ब्रिटेन में नई निर्वाचित होम सेक्रेटरी पर बवाल मचा हुआ है। होम सेक्रेटरी अर्थात गृह सचिव का पद बहुत शक्तिशाली होता है। ब्रिटेन में इस पद को लेकर इसलिए हंगामा मचा हुआ है क्योंकि इस पद पर एक मुस्लिम महिला शबाना महमूद की नियुक्ति कीर स्टार्मर सरकार ने की है। शबाना महमूद, एक पाकिस्तानी मूल की महिला है और लोग कह रहे हैं कि अब महमूद यूके की अप्रवासन नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा को देखेंगी।
मुस्लिम पहचान और फिलिस्तीन समर्थन को लेकर सवाल
इस नियुक्ति को लेकर इसलिए भी हंगामा मचा हुआ है क्योंकि शबाना महमूद बार-बार अपनी मुस्लिम पहचान को लेकर बहुत मुखर रहती हैं। और वे फिलिस्तीन के प्रति अपने समर्थन को लेकर भी मुखर रहती हैं। इस नियुक्ति को लेकर सोशल मीडिया पर भी शोर हो रहा है। लोग इस निर्णय पर प्रश्न उठा रहे हैं। एक यूजर ने लिखा कि उन्हें इससे कोई मतलब नहीं है कि शबाना एक मुस्लिम हैं। उन्हें इस बात से भी मतलब नहीं होगा कि शबाना महमूद एक हिन्दू, बुद्ध, जैन या यहूदी होतीं।
शबाना महमूद के पिछले रुख पर विवाद
उन्हें इस बात को लेकर चिंता है कि वह अर्थात शबाना महमूद फ्री फिलिस्तीन अर्थात इजरायल को खत्म करने वाला प्लेकार्ड उठाए हुए हैं। वह सुपरमार्केट पर यहूदी भोजन न बेचने के लिए जोर डालती है। सबसे अधिक दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि यह होम सेक्रेटरी ही है, जो ग्रूमिंग गैंग्स की जांच आदि के लिए उत्तरदायी है। ग्रूमिंग गैंग्स अर्थात पाकिस्तानी मुस्लिमों द्वारा ब्रिटिश श्वेत लड़कियों का सुनियोजित शोषण।
ग्रूमिंग गैंग्स पर निष्पक्ष जांच को लेकर संदेह
ब्रिटेन में पाकिस्तानी मुस्लिमों एवं लेबर पार्टी का एक बड़ा वर्ग पहले से ही इन घटनाओं को नकारता आ रहा है, और अब ऐसे में जब जांच आदि का जिम्मा एक पाकिस्तानी मूल की महिला के हाथ में होगा तो क्या जांच निष्पक्षता के साथ हो पाएगी? इसे लेकर ग्रूमिंग गैंग के खिलाफ अभियान चला रहे राजा मिया ने एक्स पर लिखा कि यूके में जिस प्रकार से शबाना महमूद की नियुक्ति होम सेक्रेटरी के पद पर हुई है, वह साधारण नहीं है।
राजा मिया की चिंता
क्योंकि शबाना महमूद अब ग्रूमिंग गैंग्स की राष्ट्रीय जांच की निगरानी करेंगी। उन्होनें लिखा कि यह कोई भी ऐसे ही की गई नियुक्ति नहीं है। होम सेक्रेटरी जांच के दायरे, जांच की स्वतंत्रता और उसकी विश्वसनीयता को आकार देगी। और वह समुदाय जिसकी लड़कियों के साथ धोखा हुआ, उन्हें यह बताया जाएगा कि वे उसी समुदाय के राजनेताओं पर विश्वास रखें, जो अपराध करने वाले लोगों की पृष्ठभूमि की है।
न्याय और समुदाय संबंधी सवाल
उन्होनें पूछा कि क्या शबाना महमूद न्याय देने में सक्षम हो पाएंगी? क्या वे उन लड़कियों के दिलों से डर हटा पाएंगी, जिन्हें कम्युनिटी लीडर्स ने निराश किया था। और उन्होनें कुछ प्रश्न और पूछे कि क्या वह इस बात को स्वीकार कर पाएंगी कि छोटी श्वेत लड़कियों के सामूहिक बलात्कार में पाकिस्तानी मुस्लिम आदमियों का प्रतिनिधित्व बहुत अधिक है? और क्या वह यह स्वीकार कर पाएंगी कि ये अपराध नस्लीय आधार पर किये गए थे और साथ ही मजहबी रूप से इसे अपराधियों ने सही ठहराया था।
One of @UKLabour’s most prominent Pakistani Muslim politicians, Shabana Mahmood, now inherits responsibility for the National Inquiry into the Pakistani grooming gangs scandal.
