भारतीय पेशेवरों की अमेरिकी Visa पाने में बढ़ सकती हैं दिक्कतें
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अब भारतीय पेशेवरों और कारोबारियों की Visa पाने में बढ़ सकती हैं दिक्कतें, अमेरिका सख्त करने जा रहा नियम

अमेरिका और चीन के बीच व्यापार और तकनीकी प्रतिस्पर्धा के चलते भारत को एक रणनीतिक भागीदार माना जा रहा है। ऐसे में अमेरिका चाहता है कि भारतीय योग्य पेशेवरों के चयन पर विशेष रूप से ध्यान दिया जाए ताकि उसका तकनीकी के क्षेत्र में उसका दबदबा बनाए रखा जा सके

Written byAlok GoswamiAlok Goswami
Sep 9, 2025, 07:32 pm IST
in विश्व, विश्लेषण
Representational Image

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अमेरिका एक के बाद एक ऐसे कदम उठाता जा रहा है जो दिखाते हैं कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप टैरिफ नीति के रास्ते कुछ देशों पर अपनी थानेदारी से आगे जाने का फैसला कर चुके हैं। हालांकि इसके लिए उनके अपने देश में आलोचना हो रही है और विशेषज्ञ कोई सुहानी तस्वीर नहीं पेश कर रहे हैं। ट्रंप प्रशासन ने अब वीसा के कायदों में फेरबदल करके जो काम आसानी होते थे उन्हें लंबा खींचने का मन बनाया है। यह कदम नॉन-इमिग्रेंट वीसा नीति में उठाया गया है। इससे कहते हैं, वीसा पाने में अब कड़ाई बढ़ जाएगी। माना यह भी जा रहा है कि इसका सीधा असर भारत समेत कई देशों के उन नागरिकों पर पड़ेगा, जो अमेरिका में शिक्षा, व्यापार, नौकरी या पर्यटन के उद्देश्य से वीसा के लिए आवेदन करते हैं। नॉन-इमिग्रेंट वीसा विदेशियों को अमेरिका में अस्थायी रूप से आने देने के लिए दिए जाते हैं। इनमें एच1-बी (वर्क वीजा), एफ1 (स्टूडेंट वीजा), बी1/बी2 (बिजनेस वीजा/टूरिस्ट वीजा), एल1 (इन्ट्रा-कंपनी ट्रांसफर वीजा) आदि आते हैं।

आखिर अमेरिका ने वीसा प्रक्रिया में सख्ती लाने का रास्ता क्यों चुना होगा? इसके पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। जैसे, अमेरिका में सुरक्षा को लेकर चिंताओं का बढ़ना, घुसपैठ पर नियंत्रण और अमेरिकी रोजगार बाजार की सुरक्षा। विशेष रूप से एच1-बी वीसा श्रेणी पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, क्योंकि इसके तहत भारतीय आईटी पेशेवर अमेरिका में काम करने जाते हैं। नए नियमों के तहत वीसा के लिए साक्षात्कमार की प्रक्रिया में अधिक कड़े सवाल पूछे जाएंगे, दस्तावेजों की जांच का स्तर बढ़ जाएगा और कुछ मामलों में पृष्ठभूमि जांचने की प्रक्रिया लंबी हो जाएगी। इतना ही नहीं, वीसा फीस भी बढ़ाए जाने की संभावना है।

ट्रंप प्रशासन ने अब वीसा के कायदों में फेरबदल करके जो काम आसानी होते थे उन्हें लंबा खींचने का मन बनाया है

इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर भारत से अमेरिका जाने वाले विद्यार्थियों, पेशेवरों, व्यवसायियों और पर्यटकों को महसूस होगा। जैसे, अमेरिका में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के इच्छुक भारतीय छात्रों को अब अधिक समय तक वीसा का इंतजार करना पड़ सकता है। नए नियमों के कारण इंटरव्यू में अधिक सख्ती होगी और दस्तावेजों तथा छात्रों की योग्यता पर गहन जांच की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इससे विद्यार्थियों के लिए दाखिला प्रक्रिया में देरी लग सकती है। विशेष रूप से ऐसे छात्र जो कम मशहूर विश्वविद्यालयों में प्रवेश लेते हैं, उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

