UK हार्वे विलगूज़ हत्याकांड: ब्रिटेन में एक बार फिर से श्वेत बच्चों की सुरक्षा पर लोग प्रश्न उठा रह हैं और साथ ही समावेशीकरण पर भी लोग चर्चा कर रहे हैं। अवैध आप्रवासियों द्वारा किये जा रहे अपराधों और पाकिस्तानी मुस्लिमों के ग्रूमिंग गैंग्स के अपराधों के बीच एक और अपराध सामने आया है, जिसने वहाँ पर लोगों के मन में उथल पुथल पैदा कर दी है। ब्रिटेन में इसी वर्ष फरवरी में एक 15 वर्षीय बच्चे हार्वे विलगूज़ नामक किशोर की हत्या स्कूल में चाकू घोंप कर दी गई थी और हत्यारा और कोई नहीं, बल्कि उसके साथ ही पढ़ने वाला एक और किशोर था। उस समय उस किशोर का नाम नहीं बताया गया था। परंतु जब निर्णय दिया गया तो निर्णय देने वाली जज मिसेज जस्टिस नाओमी एलेनबोगेन ने इस प्रतिबंध को हटा दिया कि ऐसे अपराधी का नाम नहीं बताया जा सकता और अपराधी का नाम बताने की अनुमति दी और फिर पता चला कि हार्वे की हत्या उमर खान ने की थी, जो पाकिस्तानी मूल का ब्रिटिश नागरिक है।
अपराधी का नाम जाहिर होने और अपराधी को सजा मिलने के बाद हार्वे की माँ कैरोलिन विलगूज़ ने कहा कि उनके कंधे से एक बहुत बड़ा बोझ उतर गया है, उन्हें ऐसा लग रहा है। अब मोहम्मद उमर को 16 साल की सजा सुनाई गई है।
जब खान ने हार्वे की हत्या की थी, तो उस समय वे दोनों ही कक्षा नौ के छात्र थे और एक दिन उन दोनों के बीच सोशल मीडिया को लेकर आपस में कुछ झगड़ा हुआ था। और इसी झगड़े के बाद खान ने कुछ दिनों के बाद हार्वे का चाकू घोंप कर कत्ल कर दिया था। अब इस निर्णय के बाद हार्वे की माँ ने संतोष व्यक्त किया।
दोनों लड़के दोस्त थे
यह और भी स्तब्ध करने वाली बात है कि दोनों ही बच्चे आपस में दोस्त थे। हालांकि, यह दोस्ती इस लड़ाई से और हार्वे की हत्या से पाँच दिन पहले स्कूल के दो और लड़कों के बीच लड़ाई में एक दूसरे का विरोधी पक्ष लेने के कारण टूट गई थी।
सुनवाई के दौरान विक्टिम कार्ड भी खान ने खेला
इस मुकदमे की जब सुनवाई चल रही थी, तो उमर खान ने वही विक्टिम कार्ड खेला, जो अक्सर मुस्लिम खेलते हैं। उसने कहा कि उसके साथ नस्लीय भेदभाव हुआ था और उस पर सोशल मीडिया में एक मेडिकल कंडीशन को लेकर ताने मारे गए थे और इसके साथ ही उसके साथ घर पर अच्छा व्यवहार नहीं होता है। उसने यह भी कहा कि उसके साथ घर में मानसिक और शारीरिक शोषण होता है।उसने यह भी कहा कि उसका अपनी हरकतों पर कोई नियंत्रण नहीं था और उसे नहीं पता कि आखिर जो भी हुआ वह कैसे हुआ।
खुद को हार्ड दिखाना चाहता था उमर खान
मगर न्यायालय में उसकी यह दलील नहीं चली और हार्वे के वकील ने कहा कि जो सीसीटीवी घटना का सामने आया है, उससे यह स्पष्ट होता है कि अपराधी यह दिखाना चाहता था कि वह कितना हार्ड है और, वह बहुत अकचही तरह से जानता था कि वह क्या कर रहा है?
उन्होंने यह भी कहा कि उसकी रुचि हथियारों में थी और उसने “ज़ाम्बी किलर नाइफ” और अन्य ब्लेडस के विषय में भी ऑनलाइन खोज की थी। बीबीसी के अनुसार वकील ने यह भी कहा कि उसने लोगों को धमकी देने के लिए एक चाकू और कुल्हाड़ी के साथ तस्वीरे भी ली थीं। खान को सजा सुनाते हुए जस्टिस एलेनबोगेन ने कहा कि स्कूल्स में चाकू लाना एक बहुत गंभीर अपराध है।
लोगों के सवाल-‘हमारे बच्चे कहां सुरक्षित ?’
इस घटना के बाद एक बार फिर से लोगों ने सोशल मीडिया पर यह चिंता व्यक्त की है कि आखिर उनके बच्चे कहाँ पर सुरक्षित हैं? फरवरी में हार्वे की चाकू से हत्या के बाद एक अभियान यह भी चला था कि स्कूल्स में चाकू लाना अपराध होना चाहिए। “लाइव्स नॉट नाइव्स” का अभियान चलाया गया था। चाकू से होने वाले अपराधों के विषय में जागरूकता फैलाने के लिए यह अभियान था।
हार्वे की बहन ने भी इस अपराध को लेकर कहा था कि उनका पूरा परिवार इस घटना से तहसनहस हो गया है। सोफी ने न्यायालय को बताया कि “यह केवल मेरे भाई के खिलाफ ही अपराध नहीं है, बल्कि यह उन सभी के प्रति किया गया अपराध है जो हार्वे से प्यार करते थे। और यह भी कहा कि उन्हें हार्वे की कमी हर दिन खलती है।
सोशल मीडिया पर एक बार फिर से लोगों के निशाने पर वे लोग आ गए हैं, जो विविधता की बात करते हैं। लोगों का कहना है कि अपराधी मानसिकता वाले लोगों के प्रति विविधता कैसे दिखाई जा सकती है?
सोफी ने कहा “अपराधी ने हार्वे को नहीं, बल्कि हमें मारा है!” लोग पूछ रहे हैं कि कब तक उनके बच्चे विविधता और समावेशीकरण के एजेंडे का शिकार होते रहेंगे?

















