संघ और सिख परंपराओं की समानता! : जानिए RSS सरसंघचालक जी ने गुरुओं से प्रेरणा, मंदिर प्रवेश और संवाद बढ़ाने पर क्या कहा?
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संघ और सिख परंपराओं की समानता! : जानिए RSS सरसंघचालक जी ने गुरुओं से प्रेरणा, मंदिर प्रवेश और संवाद बढ़ाने पर क्या कहा?

सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने संघ और सिख परंपरा की समानताओं पर बड़ा बयान दिया। जानें उन्होंने सिख गुरुओं से प्रेरणा, मंदिर प्रवेश और संवाद बढ़ाने पर क्या कहा।

Written byShivam DixitShivam Dixit
Aug 29, 2025, 10:21 pm IST
inभारत, संघ @100, दिल्ली
सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी

सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी

नई दिल्ली । संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में दिल्ली के विज्ञान भवन में मंगलवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) द्वारा आयोजित तीन दिवसीय व्याख्यानमाला कार्यक्रम ‘100 वर्ष की संघ यात्रा: नए क्षितिज’ के तृतीय और अंतिम दिवस पर ‘जिज्ञासा समाधान’ कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने संघ और सिख परंपरा की इन समानताओं को लेकर किए गए प्रश्नों का उत्तर दिया।

प्रश्न – संघ राष्ट्रनिर्माण, चरित्र निर्माण और धर्म रक्षा का कार्य करता है, जैसे सिख गुरुओं ने किया। शाखा शारीरिक प्रशिक्षण, चरित्र और दल-भावना सिखाती है, जैसे सिख गुरुओं ने “गतका” के माध्यम से किया। संघ और सिख परंपरा की इन समानताओं को समाज में स्पष्ट रूप से क्यों नहीं चित्रित किया जा रहा है..?

हिंदू और सिखों के बीच बढ़ती दूरी को कम करने के लिए क्या संघ सिख विद्वानों के साथ बैठक आयोजित करेगा.? अंतिम सिख धर्म और अन्य पंथों के साथ मतभेद दूर करने हेतु क्या संघ वरिष्ठ सेवकों और सिख बुद्धिजीवियों व जनसाधारण के बीच निरंतर संवाद बढ़ाएगा? क्या सिख त्योहारों में संघ की उपस्थिति इस दिशा में सकारात्मक कदम साबित हो सकती है?

वातावरण निर्माण का कार्य

उत्तर : यह कार्य हम करेंगे। इस दिशा में सुझाव भी आए हैं और सकारात्मक कदम उठे भी हैं। हम उन पर आगे बढ़ रहे हैं और आगे और भी बढ़ाएंगे। लेकिन यदि इस समय हम इस पर बहुत अधिक बोलें तो स्थिति ऐसी नहीं है कि उसे ठीक ढंग से ग्रहण किया जाएगा। इसलिए पहले ऐसा वातावरण बनाना आवश्यक है। वातावरण निर्माण का कार्य हम कर रहे हैं।

सिख गुरुओं से प्रेरणा

जहाँ तक दूसरे प्रश्न का संबंध है—जैसा सिख गुरुओं ने किया, वैसा ही संघ भी कार्य करता है। लेकिन इसे हम स्वयं कहें उससे अधिक परिणामकारी होगा यदि आप जैसे लोग इसे देखें और समाज में कहें। तब यह अधिक प्रभावी और जल्दी परिणाम देने वाला होगा।

मंदिर प्रवेश पर संघ का दृष्टिकोण

बाकी मंदिरों के प्रवेश के विषय में—हमारा तो यही मानना है कि मंदिर सबका होना चाहिए। यदि कोई मंदिर हिंदुओं का है तो उसमें सिख, बौद्ध, जैन सभी का समावेश स्वाभाविक है। इस पर अलग से कोई नियम लागू करने की आवश्यकता नहीं है। हाँ, यदि किसी विशेष पंथ या संप्रदाय के नियम हों तो वह उनका विषय है और उसी समुदाय को उसे देखना चाहिए।

अनुसूचित जाति समाज का मंदिर प्रवेश

जहाँ तक अनुसूचित जाति समाज के मंदिर प्रवेश का प्रश्न है, तो उनके प्रवेश का अधिकार पहले से ही है और संघ हमेशा उसके पक्ष में रहा है।

Topics: संघ शताब्दी वर्ष कार्यक्रमसंघ का बयानदिल्ली विज्ञान भवन कार्यक्रमRSS और सिख संबंधसंघ और सिख परंपरामोहन भागवत मंदिर प्रवेशसिख गुरुओं से प्रेरणाराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघRSS संवाद सिख समाजमोहन भागवतसिख परंपरापाञ्चजन्य विशेषसंघ और सिख संबंधसंघ शताब्दी वर्षमंदिर प्रवेशमोहन भागवत भाषणसिख गुरुओं की प्रेरणाRSS
Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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