नई दिल्ली । विदेश मंत्रालय (MEA) ने गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस ताज़ा टिप्पणी पर कोई प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने भारत, रूस और चीन का जिक्र किया था। ट्रंप ने यह टिप्पणी चीन के तिआनजिन में हुए एससीओ शिखर सम्मेलन के कुछ दिनों बाद की, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भाग लिया था।
विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने मीडिया के सवालों के जवाब में कहा- “इस समय मेरे पास इस पोस्ट पर कोई टिप्पणी करने के लिए नहीं है”। एक अन्य सवाल के जवाब में जायसवाल ने कहा कि अमेरिका और भारत के बीच संबंध भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।
भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी
उन्होंने कहा- “दोनों देशों के बीच व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी है, जो साझा हितों, लोकतांत्रिक मूल्यों और मजबूत जन-से-जन संबंधों पर आधारित है। यह साझेदारी कई परिवर्तनों और चुनौतियों से गुजरी है। हम उस ठोस एजेंडे पर केंद्रित हैं, जिस पर हमारे दोनों देशों ने प्रतिबद्धता दिखाई है और हमें उम्मीद है कि यह संबंध आपसी सम्मान और साझा हितों के आधार पर आगे बढ़ते रहेंगे। जैसा कि आपने देखा होगा, मैं आपका ध्यान अलास्का में चल रहे संयुक्त सैन्य अभ्यास की ओर आकर्षित करूंगा। कुछ दिन पहले 2+2 इंटर-सेशनल बैठक हुई थी… दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही है और हम अपनी साझेदारी को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं”।
व्यापार और क्वाड पर भारत की स्थिति
एक अन्य सवाल का जवाब देते हुए जायसवाल ने कहा कि “हम क्वाड को चार सदस्य देशों के बीच साझा हितों पर कई मुद्दों पर चर्चा के लिए एक मूल्यवान मंच मानते हैं। नेताओं का शिखर सम्मेलन सदस्य देशों के बीच राजनयिक परामर्शों के माध्यम से तय किया गया है। जहां तक यूक्रेन संघर्ष का सवाल है, हम यूक्रेन में शांति स्थापित करने की हालिया सभी कोशिशों का स्वागत करते हैं। हमें उम्मीद है कि सभी पक्ष रचनात्मक रूप से आगे बढ़ेंगे। भारत इस संघर्ष के शीघ्र अंत और स्थायी शांति की स्थापना का समर्थन करता है”।
ट्रंप का आरोप और भारत की स्थिति
बता दें कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया है, जिसमें रूसी तेल के आयात पर 25 प्रतिशत का जुर्माना भी शामिल है। ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल पोस्ट में कहा- “ऐसा लगता है कि हमने भारत और रूस को सबसे गहरे और अंधकारमय चीन के हाथों खो दिया है। ईश्वर करे कि उनका भविष्य दीर्घ और समृद्ध हो!”
भारत की स्वतंत्र विदेश नीति
बता दें कि भारत सरकार ने पहले कहा था कि भारत के किसी भी देश के साथ संबंध अपनी योग्यता पर आधारित हैं और उन्हें किसी तीसरे देश के नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिए।

















