किसी भी देश की पहचान उसकी धार्मिक संरचनाएं होती हैं। ये धार्मिक संरचनाएं उसकी जड़ों को बताती हैं कि उसकी संस्कृति की जड़ें कितनी गहरी हैं। वे उसकी जड़ों को बताती हैं। और यही कारण रहा कि भारत पर जितनी भी आक्रमण मुस्लिम आक्रान्ताओं ने किये, उन्होनें हर बार मंदिरों को ही तोड़ा, क्योंकि ये मंदिर भारत की आत्मा की बात करते थे।
पहचान का संकुचन और शेष प्राचीन मंदिर
और देखते ही देखते भारत की पहचान एक विशाल भूखंड से हटकर संकुचित हो गई है, फिर भी बांग्लादेश और पाकिस्तान में कुछ प्राचीन मंदिर शेष रह गए हैं, जो आज तक उनकी जड़ों की बातें करते हैं। मगर उसे वे मिटाना चाहते हैं। वे हर मूल्य पर उस पहचान को मिटाना चाहते हैं। अफगानिस्तान में बामियान बुद्ध को विस्फोटकों से उड़ा दिया गया था और वे अभी तक उस विध्वंस की याद दिलाते हैं।
धार्मिक पहचान पर अतिक्रमण
मगर कुछ विध्वंस अलग होते हैं। वे पहचान को जड़ों से ही नष्ट कर देना चाहते हैं। वे उसकी मूल पहचान पर अपना अतिक्रमण कर लेते हैं। जैसा कि कुतुबमीनार के साथ हुआ, जैसा अढ़ाई दिन के झोंपड़े के साथ हुआ। ऐसा ही अब बांग्लादेश में हो रहा है। बांग्लादेश के मंदिर अब पहचान के इसी अतिक्रमण के खतरे में है।
जिहादी तख्तापलट और हिंदुओं पर हमले
वर्ष 2024 में हुए जिहादी तख्तापलट का दुष्परिणाम अब सामने दिख रहा है। पहले हिंदुओं पर हमला और मतांतरण के समाचार सामने आए। अब उनकी धार्मिक पहचानों का रूपांतरण किया जा रहा है। और बांग्लादेश में इस अभियान के पीछे और कोई नहीं बल्कि पाकिस्तान की आईएसआई है।
शोएब चौधरी का खुलासा
बांग्लादेश के पत्रकार शोएब चौधरी ने पूरे षड्यन्त्र का खुलासा किया है। उन्होनें लिखा कि पिछले वर्ष के तख्तापलट से ही, बांग्लादेश में हिन्दू और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा है और विश्वसनीय खुफिया सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई, देश भर में प्राचीन हिंदू मंदिरों और पवित्र स्थलों के खिलाफ साजिश रचने के लिए लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) – एक घोषित वैश्विक आतंकवादी संगठन – का इस्तेमाल कर रही है। चिंताजनक बात यह है कि लश्कर और उसके सहयोगी जिहादी समूहों के सदस्य सार्वजनिक रूप से इन इरादों का बेशर्मी से ऐलान कर रहे हैं, जिससे बांग्लादेश के हिंदू समुदाय में व्यापक भय और गुस्सा फैल रहा है।
सीताकुंड पर्वत पर मस्जिद योजना
उन्होनें लिखा कि 16 अगस्त 2025 को एमएम सैफुल इस्लाम नामक एक इस्लामवादी ने अपने सत्यापित फेसबुक अकाउंट पर “सीताकुंड पर्वत की चोटी पर मस्जिद 90% पुष्टि” शीर्षक से पोस्ट किया। “उनके पोस्ट के अनुसार, इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए वे अपने तीन साथियों के साथ चटगाँव स्थित हत्जारी मदरसे – खिलाफत समर्थक हिफाज़त-ए-इस्लाम (HeI) के मुख्यालय – गए, जहाँ उनकी मुलाक़ात लश्कर-ए-तैयबा और हरकत-उल-जिहाद अल-इस्लामी (HuJI-B) से जुड़े एक वरिष्ठ नेता मुफ़्ती हारुन इज़हार से हुई। दिवंगत मुफ़्ती इज़हारुल इस्लाम के बेटे हारुन इज़हार को अवामी लीग के शासनकाल में 2013 से 2019 तक जिहादी हमलों की लहर के दौरान उग्रवाद में शामिल होने के आरोप में कई बार गिरफ़्तार किया गया था, जिसमें धर्मनिरपेक्षतावादियों, विदेशियों और पुलिस अधिकारियों की लक्षित हत्याएँ शामिल थीं।“
