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जापान में आप्रवासियों के खिलाफ विरोध की शुरुआत, लोगों ने कहा- स्थानीय संस्कृति के लिए खतरा हैं ये…

जापान की अफ्रीकी होमटाउन योजना के खिलाफ लोगों का गुस्सा फूटा। सोशल मीडिया पर विरोध, पोल में 72% जापानी विदेशियों को नहीं चाहते।

Written byसोनाली मिश्रासोनाली मिश्रा
Sep 4, 2025, 07:21 pm IST
inविश्व

अब जापान में उन आप्रवासियों का विरोध आरंभ हो गया है, जो जापान की स्थानीय संस्कृति के विपरीत कार्य कर रहे हैं। जापान में काफी वर्षों से ही बाहर से आकर लोग कार्य कर रहे हैं, परंतु कभी भी जापान की आम जनता ने ऐसा कोई भी विद्रोह या विरोध नहीं किया कि जापान में बाहरी लोग नहीं आएं। मगर अब कुछ वर्षों से जापान में भी बाहरी लोगों का विरोध होने लगा है। यह विरोध इसलिए हो रहा है क्योंकि अब सरकार द्वारा जो योजनाएं बनाई जा रही हैं, उनसे स्थानीय संस्कृति पर खतरा उत्पन्न हो गया है।

अफ्रीकी होमटाउन योजना और विरोध

जापान के लोग अब इन नियमों के विरोध में है। जापान में कई क्षेत्र ऐसे हैं, जहां की संस्कृति पूरी तरह से बदल गई है। हाल ही में जापान की सरकार ने देश के कुछ क्षेत्रों में अफ्रीकी “होमटाउन” का निर्माण करने की घोषणा की और जिसे जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी द्वारा आरंभ किया गया था।

अफ्रीकी विकास पर टोक्यो इन्टरनेशनल कान्फ्रन्स के दौरान, जेआईसीए ने अफ्रीकी होमटाउन अभियान को आरंभ किया था, जिसमें उन्होनें जापान के चार शहरों को नाइजीरिया, घाना, तंजानिया और मोज़ाम्बिक के लिए होमटाउन के रूप में निर्धारित किया था। इस कदम का उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करना और स्थानीय समुदाय का समर्थन करना शामिल था, और साथ ही इस कदम के माध्यम से वह अफ्रीका के सामने आने वाली चुनौतियों के लिए समाधान देना चाहती है।

सोशल मीडिया पर गुस्सा और गलतफहमियां

मगर इस कदम का जापान के लोगों ने विरोध करना आरंभ कर दिया है। लोगों का तर्क है कि उन लोगों के लिए क्यों होमटाउन बनाना, जो स्थानीय संस्कृति को समझते नहीं हैं। अफ्रीका की स्थानीय मीडिया ने इस असंतोष में आग में घी डालने का काम किया, जिसमें यह कहा गया कि जापान के क्षेत्र तंजानिया का हिस्सा बन जाएंगे।

सीएनएन के अनुसार नाइजीरिया की सरकार ने भी पहले एक्स पर यह पोस्ट किया कि “जापानी सरकार कुशल और प्रतिभाशाली युवा नाइजीरियाई लोगों के लिए एक विशेष वीज़ा श्रेणी बनाएगी जो किसाराज़ू (शहर) में रहने और काम करने के लिए जाना चाहते हैं।” हालांकि बाद में इस पोस्ट को डिलीट कर दिया गया, मगर यह जापानी लोगों के मन में आक्रोश भरने के लिए पर्याप्त था। लोगों का गुस्सा सोशल मीडिया पर फूट पड़ा।

जेआईसीए और अन्य संस्थाओं ने जब तक अफ्रीकी सरकारों से सूचनाओं को सही रूप में प्रस्तुत करने का अनुरोध किया और जब तक कथित सही जानकारियाँ सार्वजनिक पटल पर आईं, तब तक लोगों का गुस्सा काफी अधिक बढ़ चुका था।

