पाकिस्तान में हिंदुओं के साथ जो व्यवहार होता है, वह किसी से छिपा नहीं है। उनका कन्वर्जन कर मुस्लिम बनाया जा रहा है, लेकिन यह समस्या केवल मतांतरण की नहीं है, बल्कि यह मामला है भारत को शत्रु साबित करने का। भारत शत्रु कैसे हो सकता है, क्योंकि भारत में हिन्दू हैं।
पाकिस्तान से Institute for Monitoring Peace and Cultural Tolerance in School Education (IMPACT-se) के द्वारा एक रिपोर्ट का प्रकाशन हुआ है, जो पाकिस्तान के राष्ट्रीय पाठ्यक्रम के विषय में तमाम तरह के प्रश्न उठाती है। इस रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि किताबों के माध्यम से विद्यार्थियों में भारत, इजरायल और यहूदियों के प्रति घृणा उत्पन्न की जाती है।
प्रश्न उठता है कि क्या कोई देश ऐसा कर सकता है कि पाठ्यक्रमों के माध्यम से दूसरे धर्म को पूरी तरह से शत्रु प्रमाणित कर दे? जब मजहबी पहचान पर किसी मुल्क का निर्माण होता है तो इसमें सत्ता के लिए आवश्यक होता है कि एक गैर-मजहबी दुश्मन बनाया जाए।
पाकिस्तान चूंकि भारत का ही अंग था और वहां अभी भारत की पहचान या कहें कि हिंदुओं की पहचान के निशान हैं, जो उन्हें लगातार यह बताते रहते हैं कि उनका इतिहास हिन्दू ही था। क्या उन्हें अपना हिन्दू से मुस्लिम कन्वर्जन उचित ठहराना है, इसलिए हिंदुओं को ही ऐसा खतरा बताया जाए कि जिससे मतांतरित होना आवश्यक था।
इस रिपोर्ट के अनुसार इस अध्ययन में पंजाब, सिंध और संघीय शिक्षा बोर्डों की 75 सरकारी-अनुमोदित पाठ्यपुस्तकें शामिल की गईं, जिनमें इस्लामी शिक्षा, इतिहास, सामाजिक विज्ञान, अंग्रेज़ी और उर्दू जैसे विषय शामिल हैं। IMPACT-se के अनुसार, ये पाठ्यपुस्तकें जिहाद को एक धार्मिक और नैतिक दायित्व के रूप में प्रस्तुत करती हैं, जबकि भारत को “शत्रु देश” के रूप में प्रस्तुत करती हैं।
विरोधाभास उत्पन्न करती रिपोर्ट
हैरानी की बात यह है कि इसके साथ ही इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पाकिस्तान एक इस्लामी मुल्क है और इसमें अल्पसंख्यकों को आजादी से रहने की अनुमति है और उन पर कोई अत्याचार नहीं होता है।
साथ ही इन पुस्तकों में दो मुल्कों वाले सिद्धांत का महिमामंडन किया गया है। यह सभी जानते हैं कि इस सिद्धांत को सबसे पहले सर सैयद अहमद खान ने प्रतिपादित किया था और बाद में मोहम्मद अली जिन्ना ने इसे आगे बढ़ाया। पाकिस्तान के निर्माण में अल्लामा इकबाल का नाम नहीं भूलना चाहिए, जिन्हें आज भी भारत में बहुत आदर से पढ़ा जाता है।
इसके साथ ही इन पुस्तकों में हिन्दू धर्म को बहुत ही नकारात्मकता के साथ दिखाया गया है। इसे पाकिस्तान के अस्तित्व के लिए खतरा बताया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार कहीं-कहीं हिंदू धर्म को सकारात्मक रूप से भी चित्रित किया गया है, इसे “प्रेम, सहिष्णुता, करुणा, त्याग और शांति” का धर्म बताया गया है। हालांकि, भारत के साथ विभाजन के संदर्भ में, हिंदुओं को मुख्यतः नकारात्मक रूप में चित्रित किया जाता है, विशेष रूप से मुसलमानों के विरुद्ध उग्रवाद और हिंसा के लिए।
पाकिस्तान का निर्माण ही मजहब के आधार पर हुआ है
पाकिस्तान का निर्माण मजहब के आधार पर हुआ है। उसने खुद ही मजहबी आधार पर हिंदुओं से अलग होना चुना था और अभी भी हिन्दू बहुल भारत ही उसका सबसे बड़ा दुश्मन है। उसका अस्तित्व ही हिन्दू घृणा पर टिका हुआ है।
इस रिपोर्ट में लिखा है कि कुछ मामलों में, पाठ्यपुस्तकों में भारत को जिहाद के माध्यम से मुसलमानों या इस्लाम के लिए खतरा बताया गया है। विशेष रूप से, कश्मीर संघर्ष को भारत की गलत हरकतों के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता है।
अशर जॉनसन खोखर के हवाले से यह लिखा है कि पाठ्यपुस्तकें कैसे “हम बनाम वे” मानसिकता के निर्माण में योगदान देती हैं। उनके शोध में पाया गया कि पाठ्यपुस्तकें, खासकर इतिहास, उर्दू और पाकिस्तान अध्ययन से संबंधित पाठ्यपुस्तकें, व्यवस्थित रूप से एक ऐसा आख्यान प्रस्तुत करती हैं, जिसमें मुसलमानों (खासकर मुहम्मद बिन कासिम के दौर के) को नायक के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, जबकि हिंदुओं और अन्य गैर-मुसलमानों को दुश्मन के रूप में चित्रित किया जाता है।
यहूदी विरोधी नैरेटिव
पाकिस्तानी पाठ्यपुस्तकों में यहूदियों के खिलाफ भी नकारात्मक दृष्टिकोण दिया गया है। इसका एक उदाहरण सिंध की पाँचवीं कक्षा की एक इस्लामी तालीम की किताब है, जिसमें दावा किया गया है कि यहूदियों ने पैगंबर ईसा (यीशु) और उनकी माँ को कष्ट पहुँचाया था। इसमें यहूदियों पर अपनी धार्मिक सत्ता बनाए रखने के लिए ईसा के खिलाफ साजिश रचने का भी आरोप लगाया गया है।
इस रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि ये तमाम प्रकरण बिना किसी ऐतिहासिक प्रमाणों या स्पष्टीकरण के दिए गए हैं और इससे बच्चों के दिलों में यहूदी इतिहास और पहचान के विषय में बहुत ही गलत अवधारणा का विकास होता है।
इसके साथ ही यह भी दिखाया गया है कि यहूदी समुदाय लगातार ही मदीना में पैगंबर मुहम्मद के समय से मुस्लिमों से लड़ाई करता हुआ आ रहा है।
इजरायल के खिलाफ मुस्लिम मोर्चा
यह रिपोर्ट यह भी कहती है कि कैसे पाकिस्तान मिडल ईस्ट देशों का सहयोग कर रहा है और इजरायल के खिलाफ एक संयुक्त मुस्लिम मोर्चा बनाने का प्रयास कर रहा है। पाकिस्तान में पाठ्यपुस्तकों के माध्यम से जो विष भरा जा रहा है, वह यह बताने के लिए पर्याप्त है कि पाकिस्तान की आम जनता या छोटे बच्चे क्यों भारत विरोधी या हिन्दू विरोधी बयान देते हैं। यह भी प्रश्न अनुत्तरित है कि अपनी ही जड़ों से पाकिस्तान को इतनी घृणा क्यों है?

















