मराठा साम्राज्य का 18वीं शताब्दी में विस्तार करने वाले प्रसिद्ध मराठा सेनापति रघुजी भोंसले की प्रतिष्ठित तलवार 200 साल बाद 18 अगस्त को लंदन से मुंबई वापस लाई जाएगी। नागपुर के भोसले घराने के संस्थापक और छत्रपति शाहू महाराज के काल में मराठा सेनापति रघुजी भोसले की तलवार को महाराष्ट्र सरकार ने इस साल की शुरुआत में लंदन की नीलामी में 47.15 लाख रुपये में खरीदा था। यह राज्य की सबसे महत्वपूर्ण सांस्कृतिक विरासत में से एक है।
आशीष शेलार तलवार लेने लंदन गए
दरअसल, लंदन में इस ऐतिहासिक तलवार के नीलामी की खबर महाराष्ट्र सरकार को 28 अप्रैल 2025 को मिली, जिससे पूरे राज्य में उत्सुकता की लहर दौड़ पड़ी। सांस्कृतिक कार्यमंत्री आशीष शेलार ने तुरंत मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से इस मामले पर चर्चा की, जिसके बाद तलवार को कब्जे में लेने की योजना बनाई गई। मुख्यमंत्री ने नीलामी में शामिल होने के लिए सरकार की ओर से शेलार को भेजा।
‘मराठों की बहादुरी का प्रतीक है यह तलवार’
सांस्कृतिक कार्यमंत्री आशीष शेलार ने इसे महाराष्ट्र के लिए गर्व का दिन बताया है। उन्होंने कहा कि छत्रपति शाहू महाराज के समय के मराठा योद्धा रघुजी भोसले की ऐतिहासिक तलवार लंदन से वापस आ रही है। यह महाराष्ट्र के लिए एक ऐतिहासिक जीत है। तलवार मराठों की बहादुरी, कूटनीति और भव्यता का प्रतीक है। यह पहली बार है, जब हमने नीलामी के माध्यम से विदेश से ऐसी ऐतिहासिक धरोहर को वापस पाया है।
‘गढ़ गर्जना’ कार्यक्रम में होगा अनावरण
लंदन में सभी जरूरी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद तलवार को सोमवार (18 अगस्त) सुबह मुंबई के छत्रपति शिवाजी हवाई अड्डे से बाइक रैली निकालकर बैंड बाजे के साथ दादर स्थित पीएल देशपांडे कला अकादमी में लाया जाएगा। उसी शाम अधिकारियों और मान्यवरों की मौजूदगी में ‘गढ़ गर्जना’ कार्यक्रम के दौरान इसका अनावरण किया जाएगा।
जानें क्या है इसकी खासियत
यह तलवार छत्रपति शिवाजी महाराज के वाघ नख के बाद राज्य द्वारा स्वदेश वापस लाई गई दूसरी प्रमुख कलाकृति है। वाघ नख को नागपुर के केंद्रीय संग्रहालय में रखा गया है। रघुजी भोसले की तलवार मराठा ‘फिरंग’ शैली की है। यूरोपीय निर्मित तलवार सीधी और एकधारी धार वाली है। धार के पीछे, नीचे की ओर स्वर्ण-अंकित देवनागरी लिपि में ‘श्रीमंत राघोजी भोसले सेनासाहिबसुभा फिरंग’ लिखा है। तलवार की मूठ पर बारीक ‘कोफ्तगरी’ का काम है, जबकि मूठ हरे कपड़े में लिपटी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह 1817 के सीताबर्डी युद्ध के बाद अंग्रेजों द्वारा नागपुर के खजाने पर कब्जा करने के दौरान भारत से बाहर गई होगी। मध्यकालीन भारत के उच्च वर्गों में यूरोपीय निर्मित धारें काफी लोकप्रिय थीं।
रघुजी भोसले ने मराठा साम्राज्य का विस्तार किया
रघुजी भोसले प्रथम ने 1745 और 1755 में बंगाल के नवाबों के विरुद्ध युद्ध अभियानों का नेतृत्व किया और मराठा साम्राज्य का बंगाल, ओडिशा तक विस्तार किया। रघुजी ने अपने शासनकाल में चंदा, छत्तीसगढ़ और संबलपुर के क्षेत्रों पर अपना वर्चस्व स्थापित किया। इसके साथ ही उन्होंने दक्षिण भारत में कुडप्पा के नवाब, कुरनूल के नवाब को भी पराजित किया और दक्षिण भारत में अपना दबदबा बनाया।

















