नई दिल्ली: भगवान बिरसा मुंडा भवन का उद्घाटन, जनजातीय समाज के लिए बना शोध और नेतृत्व विकास का भव्य केंद्र
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नई दिल्ली: भगवान बिरसा मुंडा भवन का उद्घाटन, जनजातीय समाज के लिए बना शोध और नेतृत्व विकास का भव्य केंद्र

अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम द्वारा “भगवान बिरसा मुंडा भवन”- एक जनजातीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र- का भव्य लोकार्पण समारोह रविवार सायं पुष्प विहार, नई दिल्ली में सम्पन्न हुआ।

Written byPanchjanyaPanchjanya — edited by Mahak Singh
Sep 1, 2025, 04:08 pm IST
in दिल्ली

अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम द्वारा “भगवान बिरसा मुंडा भवन”- एक जनजातीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र- का भव्य लोकार्पण समारोह रविवार सायं पुष्प विहार, नई दिल्ली में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर अनेक गणमान्य अतिथि, सामाजिक कार्यकर्ता एवं प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।

नव निर्मित भवन, जो महान जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी भगवान बिरसा मुंडा की स्मृति में निर्मित हुआ है, समाज के लिए समर्पित किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में कार्यकर्ता, विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि तथा नागरिक समाज के लोग उपस्थित रहे। अखिल भारतीय सह संगठन मंत्री श्री विष्णुकांत जी ने अतिथियों और जनसमूह को संबोधित करते हुए भवन के निर्माण में हुए प्रयासों का विवरण प्रस्तुत किया तथा भवन के उद्देश्यों और भावी कार्यों की जानकारी दी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के आदरणीय अध्यक्ष श्री सत्येन्द्र सिंह जी ने की। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि भारत की जनजातीय समाज ने आदिकाल से ही प्रकृति का संरक्षण और संवर्धन अपने जीवन मूल्यों और आस्था से किया है। उन्होंने बताया कि कल्याण आश्रम निरंतर जनजातीय अस्मिता और अस्तित्व की रक्षा तथा उनके सर्वांगीण विकास हेतु कार्य करता रहा है।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पधारे भारत सरकार के माननीय शहरी विकास एवं ऊर्जा मंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर जी ने सरकार की ओर से जनजातीय समाज के लिए अधोसंरचना और कल्याणकारी योजनाओं की प्रतिबद्धता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि यह भवन अनुसंधान, प्रशिक्षण और नेतृत्व विकास का केंद्र बनेगा तथा समावेशी विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा।

माननीय जनजातीय कार्य राज्यमंत्री श्री दुर्गादास उइके जी ने, जो कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, कहा कि भारतीय सभ्यता में जनजातीय समाज का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भगवान बिरसा मुंडा भवन जनजातीय जीवन और संस्कृति को उजागर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

माननीय अल्पसंख्यक कार्य एवं संसदीय कार्य मंत्री श्री किरेन रिजिजू जी भी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि भारत के पूर्व से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक की जनजातीय समाज देश की मुख्यधारा का अभिन्न अंग है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि प्राचीन काल से लेकर आज तक जनजातीय समाज ने भारत की सीमाओं की रक्षा की है। उन्होंने आगे कहा कि वनवासी कल्याण आश्रम ही वह संस्था है जिसने जनजातीय समाज के साथ हृदय से जुड़ाव स्थापित किया है न कि दाता की तरह, बल्कि अपने ही भाई-बंधुओं की तरह।

पूज्य महामंडलेश्वर स्वामी यतीन्द्रानंद गिरि जी महाराज (जीवन दीप आश्रम, रुड़की) ने आशीर्वचन दिए। उन्होंने इस पहल को जनजातीय समाज और पूरे राष्ट्र के लिए आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया। स्वामी जी ने कहा कि प्रकृति की कीमत पर होने वाला विकास वास्तव में विकास नहीं, बल्कि विनाश है। उन्होंने बल देकर कहा कि जनजातीय समाज को उनके क्षेत्रों में होने वाले विकास कार्यों में अपनी बात कहने का अवसर मिलना चाहिए। साथ ही उन्होंने कल्याण आश्रम के कार्यों को दिव्य और पुण्य सेवा बताया।

मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत की राष्ट्रीय पहचान के निर्माण में जनजातीय धरोहर का महत्व अत्यधिक है। उन्होंने कहा कि अपने आरंभ से ही वनवासी कल्याण आश्रम ने सक्षम, स्वाभिमानी और आत्मनिर्भर जनजातीय समाज बनाने का संकल्प लिया है। उन्होंने आश्रम और उसके कार्यकर्ताओं के प्रयासों की सराहना की, जो जनजातीय अस्मिता और अस्तित्व की रक्षा तथा उनके सर्वांगीण विकास हेतु निरंतर समर्पित हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनजातीय क्षेत्रों में विकास कार्य ऐसे होने चाहिए जो समाज को सशक्त बनाएँ, न कि उन्हें विस्थापित करें। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज को संग्रहालय की वस्तु नहीं, बल्कि जीवंत संस्कृति के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भगवान बिरसा मुंडा भवन के माध्यम से यह कार्य और अधिक प्रभावी रूप से आगे बढ़ेगा।

वनवासी कल्याण आश्रम के वरिष्ठ पदाधिकारी- श्री योगेश जी बापट, श्री अतुल जी जोग, श्री विष्णुकांत जी, श्री सुरेश कुलकर्णी जी, श्री प्रवीण डोलके जी और डॉ. माधवी देब बर्मन भी इस अवसर पर उपस्थित रहे। साथ ही दिल्ली एवं एनसीआर के विभिन्न शिक्षण संस्थानों के प्रधानाचार्य एवं उप-प्रधानाचार्य भी शामिल हुए। आयोजकों की ओर से बताया गया कि यह भवन जनजातीय अनुसंधान, युवा नेतृत्व प्रशिक्षण तथा जनजागरण कार्यक्रमों का केंद्र बनेगा, जिसका उद्देश्य जनजातीय ज्ञान परंपराओं को संरक्षित करना है। उन्होंने कहा कि यह पहल विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि देश भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती (2024–2025) मना रहा है।

इस लोकार्पण समारोह में वनवासी कल्याण आश्रम के कार्यकर्ताओं, विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों तथा समाज के अनेक वर्गों के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का समापन इस सामूहिक संकल्प के साथ हुआ कि भगवान बिरसा मुंडा के आदर्शों से प्रेरित होकर भारत के जनजातीय समाज के सर्वांगीण विकास के कार्य को और अधिक गति प्रदान की जाएगी।

Topics: Birsa Munda Birth Anniversaryआदिवासी संस्कृति संरक्षणtribal societyVanvasi Kalyan AshramBhagwan Birsa Munda BhawanTribal Research Center
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