विदेशियों के खिलाफ असंतोष

कई सोशल मीडिया यूजर्स इससे खुश नहीं हुए और उन्होनें इसे केवल और केवल दिखावा बताया। कई वीडियोज़ सोशल मीडिया पर वायरल हैं, जिनमें वे यह कह रहे हैं कि “हमें हमारा देश वापस दो!” सीएनएन ने इस जुलूस का कवरेज किया था और इसे पूरी तरह से कहीं न कहीं दक्षिणपंथी विरोध साबित करने का प्रयास किया। परंतु लोगों का कहना है कि पत्रकार ने यह पूरी तरह से अनदेखा कर दिया कि ये वे लोग थे, जिन्होनें जापान के लिए संघर्ष किया है। लोगों का असंतोष प्रधानमंत्री के लिए बढ़ता जा रहा है। लोग उनसे इस्तीफा मांग रहे हैं।

जनमत और पोल के परिणाम

vocesabianime के अनुसार टीवी के पोल ने यह बताया कि 72% जापानी और विदेशी नहीं चाहते हैं। एक जापानी टीवी प्रोग्राम में दर्शकों से यह पूछा गया कि क्या जापान को अपना आप्रवासी कार्यक्रम बढ़ाना चाहिए। तो इसके उत्तर में कुल 28,641 लोगों ने उत्तर दिया।

  • – उनमें से 17% ने कहा कि जापान को और ज़्यादा विदेशियों को स्वीकार करना चाहिए
  • – 11% इस विषय में कोई भी विचार देने में निश्चित नहीं थे।
  • – 72% ने कहा कि जापान को और ज़्यादा विदेशियों को स्वीकार नहीं करना चाहिए

जनता की प्रतिक्रियाएं

कुछ जबाव जिन्हें लेकर जनता का असंतोष दिखता है-

1. “हमें अलग-अलग संस्कृतियों, रीति-रिवाजों और मूल्यों वाले विदेशियों को क्यों स्वीकार करना है? वे जापानियों के सांस्कृतिक मूल्यों का भी सम्मान नहीं करते।”

2. “अगर आप निशिकावागुची स्टेशन के पूर्वी हिस्से में रहते हैं, तो आप समझ जाएँगे। एक साथ रहना असंभव है। ऐसे विदेशी कचरा निपटान नियमों का भी पालन नहीं करते। दरअसल, वे करना ही नहीं चाहते। इनके क्षेत्र में अवैध कचड़े का ढेर लगा रहता है, कौवे कचरा फैलाते हुए दिखते हैं, स्टेशन के पास खून के तालाब… आदि दिखते रहते हैं।”

3. “फ़िलहाल, जापान और ज़्यादा लोगों को स्वीकार करने की स्थिति में नहीं है! (न नियमों का, न संस्कृति का, न लोगों का सम्मान किया जा रहा है!)”

4. “मजदूरों की कमी को दूर करने के लिए अप्रवासियों पर निर्भर रहने के बजाय, हमें उत्पादकता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। अन्यथा, जापानी लोगों की आय कभी नहीं बढ़ेगी।”

निष्कर्ष

जापान में छिटपुट स्तर पर ऐसे आप्रवासियों का लगातार विरोध हो रहा था, जो जापान की संस्कृति का आदर नहीं करते हैं और जापान के धार्मिक स्थलों का अपमान करते हैं। हालांकि संगठित तरीके से विरोध हाल ही में आरंभ हुआ है और अब जनता भी यह अभियान चला रही है।

Topics: नाइजीरिया जापान संबंधजापान इमिग्रेशनएशिया-अफ्रीका संबंधजापान समाचारजापानसोशल मीडिया विरोधअफ्रीकी होमटाउन योजनाजापान आप्रवासी विरोधजापान संस्कृतिJICA
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