चन्द्रनाथ मंदिर का महत्व
चन्द्रनाथ मंदिर एक पवित्र शक्ति पीठ है, जो समुद्र तट से 1000 फुट की ऊंचाई पर है और ऐसा माना जाता है कि यहीं पर माता सती की दाहिनी भुजा गिरी थी। तख्तापलट के बाद इस मजहबी षड्यन्त्र का सबसे बड़ा निशाना 11वीं शताब्दी का सीताकुंड चंद्रनाथ धाम है जो दक्षिण एशिया में हिंदुओं और बौद्धों के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में से एक है। हर फरवरी में, शिव चतुर्दशी के अवसर पर यहाँ हज़ारों लोग एकत्रित होते हैं।
हिंदुओं को अपमानित करने की साजिश
शोएब चौधरी के अनुसार ऐसा नहीं है कि केवल धार्मिक पहचान पर अतिक्रमण ही जिहादी तत्वों का एकमात्र उद्देश्य है, वे कई प्रकार से हमला कर रहे हैं। वे उसे पूरी तरह से कब्जाना चाहते हैं। वे लगातार और भी भड़काऊ हरकतें कर रहे हैं। जैसे मंदिर परिसर में “बीफ़ बारबेक्यू पार्टियों” की योजना बनाना, हिंदू तीर्थयात्रियों पर बीफ़-बिरयानी के पैकेट फेंकना और हिंदू महिलाओं को परेशान करना। ये हरकतें जानबूझकर हिंदुओं को अपमानित करने और उनकी पवित्र परंपराओं का अपमान करने के लिए की जाती हैं।
आईएसआई के और निशाने
पाकिस्तानी आईएसआई की योजनाएँ सीताकुंड से भी आगे जाती हैं। उसके और शिकारों में चटगाँव में मेधास मुनि आश्रम, बंदरबन जिले में स्वर्ण मंदिर और कॉक्स बाज़ार के महेशखली में आदिनाथ मंदिर शामिल हैं – ये सभी प्राचीन और पवित्र हिंदू स्थल दक्षिण एशिया की आध्यात्मिक विरासत को गहरे समेटे हुए हैं।
आईएसआई का आतंकी नेटवर्क
उन्होनें यह भी लिखा कि आईएसआई आखिर यह सब कैसे कर रही है। उन्होनें लिखा कि एक वरिष्ठ खुफिया सूत्र के अनुसार, 2022 से, आईएसआई रोहिंग्याओं और बिहारियों (फंसे हुए पाकिस्तानियों) को आतंकवादी ब्रिगेड बनाने के लिए आक्रामक रूप से भर्ती कर रही है : “अराकान आर्मी” (रोहिंग्याओं से बनी) और “मोहाजिर रेजिमेंट” (बिहारियों से बनी)। फिर इन रंगरूटों को अल-कायदा की निगरानी में गुरिल्ला युद्ध के लिए नेपाल और पाकिस्तान के प्रशिक्षण शिविरों में भेजा जाता है।
बांग्लादेश की बिगड़ती स्थिति
तख्तापलट के बाद से ही स्थितियाँ और बिगड़ी हुई हैं। शोएब लिखते हैं कि पाकिस्तान को आतंक को संरक्षण देने वाले देश के रूप में जाना जाता है। जहां यूएई, कुवैत और सऊदी जैसे देश पाकिस्तान के वीजा को लेकर तमाम तरह के प्रतिबंध लगाए हुए हैं, तो वहीं यूनुस ने पाकिस्तान के स्वागत के लिए पलक पाँवड़े बिछा रखे हैं।
हथियार और नशे की तस्करी
वह पाकिस्तानी शिपमेंट को अनुवारी सुरक्षा जांच से भी मुक्त आकर चुके हैं। और इसके कारण अब बांग्लादेश में हथियार, विस्फोटकों और नशीले पदार्थों की तस्करी आरंभ हो गई है।
जिहादी पैटर्न का निरंतरता
बांग्लादेश में जो भी हो रहा है, वह अब पूरी तरह से वही हो रहा है जो सदियों से जिहादी करते हुए आए हैं, कुतुबमीनार से लेकर सीताकुंड तक पहचान पर अतिक्रमण जारी है।











