7 सितंबर 2025 का दिन हिंदू धर्म के अनुसार बहुत खास माना जा रहा है। इस दिन से पितृ पक्ष की शुरुआत हो रही है और इसी दिन साल का आखिरी चंद्र ग्रहण भी पड़ रहा है। ऐसे में यह दिन धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है।
पितृ पक्ष क्या है- यह वह समय होता है जब हम अपने पूर्वजों (पितरों) को याद करते हैं, उनके लिए तर्पण, पूजा और दान करते हैं। माना जाता है कि इस समय पितरों की आत्मा धरती पर आती है और अपने परिजनों से तर्पण और सम्मान की अपेक्षा रखती है। श्राद्ध के दिनों में किए गए कर्म जैसे जल अर्पण, भोजन दान, मंत्र जाप आदि पूर्वजों की आत्मा को शांति प्रदान करते हैं और उनके आशीर्वाद से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
चंद्र ग्रहण और उसका महत्व- 7 सितंबर को रात 9:57 से 1:26 बजे तक पूर्ण चंद्र ग्रहण लगेगा, जो अपने चरम पर 11:42 बजे होगा। इस दौरान चंद्रमा लाल दिखाई देगा। हिंदू धर्म में ग्रहण के समय मंत्र जाप, ध्यान और साधना को शुभ माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस समय की गई साधना कई गुना अधिक फल देती है। इस बार खास बात यह है कि चंद्र ग्रहण और पितृ पक्ष एक ही दिन पड़ रहे हैं। पितृ पक्ष का पहला दिन और पूर्ण चंद्र ग्रहण का यह संयोग बहुत ही दुर्लभ होता है और वर्षों में एक बार आता है। इस वजह से 7 सितंबर का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति इस दिन सच्चे मन से अपने पितरों को याद करता है, तर्पण करता है और पूजा करता है, तो उसे कई गुना पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
इस दिन क्या करें- एक लोटे में जल और काले तिल लें। पूर्वजों का स्मरण करके उनका नाम लेकर तर्पण करें। यदि संभव हो तो गंगा, यमुना या नर्मदा जैसी किसी पवित्र नदी के किनारे तर्पण करना श्रेष्ठ होता है। पितरों के नाम पर गरीबों को भोजन, वस्त्र या दान दें। गाय, कुत्ते, पक्षियों को खाना खिलाएं और पानी पिलाएं। यह सब कार्य पितरों को अर्पित मानकर करें। ग्रहण शुरू होने से पहले भोजन कर लें। ग्रहण के दौरान भोजन करना वर्जित होता है। घर की दक्षिण दिशा में दीपक जलाएं। शांति से बैठकर अपने पितरों को याद करें और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” या अन्य मंत्रों का जाप करें। इस दिन भगवद् गीता, विष्णु सहस्रनाम या रामचरितमानस का पाठ करना बहुत पुण्यकारी माना जाता है। ग्रहण का समय ध्यान और भक्ति के लिए सबसे उपयुक्त होता है। ग्रहण के दौरान सोना, खाना, बाल काटना या नाखून काटना वर्जित है। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करके शुद्ध वस्त्र पहनें और घर में गंगाजल का छिड़काव करें।

















