गया। अफगानिस्तान से निकले लगभग 40 फीसदी लोग वाया कतर गए थे। यही वजह थी कि मार्च 2022 में, अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कतर को ‘प्रमुख गैर नाटो सहयोगी’ का दर्जा दिया था, जो सुरक्षा सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत था।

दोहा में इस्राएली हमले के बाद उठता धुंआ

खाड़ी देश कतर 2012 से ही हमास के राजनीतिक ब्यूरो को दोहा में जगह दिए हुई है, जिसमें खालिद मशाल, इस्माइल हानिया जैसे प्रमुख नेता शामिल रहे। इसके पीछे भी कथित तौर पर अमेरिका का अनुरोध ही था, कुछ का मानना है कि अमेरिका हमास से अप्रत्यक्ष संवाद बनाए रखने के लिए ऐसा चाहता था।

रिपोर्ट यह भी है कि कतर ने हमास को कई मौकों पर धन उपलब्ध कराया है। बताते हैं लगभग 1.8 अरब डॉलर दिए जा चुके हैं। हमास नेताओं के राशन, पानी और अन्य जरूरतें पूरी करने के साथ ही अन्य मदों पर खर्चे कतर के पैसे से ही चले थे।

हालांकि, कतर द्वारा मध्यस्थता की भूमिका को लेकर कुछ अमेरिकी और इस्राएली अधिकारी आलोचना करते रहे हैं। अमेरिका के कुछ सांसदों ने भी कतर की इस भूूमिका पर सवाल उठाए थे।

गत 9 सितंबर 2025 को इस्राएली सेना ने दोहा में हमास नेताओं पर हमला बोला। इसमें कयद क्षेत्र में हमास नेतृत्व और कतरी के एक सुरक्षा अधिकारी की मौत हुई है। यह हमला ऐसे वक्त पर हुआ है जब दोनों पक्षों के बीच शांति प्रक्रिया पर काम चल ही रहा है। वैसे, कतर ने इस हमले को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है और अमेरिका से नाराजगी जताई है, कि उसे बहुत बाद में जाकर पता चला था कि ऐसा कोई हमला बोला गया है। उधर अमेरिका ने भी अपनी ओर से इस हमले की निंदा की और इसे कतर के साथ सुरक्षा साझेदारी और शांति प्रयासों के लिए हानिकारक बताया है।

कतर ने स्वयं को छोटे लेकिन प्रभावशाली देश के रूप में स्थापित किया है। यह अक्सर ही विवाद में उलझे पक्षों के साथ संवाद बनाए रखते हुए, पश्चिमी देशों व अन्यों के लिए मध्यस्थता का मंच उपलब्ध कराता आ रहा है। अमेरिका के लिए यह देश लाभदायक रहा है, बात चाहे तालिबान से संवाद की हो, अफगान निकासी की या हमास की हिंसक गतिविधियों को कूटनीतिक तौर पर नियंत्रण में रखना।

कतर की यह भूमिका कूटनीति की दृष्टि से कितनी ही ‘सहायक’ रही हो, लेकिन यह यह आसान नहीं रही है। एक ओर शांति वार्ता के लिए मंच उपलब्ध कराना तो दूसरी ओर हमास जैसे जिहादी सोच के समूहों को समर्थन देना। परसों वहां हुआ इस्राएली हमला साफ करता है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में ‘मध्यस्थ’ दिखना भी परिस्थितियों को किस हद तक पहुंचा देता है। इस ताजा घटना के बाद, अमेरिका‑कतर साझेदारी का भविष्य, उसकी मध्यस्थता की विश्वसनीयता और क्षेत्रीय स्थिरता दांव पर लगे हैं।

Topics: HamasdiplomacyकतरQataridfIsrael attacktalibangeo politicsअमेरिकाAmericaजिहादहमास
Alok Goswami
Alok Goswami
A Delhi based journalist with over 25 years of experience, have traveled length & breadth  of the country and been on foreign assignments too. Areas of interest include Foreign Relations, Defense, Socio-Economic issues, Diaspora, Indian Social scenarios, besides reading and watching documentaries on travel, history, geopolitics, wildlife etc. [Read more]
ShareTweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्का रूबियो (File Photo)

US-Iran समझौता और Marco Rubio का Middle East दौरा, क्या निकलेगी Hormuz की फांस! क्यों चिंता में हैं UAE, Qatar, Bahrin

फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रां के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

G7 में बढ़ता भारत का रुतबा, दुनिया के विकसित देश भी मान रहे भारत का लोहा, समझ रहे भारत का महत्व

जयशंकर (बाएं) ने रूबियो को फोन पर सुनाई खरी खरी (File Photo)

अमेरिकी झूठ पर Jaishankar का तीखा वार, अमेरिकी हमले में 3 भारतीयों के मारे जाने पर Rubio को फोन पर सुनाई खरी खरी

Explainer: युद्ध विराम के बावजूद अमेरिकी सेना ने ईरान के ‘केशम द्वीप’ पर क्यों की भारी बमबारी?

benjamin Netanyahu

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गाजा के 70% हिस्से पर कब्जा करने का दिया आदेश

Donald trump gulf War

अमेरिकी शक्ति, ईरान की चुनौती और ट्रंप की निर्णायक घड़ी: क्या विश्वसनीयता बचा पाएगा वॉशिंगटन या कमजोरी का प्रतीक बनेगा?

Load More

ताज़ा समाचार

आज का राशिफल

28 जून का राशिफल: नौकरी, व्यापार और पारिवारिक जीवन में कैसा रहेगा आपका दिन?

भारत टैक्सी का शुभांरभ करते केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह

अमित शाह ने गुजरात के लिए ‘भारत टैक्सी’ का किया शुभारंभ, कहा-दो साल में 500 शहरों और गांवों तक पहुंचेगी सेवा

National Seminar at Dev Sanskriti Vishwavidyalaya

देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय संगोष्ठी: जे.पी. नड्डा ने अंगदान को बताया मानव सेवा का सर्वोच्च कार्य

Bankim Chandra chattopadhyay Vande Matram

युवाओं के लिए बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की साहित्यिक विरासत, राष्ट्र चेतना का मंत्र

प्रतीकात्मक चित्र

NCB रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा: भारत में 100 गुना बढ़ी ड्रोन से ड्रग तस्करी, पंजाब बना सबसे बड़ा हॉटस्पॉट!

Emergency Andolan Aur Vishwasghat Book Launch Ajay Sethia Ram Bahadur Rai KN Govindacharya

आपातकाल लोकतंत्र नहीं, इंदिरा गांधी की सत्ता बचाने का फैसला था : रामबहादुर राय

Operation sindoor

ऑपरेशन सिंदूर पर कांग्रेस की ओछी राजनीति : रक्षा मंत्री के भाषण को गलत तरीके से किया जा रहा पेश, फैलाया जा रहा झूठ

Operation sindoor

ऑपरेशन सिंदूर: बलिदानी जवानों को लेकर मीडिया-सोशल मीडिया में फैली अफवाह, रक्षा मंत्रालय ने बताई सच्चाई

Haridwar Kumbh 2027 Highways Project NHAI Spur to Haridwar Bypass Road Construction

हरिद्वार कुंभ 2027: NHAI ने बिछाया सड़कों का जाल, दिल्ली-पश्चिमी यूपी से आना होगा बेहद आसान!

प्रतीकात्मक चित्र

मुहर्रम : स्कूल की दीवार तोड़कर ताजिया ले जाने की जिद, पुलिस ने रोका तो कर दिया हमला, 11 आरोपी गिरफ्तार

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies