गत दिनों नागपुर के रेशिमबाग स्थित स्मृति मंदिर परिसर में भारतीय किसान संघ की दो दिवसीय अखिल भारतीय प्रबंध समिति बैठक संपन्न हुई। भारतीय किसान संघ के महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्र ने बताया कि देश भर के 37 प्रांतों से आए किसान संघ के पदाधिकारियों के साथ संगठनात्मक, आंदोलनात्मक, रचनात्मक एवं संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त विषयों के साथ ही संगठन के विस्तार की कार्य—योजना पर चर्चा की गई।
इसके साथ ही 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में ‘स्वस्थ भारत, पोषक भारत’ के लिए ‘गो-कृषि वाणिज्यम्’ को आधार बनाकर देश के आम जनमानस को स्वास्थ्यवर्धक, पोषणयुक्त और जहरमुक्त खाद्य उपलब्ध हो तथा देश के विकास की प्रक्रिया में कृषि व किसान हित प्रभावित न हों, इस दृष्टि से भूमि अधिग्रहण कानून किसान हितैषी बने, इन दो विषयों पर चर्चा के उपरांत प्रस्ताव पारित कर सरकार को सुझाव भेजे गए।
बैठक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख श्री रामलाल का बौद्विक व समापन सत्र में किसान संघ के अखिल भारतीय संगठन मंत्री श्री दिनेश कुलकर्णी का मार्गदर्शन मिला।
बैठक में दो दिन तक चले मंथन के बाद घातक कीटनाशक, खरपतवार नाशक, जैव उत्तेजक और हॉर्मोन उत्पादों के कारण हमारे अधिकांश खाद्यान्न जहरयुक्त होने पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई। विभिन्न शोधों से प्राप्त जानकारी के अनुसार अल्जाइमर, कैंसर, चर्म रोग, स्तन कैंसर व श्वास से संबंधित बीमारियों का प्रमुख कारण रासायनिक खेती का प्रभाव है।
हमारे प्रमुख खाद्यान्नों में पिछले 50 वर्ष में 45 प्रतिशत तक पोषण मूल्य की गिरावट दर्ज हुई है। साथ ही कृषि लागत एवं मूल्य आयोग के अनुसार किसानों की कृषि उत्पादन लागत आय के अनुपात में तेजी से बढ़ रही है। इसके लिए वर्तमान में प्रचलित बाजार आधारित कृषि पद्धति जिम्मेदार है। यह सब कृषि क्षेत्र व किसानी के लिए शुभ संकेत नहीं हैं।
श्री मोहिनी मोहन मिश्र ने स्वास्थ्यवर्धक, पोषणयुक्त और जहरमुक्त खाद्य को लेकर पारित प्रस्ताव के संबंध में बताया कि भारतीय किसान संघ ने प्रस्ताव के माध्यम से देश के किसानों से आह्वान किया है कि ‘गो कृषि वाणिज्यम्’ पद्धति को व्यापक स्तर पर अपनाएं, जिससे देश के नागरिकों को रसायनमुक्त व जहरमुक्त कृषि उत्पाद उपलब्ध हो सकें।
देश के नीति निर्धारक ‘गो कृषि वाणिज्यम्’ पद्धति को 5 वर्ष की समयावधि में केंद्र व राज्य सरकारों के माध्यम से व्यापक, व्यावहारिक व सुदृढ़ व्यवस्था लागू करें।

















