राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने गत 12 अगस्त को कहा, ‘‘भारत दुनिया में धर्म देने वाला और विश्व का कल्याण चाहने वाला देश है। यहां वेदों में सभी शास्त्र निहित हैं, ऋ षियों की तपस्या से राष्ट्र में बल और ओज का संचार हुआ है।’’
श्री भागवत सीकर जिले में श्री जानकीनाथ बड़ा मंदिर, रैवासा धाम में ब्रह्मलीन पूज्य रेवासा पीठाधीश्वर स्वामी राघवाचार्य वेदांती महाराज की प्रथम पुण्यतिथि पर आयोजित ‘श्री सियपिय मिलन समारोह’ को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने इस अवसर पर स्वामी राघवाचार्य की तीन फीट ऊंची संगमरमर की प्रतिमा का अनावरण और नव-निर्मित गुरुकुल भवन का लोकार्पण किया। सरसंघचालक ने कहा कि इतिहास ने भी जब आंखें नहीं खोली थीं, तब से भारतवर्ष और भारत का हिंदू समाज विश्व को सत्य, धर्म और अध्यात्म का मार्ग दिखाने और मानवता के कल्याण का कार्य कर रहा है।
सनातन काल से ऐसी ही रीति चल रही है। कई उतार-चढ़ाव आए। कभी हम स्वतंत्र रहे, कभी वैभव संपन्न रहे। कभी हम दरिद्र हो गए, कभी हम परतंत्र हो गए। फिर भी यह काम लगातार चलता रहा।
जब-जब दुनिया को विशेष रूप से इसकी आवश्यकता पड़ती है, तब भारत का उत्थान होता है। अगर स्वतंत्रता के बाद का हमारा इतिहास देखें तो इतिहास के आधार पर कोई यह तर्क नहीं कर सकता कि भारतवर्ष उठेगा, लेकिन भारतवर्ष उठ रहा है। विश्व में अपना स्थान बना रहा है।
उन्होंने कहा कि सत्य एक ही है, वही विश्वरूप है और वही विविध रूप में दिखाई देता है। मिथ्या कुछ समय तक ही चलता है, बाद में सब एक ही में विलीन हो जाता है। उन्होंने राघवाचार्य जी का स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने संस्कृत और संस्कृति के उत्थान के लिए उल्लेखनीय कार्य किया।
















