रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अमेरिकी टैरिफ और प्रतिबंधों के बीच दुनिया के उन देशों को बड़ा संदेश दिया है, जो डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों से परेशान हैं। उन्होंने कहा कि रूस दुनिया से अलग-थलग नहीं हो रहा। उन्होंने जोर देकर कहा कि रूस किसी “राष्ट्रीय खोल” में बंद होने के बजाय खुला है और सभी देशों के साथ सहयोग के लिए तैयार है, खासकर उन दोस्तों के साथ जो रूस के साथ काम करना चाहते हैं।
देश की सरकारी न्यूज एजेंसी तास के अनुसार, व्लादिवोस्तोक में 5 सितंबर, 2025 को 10वें पूर्वी आर्थिक मंच (EEF) के कार्यक्रम में व्लादिमीर पुतिन ने ये बात कही। उन्होंने साफ कहा कि खुलापन उन सभी के लिए फायदेमंद है जो इस नीति को अपनाते हैं।
इसे भी पढ़ें: तेल, टैरिफ और तकरार : रिश्तों की तिकोनी चुनौती
आधुनिक दुनिया और सहयोग की जरूरत
पुतिन का कहना है कि आज हालात ये हैं कि दुनिया तकनीकी प्रगति के कारण आपस में गहराई से जुड़ी हुई है। ऐसे में अगर आप खुद को अलग रखते हैं तो ये न सिर्फ नुकसानदायक है, बल्कि यह प्रतिस्पर्धा को भी कमजोर करता है। उन्होंने कहा कि रूस इस बात को समझता है और इसलिए वह वैश्विक सहयोग के लिए अपने दरवाजे खुले रखना चाहता है। उन्होंने कहा, “हम खुद को किसी से बंद नहीं कर रहे।” राष्ट्रपति पुतिन के इस बयान को अमेरिका से प्रताड़ित देशों को अपने पक्ष में करने की नीति माना जा रहा है। ये उस नीति को भी दिखाने की कोशिश है, जिसके तहत वह वैश्विक मंच पर सहयोग और साझेदारी को बढ़ावा देना चाहते हैं।
प्रोटेक्शनिज्म पर सवाल
प्रोटेक्शनिज्म (संरक्षणवाद) कभी फायदेमंद हो सकता है, सवाल के जबाव में पुतिन ने स्पष्ट कहा कि यह नीति अपनाने वालों को नुकसान पहुंचाती है। उनके मुताबिक, प्रोटेक्शनिज्म वैश्विक व्यापार को कमजोर करता है और क्षेत्रों व देशों में अलगाव को बढ़ावा देता है। पुतिन ने इसे “अच्छा नहीं” बताते हुए कहा कि यह नीति लंबे समय में नुकसान ही पहुंचाती है।
इसे भी पढ़ें: ट्रंप की कार्रवाई से डरे अमेरिकी प्रवासी: इस बार कैटो में लोगों को इमिग्रेशन डिपार्टमेंट ने बनाया निशाना
क्यों अहम है पुतिन का ये बयान
गौरतलब है कि पुतिन ने ये बयान ऐसे समय में दिया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मनमाने तरीके से दुनियाभर के कई देशों पर टैरिफ लगा दिया है, जिससे लोग नए विकल्प की तलाश कर रहे हैं। इस टैरिफ का पीड़ित भारत भी है, जिस पर 50 प्रतिशत का टैरिफ थोपा गया है। इसके बाद भारत भी नए बाजार की तलाश में है। हाल ही में चीन के तियानजिन शहर में हुई एससीओ की बैठक के दौरान भारत-रूस-चीन एक साथ दिखे थे। इस दौरान नए आर्थिक मंच को तलाशने पर चर्चा हुई थी। ऐसे में रूसी राष्ट्रपति का यह बयान इस पहल को और अधिक आगे बढ़ाने के तौर पर भी देखा जा रहा है।
















