विश्व संस्कृत दिवस: क्या आप जानते हैं संस्कृत आज क्यों जरूरी है?
September 23, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

विश्व संस्कृत दिवस: क्या आप जानते हैं संस्कृत आज क्यों जरूरी है?

‘संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, भारत की सनातन आत्मा की अभिव्यक्ति है’ कहते हैं तो उसमें निहित सत्य हमें भारतीय इतिहास, वेदों की परंपरा, परिष्कृत ज्ञान-विज्ञान और विश्व को दिए गए अमर संदेश की याद दिलाता है।

Written byयोगेश कुमार गोयलयोगेश कुमार गोयल
Aug 9, 2025, 09:18 am IST
inभारत
Importance of Sanskrit Language

Importance of Sanskrit Language

भारतीय संस्कृति की धड़कन और सभ्यता के मूल में समाई संस्कृत केवल संचार का माध्यम नहीं बल्कि सनातन सृष्टि का आधार है। जब हम ‘संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, भारत की सनातन आत्मा की अभिव्यक्ति है’ कहते हैं तो उसमें निहित सत्य हमें भारतीय इतिहास, वेदों की परंपरा, परिष्कृत ज्ञान-विज्ञान और विश्व को दिए गए अमर संदेश की याद दिलाता है। विश्व संस्कृत दिवस, जो इस वर्ष 9 अगस्त को मनाया जा रहा है, इसी सनातन आत्मा के उद्भव, विस्तार और पुनरुद्धार का संकल्प है। यह दिन हमसे यह आग्रह करता है कि हम संस्कृत को केवल स्मृतियों में कैद न करें बल्कि व्यवहार का अंग बनाएं ताकि यह देवभाषा पुनः भारत की सांस्कृतिक पहचान का गौरव बने।

संस्कृत का उदय और वैश्विक संस्कृति पर प्रभाव

संस्कृत का प्राचीन इतिहास हमें लगभग 3,500 वर्ष पूर्व तक ले जाता है। वैदिक सभ्यता के निर्माण काल में इसकी ध्वनि गूंजती थी। ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद, उपनिषद, ब्राह्मण, आरण्यक, स्मृति, पुराण, महाकाव्य, नाटक, अलंकार, इन सबका मूल आधार संस्कृत ही रही है। संस्कृत की उच्च स्थिति केवल भारत तक ही सीमित नहीं रही बल्कि यह प्राचीन काल में दक्षिण एशिया, पूर्वी एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और मध्य एशिया के अभिजात्य वर्ग, शासन, दर्शन और साहित्य की भी भाषा बनी। संस्कृत के बिना भारत का दर्शन, काव्य, तंत्र, विज्ञान, चिकित्सा, गणित, नीतिशास्त्र, व्याकरण, सभी शून्य हो जाता। संस्कृत भाषाई विकास की जननी मानी जाती है, जिससे देश की अनेक बोलियों, भाषाओं ने जन्म लिया।

वैदिक ज्ञान, दर्शन और विज्ञान में संस्कृत का अवदान

संस्कृत का सबसे बड़ा योगदान वेद और वेदांगों के माध्यम से हुआ। ऋषि-मुनियों द्वारा रचित वेद केवल धार्मिक या आध्यात्मिक ग्रंथ नहीं बल्कि समाजशास्त्र, ज्योतिष, आयुर्वेद, गणित, राजनीति, मंत्रशास्त्र, खगोल, वनस्पति, भौतिक विज्ञान जैसी अनेक शास्त्रशाखाओं की वैज्ञानिक दृष्टि से व्याख्या करते हैं। कणाद के परमाणुवाद से लेकर चरक-सुश्रुत के आयुर्वेद, पिंगल के छंदशास्त्र, पतंजलि के योगसूत्र, भास्कराचार्य के गणित, आर्यभट्ट के खगोल, पाणिनि के व्याकरण, सब विद्वत्ता इसी भाषा की कोख से जन्मी। संस्कृत न केवल बौद्धिक चिंतन की भाषा थी बल्कि संवाद और स्वतंत्र चिंतन को भी प्रोत्साहित करती थी।

संस्कृत का साहित्यिक सौंदर्य

संस्कृत साहित्य में काव्य शैली, नाटक, गद्य, कथा, उपन्यास, अलंकार, दोहे, गीत, भजन, श्लोक, हर विधा में असंख्य ग्रंथ हैं। कालिदास, भवभूति, बाणभट्ट, आद्यशंकराचार्य, माघ, श्रीहर्ष, जयदेव, भारवि, नागार्जुन, विष्णु शर्मा, भर्तृहरि, दंडी, भवभूति, ये सब संस्कृत साहित्य के मनीषी और महानायक रहे। संस्कृत काव्यशास्त्र (अलंकार-शास्त्र) और नाट्यशास्त्र (भरतमुनि) ने विश्वभर में अपनी अलग छाप छोड़ी। संस्कृत का साहित्य न केवल भाषा का सौंदर्य बोध देता है बल्कि समाज, संस्कृति, राजनीति, भौगोलिक दृष्टिकोण, आचार-विचार, आध्यात्मिकता तथा मानवता के परिष्कार का शाश्वत चिंतन भी प्रस्तुत करता है।

संस्कृत का वैश्विक पुनरुद्धार

यह कहना उचित होगा कि संस्कृत, जो कभी केवल मंदिरों, यज्ञों या विद्वानों तक सीमित थी, आज फिर से भारतीय और वैश्विक मंचों पर नई पहचान बना रही है। कर्नाटक के मत्तूर, होसाहल्ली, झिरी (राजस्थान), सासन, गनोड़ा (गुजरात), पथरी (मध्य प्रदेश), कोशावल्ली (कर्नाटक) और देश के अन्य गांवों में संस्कृत जीवन का अंग है। मत्तूर और होसाहल्ली जैसे गांवों में तो दैनिक व्यवहार, शिक्षा, पूजा-पाठ, यहां तक कि छोटे व्यापार भी संस्कृत में होते हैं। इसके परे, जर्मनी, अमेरिका, रूस, स्विट्जरलैंड आदि देशों के विश्वविद्यालयों में संस्कृत पढ़ाई जा रही है। अमेरिका में संस्कृत हेतु विश्वविद्यालय भी स्थापित है और विश्वभर में संस्कृत से जुड़े शोध, जागरण व प्रशिक्षण कार्यक्रम चल रहे हैं।

तकनीक, शिक्षा एवं नवाचार में संस्कृत

संस्कृत की वैज्ञानिक संरचना इसे कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), मशीन लर्निंग, भाषाविज्ञान, मनोविज्ञान, संगणक विज्ञान, मशीनी अनुवाद जैसे क्षेत्रों में भी उपयुक्त बना रही है। नासा, अमेरिकी विश्वविद्यालय तथा भारत के कम्प्यूटर वैज्ञानिक संस्कृत-आधारित डेटा प्रोसेसिंग और कृत्रिम मेधा के लिए इसकी व्याकरणिक संरचना पर शोध कर रहे हैं। आज भारत के विद्यालयों तथा अनेक निजी संस्थानों में संस्कृत विषय को पुनरीक्षण, सामाजिक व्यवहार, संगीत, योग आदि से भी जोड़ा जा रहा है। स्कूलों में ‘संस्कृत संभाषण’ एवं ‘संस्कृत संवाद’ कार्यक्रम आधुनिक व्यवस्था के केंद्र में हैं।

संस्कृत दिवस का आधुनिक महत्व

विश्व संस्कृत दिवस केवल एक सांस्कृतिक अवसर नहीं, भारतीय अस्मिता की पुनः स्थापना का प्रयत्न है। इसका मुख्य उद्देश्य आभार प्रकट करना, नई पीढ़ी को संस्कृत के महत्व से परिचित कराना, व्यावहारिक व्यवहार में इसे स्थान देना, अनुसंधान को प्रोत्साहित करना और जन-जागरण के माध्यम से संस्कृत को भविष्य की भाषा बनाना है। यह दिवस उन ऋषियों को भी सम्मानित करता है, जिन्होंने वेदों की रचना की और सनातन संस्कृति का मार्ग प्रशस्त किया। संस्कृत दिवस विभिन्न कार्यक्रमों, संगोष्ठियों, संवाद, लेखन, संगीत, नाटक, श्लोक पाठ, वाद-विवाद, प्रतियोगिताओं के द्वारा बच्चों, युवाओं, बुजुर्गों में संस्कृत के प्रति चेतना का संचार करता है।

भारतीय संविधान और सरकारी प्रयत्न

संस्कृत को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान प्राप्त है और उत्तराखण्ड ने इसे अपनी राजकीय भाषा घोषित किया। सरकारी, गैर-सरकारी संस्थाएं, संस्कृत भारती, भारत सरकार की संस्कृत भारती अकादमी, नव्यशास्त्र परिषद, विश्व संस्कृत संगठन, एनसीईआरटी, यूजीसी, सीबीएसई तथा राज्य शिक्षा बोर्ड, सबने मिलकर इसके प्रसार हेतु पाठ्यक्रम, प्रशिक्षण, अनुवाद, पुरस्कार, सम्मेलन, प्रकाशन, परीक्षा इत्यादि की संरचना की है।