Is anyone really surprised that @Keir_Starmer has appointed @ShabanaMahmood as Home Secretary?
This… pic.twitter.com/P7odo8omV6
— Raja Miah (@recusant_raja) September 5, 2025
अन्य विवादास्पद मुद्दे
क्या वह कज़िन के बीच निकाह जैसी समस्याओं का समाधान कर पाएंगी जो समुदाय की छवि को प्रभावित कर रही हैं? ब्रिटेन से अप्रावासियों को बाहर निकालने के अभियान की बात करने वाले कई लोगों ने यह भी प्रश्न किये कि क्या अब अवैध रूप से देश मे प्रवेश करने वालों पर सख्ती की उम्मीद की जा सकती है? लोग सोशल मीडिया पर शबाना महमूद के इतिहास को खंगाल कर सामने ला रहे हैं और यह हैरानी व्यक्त कर रहे हैं कि आखिर वह महिला कैसे होम सेक्रेटरी जैसे पद पर नियुक्त की जा सकती है, जिसके विचार ब्रिटेन के सांस्कृतिक मूल्यों से मेल नहीं खाते हैं।
डेपोर्टेशन फ्लाइट विवाद
StarkNakedBrief नामक यूजर ने लिखा कि वर्ष 2020 में एक पत्र पर हस्ताक्षर किये थे, जिसमें डेपोर्टेशन फ्लाइट को रोके जाने की मांग की गई थी और उस फ्लाइट में कई अपराधी थे। और उसमें कई अपराधी भी थे। उनमें से कई बलात्कारी थे, हत्यारे भी थे और साथ ही ब्रिटेन की सड़कों पर ड्रग्स भी बेचने वाले थे।
अर्नेस्टो ईलियट का मामला
मार्टिन डाउबने नामक यूजर ने बीबीसी और डेलीमेल के लिंक्स के हवाले से लिखा कि जो फ्लाइट रोकी गई थी, उसमें जमैका के 50 अपराधी थे। उसमें एक अपराधी था अर्नेस्टो ईलियट और उसने 17 अपराध किये थे। जब यह फ्लाइट रोक दी गई तो उसके बाद ईलियट ब्रिटेन में वापस रह गया और उसने छह महीने बाद 35 वर्षीय नेथेनीयल आईवूए-एगो की हत्या कर दी थी। ईलियट को 26 साल की कैद हुई थी और उसे इसलिए डिपोर्ट नहीं किया गया, क्योंकि वकीलों ने उसके “पारिवारिक जीवन के अधिकार” के आधार पर इस पर रोक की मांग की थी। जबकि ईलियट के परिवार के एक सदस्य, अर्थात उसके बेटे निको को उसी हत्या में शामिल होने के कारण 22 साल की जेल हुई थी।
लोगों की निराशा और सवाल
कई यूजर्स दुख व्यक्त कर रहे हैं और कह रहे हैं कि अब ग्रूमिंग गैंग्स की पीड़िताओं को न्याय नहीं मिल पाएगा और मुस्लिम थर्ड वर्ल्ड से और अधिक लोग आएंगे। इस निर्णय पर लोग अचंभित हैं, दुखी है और निराश हैं।

