वर्क वीसा एच1-बी भारत के आईटी पेशेवरों को मिलता है जो अमेरिका में कार्य करने के लिए जाते हैं। नई नीति में अब वीसा अनुमोदन की प्रक्रिया और मुश्किल बना दी जाएगी, जिससे कंपनियों के भर्ती प्रक्रिया में भी देर लग सकती है। इससे भारतीय आईटी उद्योग पर भी असर पड़ने की संभावना है, क्योंकि कई कंपनियां अमेरिकी कंपनियों के लिए काम करने को पेशेवर मानव संसाधन भेज ही नहीं पाएंगी।

कारोबार के लिए बी1/बी2 वीसा मिलता है। लेकिन अब भारत के व्यवसायी और पर्यटक भी इन बदलावों से अछूते नहीं रह पाएंगे। वीजा आवेदन प्रक्रिया में अधिक कागजी कार्रवाई और लंबे समय का इंतजार उनकी योजनाओं में बाधा पैदा कर सकता है। अमेरिका में व्यापारिक बैठकें, निवेश के अवसर या पारिवारिक मेलमिलाप भी प्रभावित होगी।

विशेषज्ञ बताते हैं कि ट्रंप प्रशासन द्वारा इन नियमों में बदलाव करने के पीछे कई राजनीतिक और आर्थिक रणनीतियां काम कर रही हैं। अमेरिका अपने घरेलू रोजगार को बढ़ावा देना चाहता है और विदेशी पेशेवरों पर निर्भरता कम करना चाहता है। इसके अलावा, अमेरिका की सरकार घुसपैठ को काबू करने की कोशिश कर रही है। तकनीकी सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर वीसा प्रक्रिया में सख्ती लाने का कदम इसलिए भी उठाया जा रहा है ताकि सुरक्षा खतरों को दूर किया जा सके।

इसके अतिरिक्त, अमेरिका और चीन के बीच व्यापार और तकनीकी प्रतिस्पर्धा के चलते भारत को एक रणनीतिक भागीदार माना जा रहा है। ऐसे में अमेरिका चाहता है कि भारतीय योग्य पेशेवरों के चयन पर विशेष रूप से ध्यान दिया जाए ताकि उसका तकनीकी के क्षेत्र में उसका दबदबा बनाए रखा जा सके। इस नई नीति से निपटने के लिए भारत को भी अपनी ओर से कई काम करने होंगे। भारत सरकार को अपने नागरिकों को वीसा प्रक्रिया के ताजा नियमों से परिचित कराना होगा। इसके लिए वीसा गाइड करने के सहायता केंद्रों की संख्या बढ़ानी पड़ सकती है।

दूसरे, भारतीय शैक्षणिक संस्थान और कंपनियां अमेरिका में वीसा प्राप्त करने के लिए जरूरी दस्तावेजों और प्रक्रियाओं की जानकारी पहले से तैयार रखें। कंपनियों को अपने एच1-बी वीजा आवेदन में गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना होगा ताकि हर आवेदन को सटीक और पूरी तरह से समर्थन मिल सके।

तीसरे, भारत को अमेरिका के साथ द्विपक्षीय वार्ता के माध्यम से इन नियमों के प्रभाव को कम करने का प्रयास करना होगा। दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी और सहयोग बढ़ाने के उपाय करने होंगे। इसके साथ ही भारतीय वकील, एजेंट और सलाहकारों को प्रशिक्षित करना होगा ताकि वे नागरिकों को उचित सलाह दे सकें।

अमेरिका का यह कदम वैश्विक स्तर पर भी अन्य देशों को प्रभावित कर सकता है। अन्य कई देशों ने भी अपनी वीसा नीति में सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। ऐसे में भारत को अपने नागरिकों के लिए वैकल्पिक गंतव्यों, जैसे कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, यूके आदि में भी अवसर तलाशने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

Topics: भारतभारतीय आईटी पेशेवरचीनअमेरिकाडोनाल्ड ट्रंपIndiaimmigrationChinaवीसाforeign affairsamerican visa policyवीसा नियमएच1-बी वीसाभारतीय नागरिकएफ1 वीसा
Alok Goswami
Alok Goswami
A Delhi based journalist with over 25 years of experience, have traveled length & breadth  of the country and been on foreign assignments too. Areas of interest include Foreign Relations, Defense, Socio-Economic issues, Diaspora, Indian Social scenarios, besides reading and watching documentaries on travel, history, geopolitics, wildlife etc. [Read more]
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