नागरिक कर्तव्य और संस्कारों से बदलेगा समाज.? : RSS सरसंघचालक मोहन भागवत जी ने बताया- 'समाज जागरण का असली रास्ता'
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नागरिक कर्तव्य और संस्कारों से बदलेगा समाज.? : RSS सरसंघचालक मोहन भागवत जी ने बताया- ‘समाज जागरण का असली रास्ता’

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने पंच परिवर्तन, नागरिक कर्तव्य, समाज जागरण और पर्यावरण पर रखे विचार।

Written byShivam DixitShivam Dixit
Aug 29, 2025, 08:39 pm IST
inभारत, पंच परिवर्तन, नागरिक कर्तव्य, संघ @100, त्रिपुरा

नई दिल्ली । संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में दिल्ली के विज्ञान भवन में मंगलवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) द्वारा आयोजित तीन दिवसीय व्याख्यानमाला कार्यक्रम ‘100 वर्ष की संघ यात्रा: नए क्षितिज’ के तृतीय और अंतिम दिवस पर ‘जिज्ञासा समाधान’ कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने पंच परिवर्तन, नागरिक बोध, समाज जागरण, पर्यावरण, सेवा को लेकर किए गए प्रश्न का उत्तर दिया।

प्रश्न – आपने कल पंच परिवर्तन की बात की थी। परिवारों को संस्कार कैसे दिए जा सकते हैं और नागरिक कर्तव्यों का बोध कैसे बढ़ाया जा सकता है? भारतीय समाज का जागरण कैसे किया जा सकता है? सामाजिक परिवर्तन के इस दौर में बुजुर्गों का सम्मान बना रहे, युवा नशे से दूर रहें, वैवाहिक संबंधों के बाहर के मामलों से बचें— इन चुनौतियों से कैसे निपटा जाए? धार्मिक स्थलों, कुंभ मेले और पर्यटन स्थलों में पर्यावरण और सेवा के प्रति संकल्प का भाव कैसे विकसित किया जा सकता है?

विश्वसनीयता और व्यावहारिक उपाय

उत्तर – मैं एक उदाहरण देता हूँ। अभी हाल ही के महाकुंभ मेले और पर्यटन स्थलों के संदर्भ में हमारे पर्यावरण गतिविधि विभाग ने “एक थाली, एक थैला” साथ लाने का आह्वान किया। उसे पूरे देश से बड़ा प्रतिसाद मिला और सभी अखाड़ों ने उसे स्वीकार कर लिया। ऐसा क्यों हुआ? क्योंकि जिन्होंने यह आह्वान किया, उनकी विश्वसनीयता (क्रेडिबिलिटी) थी और उनका सुझाव व्यावहारिक था, जो सबके मन की समस्या का समाधान करता था। इसलिए समाज में जो विश्वसनीय लोग हैं, उन्हें ऐसे व्यावहारिक उपायों के साथ हस्तक्षेप करना चाहिए।

गणेशोत्सव और सांस्कृतिक कार्यक्रम

जैसे महाराष्ट्र में गणेशोत्सव बड़े पैमाने पर मनाया जाता है। वहाँ विश्व हिंदू परिषद और अन्य संगठन लोगों को एकत्र कर राष्ट्र, संस्कृति और संस्कार से जुड़े कार्यक्रम करने का आग्रह करते हैं। यदि ऐसा नहीं होता तो केवल डीजे बजते हैं, दो बार आरती होती है और लोग प्रसाद खाने आते हैं। लेकिन अगर उसके साथ कुछ भाषण, प्रतियोगिताएँ और जागरूकता बढ़ाने वाले कार्यक्रम हों, तो उससे गुणवत्ता और समझदारी दोनों बढ़ती हैं। ऐसा हम अपने-अपने स्थान पर कर सकते हैं और करना चाहिए।

संस्कार और पुस्तिकाएँ

परिवारों को संस्कार देने के बारे में मैंने कल विस्तार से बताया है। इस कार्यक्रम की एक पुस्तिका भी प्रकाशित होगी, जो आपके पास पहुँच जाएगी। उसमें उत्तर मिल जाएगा। इसके अलावा बाहर पुस्तकों का स्टॉल होगा, वहाँ हमारे भाषणों की पुस्तकें उपलब्ध होंगी। उन्हें पढ़ने से भी यह बातें स्पष्ट होंगी।

नागरिक कर्तव्य और जागरण

अब नागरिक कर्तव्यों की बात करता हूँ। नागरिक कर्तव्य उदाहरण से बनते हैं। पहले जानकारी होनी चाहिए कि नागरिक कर्तव्य क्या हैं। हमारे संविधान में प्रीएम्बल (प्रस्तावना), नागरिक अधिकार, नागरिक कर्तव्य और राज्य के नीति निर्देशक तत्व — ये चार अध्याय हैं। इन्हें मिडिल स्कूल यानी पाँचवीं कक्षा से ही पढ़ाना चाहिए ताकि सभी छात्रों को इसकी जानकारी हो। साथ ही हमें भी इन कर्तव्यों को जानकर उनका पालन करना चाहिए, तभी नई पीढ़ी सीखेगी। यही जागरण है।

जागरण का वास्तविक माध्यम

जागरण केवल उपदेश से नहीं, बल्कि उदाहरण और आत्मीयता से होता है। आत्मीयता ही माध्यम है। यह विचार हृदय से हृदय तक जाना चाहिए। जो बोलने वाला है, उसे खुद भी करके दिखाना चाहिए। यह इतना बड़ा और कठिन न हो कि लोगों को डर लगे। कार्य करते समय बस इतना दिखना चाहिए कि हम सबके पाँच कदम आगे हैं, लेकिन अलौकिक नहीं। इस प्रकार धीरे-धीरे समाज में परिवर्तन आता है और सब बातें ठीक हो जाती हैं।

Topics: संघ समरसताRSSआरएसएसHindu society unityसामाजिक एकतासेवाजातिवादपाञ्चजन्य विशेषमोहन भागवतपंच परिवर्तनविज्ञान भवनसंघ शताब्दी वर्षनागरिक कर्तव्यपर्यावरणसमाज जागरणआरक्षण100 वर्ष की संघ यात्राडॉ. मोहन भागवत
Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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