रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा युद्ध है कि समाप्त होने का नाम ही नहीं ले रहा है। 24 घंटे में रूस और यूक्रेन के बीच शांति वार्ता करने का दंभ भरने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का भी उबाल अब ठंडा सा पड़ने लगा है। इस बीच एक चर्चा लगातार चल रही है कि शायद अब यूक्रेन भी नहीं चाहता है कि ये जंग रुके। इस बात की पुष्टि इस बात से भी हो रही है कि यूक्रेनी विदेश मंत्रालय ने एक बार फिर लॉन्ग रेंज मिसाइलों की मांग कर दी है।
रूसी न्यूज एजेंसी तास की रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन अब अपने यूरोपीय सहयोगियों और अमेरिका से लंबी दूरी की मिसाइल और पैसे मांग रहा है। ताकि वो सैन्य खर्च को बढ़ा सके। यूक्रेनी विदेश मंत्रालय ने फेसबुक पर एक पोस्ट के जरिए कहा कि हम अपने सहयोगियों से यूक्रेन को यूक्रेनी आकाश की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त वायु रक्षा बल, लंबी दूरी के हथियार और अतिरिक्त सैन्य सहायता पैकेज तुरंत उपलब्ध कराने का आह्वान करते हैं।
जबकि, पिछले महीने 24 अगस्त को ही ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट किया था कि वो रूस के अंदर तक मार करने में सक्षम अमेरिकी ATACMS सामरिक मिसाइलें यूक्रेन को नहीं देगा। यही प्रतिबंध यूरोपीय देशों के द्वारा यूक्रेन को दिए गए हथियारों पर भी लागू होता है। लेकिन जेलेंस्की चाहते हैं कि अब वो लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों से हमले करें।
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साढ़े तीन साल से चल रहा युद्ध
गौरतलब है कि रूस और यूक्रेन के बीच फरवरी 2022 में युद्ध शुरू हुआ था। उस दौरान इस युद्ध को शुरू करने के पीछे की वजह ये थी कि यूक्रेन पूरी शिद्दत के साथ नाटो में शामिल होना चाहता था। यूक्रेन को लगता था कि रूस ने उसके क्रीमिया पर कब्जा कर रखा है, लेकिन अगर वो नाटो में शामिल हो जाता है तो वह क्रीमिया को मुक्त करा सकता है। दूसरी ओर रूस नाटो को खतरा मानता है और उसने यूक्रेन से ऐसा नहीं करने को कहा। लेकिन कॉमेडियन राष्ट्रपति ने रूसी चेतावनी को हल्के में ले लिया।
लेकिन, जब यूक्रेन नहीं माना तो फरवरी 2022 में उसने मिलिट्री अभियान शुरू कर दिया। सभी को उम्मीद थी कि रूस जैसे महाबली के सामने यूक्रेन एक सप्ताह भी नहीं टिक पाएगा, लेकिन सभी की उम्मीदों के विपरीत यूक्रेन साढ़े तीन साल से रुस के सामने डटा हुआ है। न केवल वह लड़ रहा है, बल्कि रह-रहकर वह रूस पर हमले भी कर रहा है। रूस पर सबसे बड़ी चोट तो यूक्रेन एक सस्ते से ड्रोन अटैक से कर दी थी।
रूस यूक्रेन युद्ध क्यों नहीं हो रहा खत्म
इस युद्ध के खत्म नहीं हो पाने की बड़ी वजह ये है कि न तो पश्चिमी देश ये चाहते हैं कि युद्ध समाप्त हो औऱ न ही यूक्रेन। जियो पॉलिटिक्स के जानकारों का मानना है कि इस युद्ध को जारी रखने के लिए पश्चिमी यूक्रेन को भर-भर कर पैसा और हथियार दे रहे हैं। ऐसे में बिना कुछ किए ही यूक्रेन को भारी मात्रा में धन मिल रहा है, तो वो क्यों शांति स्थापना की ओर बढ़ेगा। इसके अलावा पश्चिमी देशों को इस बात का भी डर है कि अगर यूक्रेन का किला ढह गया तो कहीं अगला नंबर उनका न हो। इसीलिए भारी फंडिंग की जा रही है।
इसे इस तरह से भी समझा जा सकता है कि राष्ट्रपति बनने के बाद जब डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि वह डायरेक्ट रूस और यूक्रेन के बीच शांति स्थापित करने की कोशिश करेंगे तो ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी जैसे तमाम देश बिलबिला उठे थे। इन देशों ने स्पष्ट तौर पर कहा था कि उन्हें साथ लिए बिना ऐसा नहीं किया जा सकता है। वहीं अमेरिका की बात करें तो उसकी नजर यूक्रेन के रेयर अर्थ मिनरल्स पर टिकी हुई है। अपनी इस इच्छा को वह कई बार जाहिर भी कर चुके हैं।
बहरहाल, यूक्रेन अब एक बार फिर से अमेरिका और पश्चिमी देशों से लंबी दूरी की मिसाइलों की मांग कर रहा है। साथ ही वह मिलिट्री फंडिंग के नाम पर पैसे भी मांग रहा है।
















