नई दिल्ली । दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का तीन दिवसीय संवाद कार्यक्रम ‘100 वर्ष की संघ यात्रा: नए क्षितिज’ के प्रथम दिवस में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संघ के सरसंघचालक जी ने कार्यक्रम के नाम के पीछे की बात करते हुए कहा- संघ को लेकर बहुत सारी चर्चाएँ होती रहती हैं, लेकिन अक्सर यह महसूस किया जाता है कि उन चर्चाओं में तथ्यात्मक जानकारी कम होती है। जो जानकारी सामने आती भी है, वह प्रामाणिक नहीं होती। ऐसे में आवश्यकता इस बात की है कि संघ के बारे में सही और तथ्य आधारित जानकारी लोगों तक पहुँचे। किस निष्कर्ष पर पहुँचना है, यह श्रोता या पाठक का अधिकार है—संघ का उद्देश्य किसी को कन्विंस करना नहीं, बल्कि सत्य को सामने रखना है।
उन्होंने कहा- इससे पहले भी वर्ष 2018 में इसी स्थान पर एक संवाद कार्यक्रम हुआ था। उस समय संवाद का उद्देश्य यही था कि संघ के बारे में वास्तविकता और तथ्य लोगों के सामने आएँ। वह संवाद अपेक्षाकृत बहुत सफल रहा और उसमें शामिल लोगों की कई शंकाएँ दूर हुईं। संघ के बारे में जानने के बाद वे भ्रम और पूर्वाग्रह, जिनका कोई ठोस कारण नहीं था, अपने आप समाप्त हो गए।
सरसंघचालक जी ने बताया कि अब जबकि संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूरे हो रहे हैं, शताब्दी समारोहों की रूपरेखा के तहत फिर से ऐसे संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। विचार हुआ कि देशभर में चार स्थानों पर इस प्रकार के आयोजन हों, ताकि अधिक लोग इसमें सीधे शामिल होकर सवाल-जवाब कर सकें। वर्ष 2018 के संवाद को मीडिया ने पूरे देश तक पहुँचाया था, और इस बार भी वही उद्देश्य है—संघ के बारे में तथ्यात्मक बातें साझा करना।
उन्होंने बताया कि इस बार विशेष बात यह है कि लगभग 70–75% नए लोगों को आमंत्रित किया गया है। कार्यक्रम में दो मुख्य व्याख्यान होंगे। आज के व्याख्यान में मैं संघ की मूल बातों और यात्रा के बारे में बताऊँगा, जो पिछली बार दो भाषणों में रखी गई थीं, उन्हें इस बार एक ही व्याख्यान में समाहित किया जाएगा।

















