100 वर्ष की संघ यात्रा LIVE : सरसंघचालक मोहन भागवत जी ने बताया भारत के विश्वगुरु बनने का सही समय
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100 वर्ष की संघ यात्रा LIVE : सरसंघचालक मोहन भागवत जी ने बताया भारत के विश्वगुरु बनने का सही समय

‘100 वर्ष की संघ यात्रा: नए क्षितिज’ कार्यक्रम में सरसंघचालक जी ने कहा- विश्व में अग्रणीय स्थान तो एक ही देश प्राप्त कर सकता है और विश्व में सैकड़ों देश हैं। इसके लिए कोई नई स्पर्धा उत्पन्न करनी है— ऐसा कोई इरादा नहीं है। पर उसके पीछे एक सत्य है।

Written byShivam DixitShivam Dixit
Aug 26, 2025, 07:09 pm IST
inभारत, संघ @100, दिल्ली
सरसंघचालक मोहन भागवत जी ने बताया भारत के विश्वगुरु बनने का सही समय

सरसंघचालक मोहन भागवत जी ने बताया भारत के विश्वगुरु बनने का सही समय

नई दिल्ली । दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का तीन दिवसीय संवाद कार्यक्रम ‘100 वर्ष की संघ यात्रा: नए क्षितिज’ के प्रथम दिवस में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संघ के सरसंघचालक जी ने कार्यक्रम के नाम के पीछे की बात करते हुए कहा- आज की व्याख्यान में संघ के बारे में मैं बताऊँगा। पिछली बार (2018 व्याख्यान) जो दो भाषणों में बताया गया था, उसे इस बार एक भाषण में बताऊँगा।

उन्होंने कहा- 100 साल की संघ की यात्रा हो रही है। क्यों हो रही है..? संघ चला आ रहा है, ऐसा नहीं है। संघ चलाने का एक उद्देश्य है और यही कारण है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ शुरू हुआ। इतनी सारी बाधाएँ आईं, फिर भी स्वयंसेवकों ने कठिन परिस्थितियों से रास्ता निकालकर इसे क्यों चलाया..? और 100 साल चलने के बाद भी नए क्षितिजों की बात क्यों की जा रही है..?

इसका उत्तर यदि एक वाक्य में देना हो तो वह वाक्य वही है, जो हम स्वयंसेवक रोज अपनी प्रार्थना के अंत में कहते हैं—“भारत माता की जय।”

उन्होंने कहा- अपना देश है, उसे जय-जयकार मिलनी चाहिए, उसे विश्व में अग्रणीय स्थान मिलना चाहिए। लेकिन अग्रणीय स्थान क्यों मिलना चाहिए..? अग्रणीय स्थान तो एक ही देश प्राप्त कर सकता है और विश्व में सैकड़ों देश हैं। इसके लिए कोई नई स्पर्धा उत्पन्न करनी है— ऐसा कोई इरादा नहीं है। पर उसके पीछे एक सत्य है।

उन्होंने कहा- दुनिया में इतने देश हैं, और अभी विश्व बहुत पास आ गया है। इसलिए अब ग्लोबल बात होती है, विश्व पास आ गया है, इसलिए ग्लोबल विचार करना ही पड़ता है। एक देश के बड़े होने का महत्व क्या है..? यद्यपि सारे विश्व का जीवन एक है, मानवता एक है, फिर भी वह एक जैसी नहीं है। उसके अलग-अलग रूप हैं, अलग-अलग रंग हैं। और ऐसा होने के कारण विश्व की सुंदरता बढ़ी है, क्योंकि हर एक रंग का अपना-अपना योगदान है।

उन्होंने कहा- विश्व के इतिहास को देखें तो स्वामी विवेकानंद का वह कथन स्मरण होता है—“Every nation has a mission to fulfil.” अर्थात प्रत्येक राष्ट्र का एक मिशन होता है, जो उसे दुनिया में पूरा करना होता है। प्रत्येक राष्ट्र का विश्व में कुछ योगदान होता है, जो समय-समय पर उसे करना होता है। वैसे ही भारत का भी अपना एक योगदान है।

सरसंघचालक जी ने बताया कि किसी देश को बड़ा होना है तो अपने बढ़कपन के लिए नहीं, बल्कि उसके बड़े होने से विश्व के आवश्यक जीवन में जो एक नई गति चाहिए, वह पैदा होती है। उसका उस प्रकार का योगदान होता है। इसलिए योगदान करने के लिए उसे बड़ा बनना है। और इसलिए संघ के निमित का प्रयोजन भारत है। संघ के चलने का प्रयोजन भारत है। और संघ का सार्थक भारत के विश्वगुरु बनने में है।

क्योंकि भारत का एक योगदान दुनिया में है, जो भारत को देना है—और उसका समय अब आ गया है।

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Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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