आईएनडीआईए गठबंधन ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया है। इसके बाद छत्तीसगढ़ में सलवा जुडूम आंदोलन को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। साल 2011 में जस्टिस रेड्डी ने सुप्रीम कोर्ट में एक फैसला सुनाया था, जिसमें उन्होंने सलवा जुडूम को असंवैधानिक करार दिया था। अब जब उन्हें उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया गया है, तो कई जनजातीय समाज और राजनीतिक दलों ने इस पर आपत्ति जताई है।
क्या था सलवा जुडूम– सलवा जुडूम आंदोलन की शुरुआत वर्ष 2005 में बस्तर क्षेत्र के आदिवासियों ने की थी। इसका उद्देश्य था माओवादियों द्वारा की जा रही जबरन भर्ती और हिंसा का विरोध करना। जल्द ही इस आंदोलन को छत्तीसगढ़ की तत्कालीन रमन सिंह सरकार और कांग्रेस नेता महेंद्र कर्मा का समर्थन भी मिला। महेंद्र कर्मा इस आंदोलन के प्रमुख चेहरा थे और उन्होंने खुलकर इसका समर्थन किया। लेकिन बाद में माओवादियों ने उनकी हत्या कर दी। दूसरी ओर, मानवाधिकार संगठनों ने सलवा जुडूम पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की और इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया। वर्ष 2011 में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी ने सलवा जुडूम को असंवैधानिक बताते हुए इसे बंद करने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि आम नागरिकों को हथियार देकर सुरक्षा बल के रूप में इस्तेमाल करना उचित नहीं है। इस फैसले को मानवाधिकार संगठनों ने सराहा, लेकिन कई आदिवासी संगठन और सुरक्षा नीति के समर्थकों ने इसकी आलोचना की। उनका मानना है कि इस फैसले से माओवादियों को फायदा मिला और आदिवासी क्षेत्रों में हिंसा बढ़ गई। अब जब कांग्रेस और आईएनडीआईए गठबंधन ने जस्टिस रेड्डी को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया है, तो बस्तर क्षेत्र के कई जनजातीय समाज नाराज हैं। उनका कहना है कि यह फैसला उन जनजातीय समाज के साथ अन्याय है जिन्होंने माओवादियों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी।
भाजपा का विरोध- भाजपा नेताओं ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की है। प्रदेश के गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट का फैसला नहीं आया होता, तो 2020 तक माओवादी हिंसा खत्म हो गई होती। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने वामपंथियों के दबाव में आकर ऐसा निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने भी सोशल मीडिया पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का एक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने कांग्रेस पर वामपंथी विचारधारा को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। शाह ने कहा कि रेड्डी के फैसले से माओवाद को समर्थन मिला।
कांग्रेस की सफाई- वहीं, कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को खारिज किया है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला पूरी तरह संवैधानिक था और कांग्रेस ने हमेशा आदिवासियों और लोकतांत्रिक मूल्यों का समर्थन किया है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस ने कभी सलवा जुडूम का विरोध नहीं किया, बल्कि यह आंदोलन सभी दलों का साझा प्रयास था।

















