नई दिल्ली । संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में दिल्ली के विज्ञान भवन में मंगलवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) द्वारा आयोजित तीन दिवसीय व्याख्यानमाला कार्यक्रम ‘100 वर्ष की संघ यात्रा: नए क्षितिज’ के तृतीय और अंतिम दिवस पर ‘जिज्ञासा समाधान’ कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने संघ और सिख परंपरा की इन समानताओं को लेकर किए गए प्रश्नों का उत्तर दिया।
प्रश्न – संघ राष्ट्रनिर्माण, चरित्र निर्माण और धर्म रक्षा का कार्य करता है, जैसे सिख गुरुओं ने किया। शाखा शारीरिक प्रशिक्षण, चरित्र और दल-भावना सिखाती है, जैसे सिख गुरुओं ने “गतका” के माध्यम से किया। संघ और सिख परंपरा की इन समानताओं को समाज में स्पष्ट रूप से क्यों नहीं चित्रित किया जा रहा है..?
हिंदू और सिखों के बीच बढ़ती दूरी को कम करने के लिए क्या संघ सिख विद्वानों के साथ बैठक आयोजित करेगा.? अंतिम सिख धर्म और अन्य पंथों के साथ मतभेद दूर करने हेतु क्या संघ वरिष्ठ सेवकों और सिख बुद्धिजीवियों व जनसाधारण के बीच निरंतर संवाद बढ़ाएगा? क्या सिख त्योहारों में संघ की उपस्थिति इस दिशा में सकारात्मक कदम साबित हो सकती है?
वातावरण निर्माण का कार्य
उत्तर : यह कार्य हम करेंगे। इस दिशा में सुझाव भी आए हैं और सकारात्मक कदम उठे भी हैं। हम उन पर आगे बढ़ रहे हैं और आगे और भी बढ़ाएंगे। लेकिन यदि इस समय हम इस पर बहुत अधिक बोलें तो स्थिति ऐसी नहीं है कि उसे ठीक ढंग से ग्रहण किया जाएगा। इसलिए पहले ऐसा वातावरण बनाना आवश्यक है। वातावरण निर्माण का कार्य हम कर रहे हैं।
सिख गुरुओं से प्रेरणा
जहाँ तक दूसरे प्रश्न का संबंध है—जैसा सिख गुरुओं ने किया, वैसा ही संघ भी कार्य करता है। लेकिन इसे हम स्वयं कहें उससे अधिक परिणामकारी होगा यदि आप जैसे लोग इसे देखें और समाज में कहें। तब यह अधिक प्रभावी और जल्दी परिणाम देने वाला होगा।
मंदिर प्रवेश पर संघ का दृष्टिकोण
बाकी मंदिरों के प्रवेश के विषय में—हमारा तो यही मानना है कि मंदिर सबका होना चाहिए। यदि कोई मंदिर हिंदुओं का है तो उसमें सिख, बौद्ध, जैन सभी का समावेश स्वाभाविक है। इस पर अलग से कोई नियम लागू करने की आवश्यकता नहीं है। हाँ, यदि किसी विशेष पंथ या संप्रदाय के नियम हों तो वह उनका विषय है और उसी समुदाय को उसे देखना चाहिए।
अनुसूचित जाति समाज का मंदिर प्रवेश
जहाँ तक अनुसूचित जाति समाज के मंदिर प्रवेश का प्रश्न है, तो उनके प्रवेश का अधिकार पहले से ही है और संघ हमेशा उसके पक्ष में रहा है।

















