यूके में इन दिनों कई मामलों को लेकर हंगामा हो रहा है और अब नया हंगामा मचा हुआ है बार काउंसिल द्वारा 10,000 अश्वेत इंटर्न्स कार्यक्रम को लेकर। वहाँ की बार काउंसिल ने 10,000 इंटर्न्स कार्यक्रम की घोषणा की है और इसे आरंभ किया है, मगर यह सभी के लिए नहीं है। यह कार्यक्रम केवल और केवल अश्वेत लोगों के लिए है।
क्या है यह कार्यक्रम?
बार काउंसिल की वेबसाइट पर इस कार्यक्रम के विषय में विवरण दिया गया है। इसमें लिखा है कि यह कार्यक्रम यूनिवर्सिटी के अश्वेत विद्यार्थियों एवं स्नातकों को वकालत का अनुभव पाने का अवसर डेटा है। यह छ सप्ताह का कार्यक्रम है और इसमें इंटर्न्स को कई चैंबर्स और ऑर्गनिजेशन्स द्वारा इस पेशे के बारे में जानकारी प्रदान की जाएगी। और इन सभी इंटर्नशिप का भुगतान भी किया जाएगा।
पात्रता:
इसके लिए पात्रता अश्वेत मूल का होना है और कम से कम उम्र 18 वर्ष की होनी है। या तो आवेदक अश्वेत हो या फिर वह अश्वेत मूल का हो (मिश्रित मूल भी हो सकता है), और वर्तमान में यूके यूनिवर्सिटी में पढ़ रहा हो या फिर वह पिछले तीन वर्षों में यूके की यूनिवर्सिटी से स्नातक हुआ हो।
इस कार्यक्रम को लेकर अब सोशल मीडिया पर हंगामा मचा हुआ है, परंतु यह योजना इस वर्ष की नहीं है, बल्कि यह योजना पिछले वर्ष भी लाई गई थी और उसमें भी कई लोगो को यह अवसर दिए गए थे। बार काउंसिल की वेबसाइट पर पूर्व इंटर्न्स के अनुभव दिए गए हैं। और जब उन लिंक्स पर क्लिक करते हैं तो उसमें 2024 का ब्लॉग है, जिसमें कई लाभार्थियों ने अपने अनुभव साझा किये हैं कि कैसे उन्हें बार काउंसिल की 10,000 Black Interns Scheme का लाभ मिला है और इस योजना में उन्हें छ सप्ताहों में भिन्न-भिन्न चैंबर्स में कार्य करने का अवसर मिला।
मगर यह योजना 2022 में भी थी। इसका अर्थ यह हुआ कि रंग न्याय के नाम पर अश्वेत लोगों के लिए इंटर्न्स की योजना आज से कई वर्ष पहले से चल रही है। और यह योजना बार काउंसिल के साथ मिलकर ही चलाई जा रही है। जूडिशीएरी में अश्वेतों के प्रतिनिधित्व मे वृद्धि के लिए समय-समय पर कई कार्यक्रम आरंभ किये गए और वर्ष 2020 में 10,000 Black Interns स्टीयरिंग ग्रुप की स्थापना इस अभियान को आरंभ करने के लिए की गई थी। इसका अर्थ यह हुआ है डाइवर्सिटी के नाम पर अश्वेतों के लिए यह योजना कई वर्षों से लागू है।
सोशल मीडिया पर हो रहा है विरोध
इस योजना के इस बार घोषित होने पर लोग सोशल मीडिया पर विरोध कर रहे हैं। बार काउंसिल ने इस योजना के विषय में एक्स पर पोस्ट लिखा कि “हम बैरिस्टर बनने वाले अश्वेत लोगों को बार में 6 हफ़्ते की इंटर्नशिप प्रदान करने के लिए इंग्लैंड और वेल्स में 10,000 ब्लैक इंटर्न्स फ़ाउंडेशन, चैंबर्स और संगठनों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। इस कार्यक्रम और आवेदन प्रक्रिया के बारे में हमारी वेबसाइट पर जाएं!”
इस पोस्ट के उत्तर में सांसद रूपर्ट लो ने लिखा कि “इस अपमानजनक पोस्ट को डिलीट करें और इस नस्लवादी योजना को समाप्त करें। श्वेत होने में कुछ भी गलत नहीं है!”
गेरेथ डेविस नामक यूजर ने लिखा कि सलिसिटर परीक्षा में श्वेतों के उत्तीर्ण होने का प्रतिशत 90% है, एशियाई लोगों का 71% और अश्वेत लोगों का 57%। फिर उसने रूपर्ट लो से प्रश्न किया कि अगर आप बार काउंसिल होते तो आप किसे वकील होने देते, वे लोग जिनके सबसे अधिक पासिंग अंक हैं या फिर उन्हें, जिनके सबसे कम अंक है?
So in solicitors exams, whites had a pass rate of 90% Asians 71% & Blacks 57%
If you were the @thebarcouncil who would you encourage to be lawyers @RupertLowe10
Those with the highest pass marks or those with the lowest
Whites=Meritocracy
Blacks=DEIhttps://t.co/Ords8g41uT… https://t.co/d41STuSluX— Gareth Davies (@GarethDavies007) September 28, 2025
विवधता बढ़ाने के लिए परीक्षाओं को सरल बनाने की तैयारी
जनवरी में टेलीग्राफ में एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी। उसके अनुसार वकीलों का कहना था कि डाइवर्सिटी को बढ़ाने के लिए परीक्षाओं को सरल बनाया जाए। ब्रिटेन की लीगल वाचडॉग पर यह दबाव था कि वह सलिसिटर क्वालिफ़ाइंग इग्ज़ैमनैशन के लिए पास रेट में वृद्धि करे जिससे कि एथनिक अल्पसंख्यक पृष्ठभूमि से जो प्रशिक्षु हैं, जिनके पास रेट कम हैं, वे लॉ फर्म्स के डाइवर्सिटी अभियानों में बाधा न पहुंचाएं।
ब्लैक लाइव्स मैटर्स अभियान के दौरान यूके में यह मांग उठी थी कि कैसे अश्वेत लोगों के पास होने का प्रतिशत कम है और इस कारण कॉर्पोरेट डाइवर्सिटी और समवेशीकरण अभियानों में वृद्धि हुई थी। सॉलिसिटर्स रेगुलेशन अथॉरिटी (एसआरए) के बोर्ड ने कहा कि कई वकीलों और प्रशिक्षण प्रदाताओं ने चिंता व्यक्त की है कि एसक्यूई परीक्षाओं में अश्वेत और एशियाई उम्मीदवारों की कम पास होने की दर के कारण विविधता अर्थात डाइवर्सिटी के कदमों पर खतरा है।
और इस बात के प्रयास किये गए थे कि वकीलों के बीच डाइवर्सिटी अधिक से अधिक हो। अब बार काउंसिल की 10,000 अश्वेत इंटर्न्स योजना के बाद सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं कि यह नस्लवाद है। लोगों ने कहा कि हमें योग्य बैरिस्टर चाहिए, न कि रंग के आधार पर वकील। लोग कह रहे हैं कि सरकार के सहयोग से उठाए गए ऐसे कदम योग्यता श्वेत बच्चों के लिए योग्यता के आधार पर नौकरी और काम के अवसर समाप्त कर रहे हैं। श्वेत लोगों के साथ स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी हर जगह भेदभाव हो रहा है।
















