राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) वर्ष 2025 में अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे करने जा रहा है। संघ ने इस खास मौके की तैयारी शुरू कर दी है। शताब्दी साल की शुरुआत 2 अक्टूबर को विजयादशमी पर होगी। इसके लिए 26 से 28 अगस्त तक दिल्ली में तीन दिन का कार्यक्रम होगा, जिसमें बातचीत और विचार-विमर्श किया जाएगा।
इस संवाद कार्यक्रम की जानकारी आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने सोमवार को दी। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम समाज के सभी वर्गों तक संघ की 100 वर्षों की यात्रा और अनुभवों को पहुँचाने का माध्यम बनेगा। कार्यक्रम में सरसंघचालक मोहन भागवत तीनों दिन भाग लेंगे और समाज के विभिन्न वर्गों की प्रमुख हस्तियों से संवाद करेंगे।
शताब्दी वर्ष के उद्देश्य- सुनील आंबेकर ने कहा कि आरएसएस ने बीते 100 वर्षों में देश के कई हिस्सों में सेवा कार्य, सामाजिक समरसता, राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक जागरण जैसे कार्य किए हैं। इन कार्यों के अनुभवों और विचारों को अब पूरे समाज के साथ साझा किया जाएगा। इस संवाद का उद्देश्य केवल संघ की उपलब्धियों को दिखाना नहीं है, बल्कि यह भी बताना है कि भविष्य में संघ किन कार्यों पर ध्यान देगा और समाज की भलाई के लिए क्या योजनाएँ हैं। कार्यक्रम में देश और विदेश की जानी-मानी हस्तियों को आमंत्रित किया गया है। इनमें शामिल हैं- पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, पूर्व राजदूत कंवल सिब्बल और अन्य कई पूर्व राजनयिक, पूर्व प्रशासनिक अधिकारी, डागर ब्रदर्स जैसे प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक, ओलंपिक विजेता अभिनव बिंद्रा और क्रिकेट के महान खिलाड़ी कपिल देव, नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी, प्रसिद्ध डॉक्टर नरेश त्रेहान। इसके अलावा, कला, संस्कृति, खेल, शिक्षा, धर्म और सामाजिक कार्यों से जुड़ी हुई कई और हस्तियाँ भी इस कार्यक्रम में शामिल होंगी। अब तक लगभग 1300 लोगों ने अपनी उपस्थिति की पुष्टि कर दी है।
संघ चाहता है कि यह संवाद केवल एक वर्ग तक सीमित न रहे, इसलिए हर धर्म, जाति और क्षेत्र से जुड़े लोगों को इसमें बुलाया गया है। संघ का मानना है कि समाज तभी आगे बढ़ सकता है जब सभी लोग साथ मिलकर काम करें और एक-दूसरे के विचारों को समझें। आरएसएस ने देश के लगभग सभी प्रमुख राजनीतिक दलों से संपर्क किया है और कई नेताओं ने इसमें आने की सहमति भी दी है। इसके अलावा, भारत में मौजूद दूसरे देशों के दूतावासों को भी आमंत्रित किया गया है। इनमें अमेरिका, चीन, कुवैत, कजाकिस्तान और नेपाल जैसे देशों के राजनयिक शामिल हैं। तीन दिनों के इस संवाद कार्यक्रम में अलग-अलग तरह की गतिविधियाँ होंगी- पहले दो दिन संघ की 100 वर्षों की यात्रा, कार्य और समाज में उसके योगदान पर प्रकाश डाला जाएगा। संघ के विचारों को कैसे समाज तक पहुँचाया जाए, इस पर चर्चा होगी। मोहन भागवत और संघ के वरिष्ठ नेता भविष्य की योजनाओं पर अपनी बात रखेंगे। तीसरे दिन विशेष अतिथि लोगों को संबोधित करेंगे और उनके सवालों के जवाब भी देंगे। इस पूरे कार्यक्रम का सीधा प्रसारण किया जाएगा, ताकि देशभर के लोग इसे देख सकें और संघ के विचारों को सीधे समझ सकें।
अन्य शहरों में भी कार्यक्रम- बेंगलुरु, कोलकाता और मुंबई जैसे बड़े शहरों में भी ऐसे ही कार्यक्रम होंगे, ताकि ज्यादा लोग संघ के विचार और काम को समझ सकें।
















