अंतरराष्ट्रीय व्यापार अनिवार्य है, लेकिन दबाव में नहीं : RSS सरसंघचालक जी ने कहा- 'हम आत्मनिर्भर बनें, यह अब आवश्यक है'
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अंतरराष्ट्रीय व्यापार अनिवार्य है, लेकिन दबाव में नहीं : RSS सरसंघचालक जी ने कहा- ‘हम आत्मनिर्भर बनें, यह अब आवश्यक है’

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने आत्मनिर्भर भारत, नागरिक सुरक्षा और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पर संघ का दृष्टिकोण स्पष्ट किया

Written byShivam DixitShivam Dixit
Aug 30, 2025, 02:49 am IST
in भारत, संघ @100, दिल्ली

नई दिल्ली । संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में दिल्ली के विज्ञान भवन में मंगलवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) द्वारा आयोजित तीन दिवसीय व्याख्यानमाला कार्यक्रम ‘100 वर्ष की संघ यात्रा: नए क्षितिज’ के तृतीय और अंतिम दिवस पर ‘जिज्ञासा समाधान’ कार्यक्रम में ग्लोबल सिनेरियो से सम्बंधित प्रश्नों के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने उत्तर दिए।

प्रश्न – हाल के दिनों में व्यापार के बहाने भारत पर दबाव बनाने की कोशिश हो रही है। क्या एक राष्ट्र के तौर पर हमें इस दबाव में आना चाहिए? इस मसले पर देश के राजनीतिक नेतृत्व को आरएसएस का क्या संदेश है?

  • अमेरिका भारत पर दबाव बना रहा है कि वह रूस से तेल खरीदना बंद करे। ऐसे में हमें क्या करना चाहिए? 

 उत्तर – इस विषय में मैंने पहले भी कहा है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार अनिवार्य है और होना चाहिए। इससे देशों के आपसी संबंध बने रहते हैं। परंतु यह संबंध दबाव में नहीं, बल्कि परस्पर इच्छा और समानता से होने चाहिए। दबाव में मित्रता नहीं होती। इसलिए किसी भी दबाव में हमें नहीं आना चाहिए।

स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता

हम स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बनें, यह आवश्यक है। साथ ही यह भी ध्यान रखना चाहिए कि दुनिया परस्पर निर्भरता पर ही चलती है। इसलिए आत्मनिर्भरता और परस्पर सहयोग—दोनों का संतुलन होना चाहिए। यही संघ का विचार है और जब संघ का विचार है तो वही स्वयंसेवकों का भी विचार है।

सरकार की भूमिका और निर्णय

अब किसी विशेष परिस्थिति में क्या करना है, यह देश की तत्कालीन आवश्यकताओं और उसके परिणामों को देखकर सरकार तय करती है। दीर्घकालिक उद्देश्य यही होना चाहिए कि हम बिना किसी दबाव के व्यापार कर सकें।

संघ और सरकार का संबंध

जहाँ तक सरकार के निर्णयों का प्रश्न है—संघ सरकार को प्रभावित करके यह नहीं कहता कि अमुक नेता ने ऐसा कहा, तो आपको वैसा ही करना चाहिए। सरकार को अपने विवेक से निर्णय लेना होता है और वही उचित है। ऐसी स्थिति में प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि सरकार पर विश्वास रखे और उसके निर्णय का समर्थन करे। क्योंकि कैसे करना है, कौन सी कठिनाइयाँ हैं, यह सब सरकार देखती है।

मुक्त व्यापार और मानसिक स्वतंत्रता

मूल सिद्धांत यही है कि सर्वत्र मुक्त व्यापार होना चाहिए, लेकिन दबाव में व्यापार नहीं होना चाहिए। मैं ‘फ्री ट्रेड’ (निरपेक्ष मुक्त व्यापार) की नहीं, बल्कि मानसिक स्वतंत्रता के साथ व्यापार की बात कर रहा हूँ— यानी करने या न करने का निर्णय दबाव में नहीं, स्वतंत्र इच्छा से होना चाहिए।

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और राजनीति

जहाँ तक सांस्कृतिक और राष्ट्रवाद का प्रश्न है, उसका राजनीति से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। हमारा राष्ट्र सांस्कृतिक आधार पर निर्मित है, न कि केवल राजनीतिक आधार पर। राज्य आते-जाते रहते हैं, परंतु सांस्कृतिक प्रवाह अखंड चलता रहता है। यही हमारी राष्ट्र-परिभाषा है।

Topics: नागरिक सुरक्षाRSS विचारधारामोहन भागवत बयानRSS प्रमुख मोहन भागवतअमेरिका रूस दबावतीसरा विश्वयुद्धग्लोबल सिनेरियो‘आत्मनिर्भर भारत’पाञ्चजन्य विशेषसंघ शताब्दी वर्षअंतरराष्ट्रीय व्यापार
Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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