वर्तमान चुनौतियां और संभावनाएं

वैश्वीकरण, उपयोगितावाद, अंग्रेजियत, शिक्षा पद्धति की खामियां, रोजगार की प्राथमिकता, परिवार-सामाजिक परिवेश तथा तकनीक के विस्तार ने संस्कृत की सहज लोकप्रियता को सीमित किया है। विद्यालयों से लेकर उच्च संस्थानों तक, संस्कृत की पढ़ाई एक वैकल्पिक विषय के तौर पर ही होती है। यह मिथक है कि संस्कृत केवल पूजाघरों, श्लोकों अथवा मंत्रोच्चार में ही सीमित है, वस्तुतः संस्कृत का केवल 5 प्रतिशत साहित्य ही धर्म से संबंधित है, शेष 95 प्रतिशत दर्शन, काव्य, विज्ञान, आचार्य, शास्त्र, भाषाशास्त्र, न्याय, समाजचिंतन आदि से जुड़ा है। यदि हम अपनी शिक्षा, समाज, तकनीक, जीवनशैली में संस्कृत को केवल एक विषय न मानकर व्यवहार का अंग बनाएं, संवाद, अभिव्यक्ति और तकनीकी नवाचार के जरिये संस्कृत को पुनर्जीवन दें तो यह भाषा समकालीन भारत की आत्मा बन सकती है। तकनीकी इनोवेशन, डिजिटल लाइब्रेरी, संस्कृत में पॉडकास्ट, एप, सोशल मीडिया अभियान, ऑनलाइन प्रशिक्षण, व्यावसायिक संवाद, ऐसे सभी नव तरीकों को व्यवहार में लाकर हम संस्कृत को फिर से दैनिक जीवन का भाग बना सकते हैं।

सनातन से समकालीनता की यात्रा

संस्कृत की यात्रा विचार, ज्ञान, कला, साहित्य, विज्ञान, अध्यात्म, दर्शन, संस्कृति, हर क्षेत्र से होकर गुजरती है। सतत प्रवाहमान, वैज्ञानिक, सौंदर्यपूर्ण, परिष्कृत और मंथनशील संस्कृत भारत के अतीत, वर्तमान और भावी संस्कृति को जोड़ने वाली जीवंत कड़ी है। केवल वृद्धों, विद्वानों या पुरोहितों की धरोहर न रहकर यह आज युवा पीढ़ी की ऊर्जा, नूतन भारत की प्रेरणा और विश्व की चेतना का माध्यम बन सकती है। इस यात्रा में प्रत्येक व्यक्ति, संस्थान, समाज, सरकार, वैश्विक मंच, तकनीकी समुदाय, शिक्षक, विद्यार्थी, अभिभावक, और संस्कृत प्रेमी, सबका उत्तरदायित्व है कि वे केवल सांस्कृतिक गौरव की बात कर संतुष्ट न रहें बल्कि संस्कृत को व्यवहार, शिक्षा, संवाद, नवाचार की धारा में उतारें। जब भारतवासी और विश्ववासी इसे पुनः अपना लेंगे, तब संस्कृत पुनः युगों तक भारत की सनातन आत्मा का घोष बन जाएगी।

Topics: Importance of Sanskrit languageपाञ्चजन्य विशेषसंस्कृत और विज्ञानसंस्कृत दिवस 2025संस्कृत भाषा का महत्वसंस्कृत का इतिहाससंस्कृत का वैश्विक प्रभावसंस्कृत और आधुनिक पीढ़ीSanskrit Day 2025History of Sanskritभारतीय संस्कृतिGlobal Impact of Sanskrit
Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ सिर्फ स्मारक नहीं, एकता और विकास की जीवंत अभिव्यक्ति’

साबरमती संवाद-2026 : ‘युवा अपनी क्षमता को पहचानें’

परिंदु भगत (काकू भाई) प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता ‘साबरमती संवाद’ के दौरान पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर से बातचीत

‘ऐसे शुरू हुआ गुजरात में संघ कार्य’

साबरमती संवाद में हसमुख अढ़िया से अनुराग पुनेठा बातचीत करते हुए

साबरमती संवाद-2026 : ‘कर्मयोग की भावना से हर काम करें’

हल्द्वानी में राहुल गांधी को जवाब देती जनता

जवाब देती जनता

प्रख्यात चिंतक राम माधव

‘बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत की नई भूमिका’

Load More

ताज़ा समाचार

president droupadi murmu 72nd national film awards

कलाकार स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पदार्थों का समर्थन न करें: 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में बोलीं राष्ट्रपति मुर्मू

nanda sunanda mahotsav nainital cm dhami 2026

नैनीताल में नंदा-सुनंदा महोत्सव में पहुंचे CM धामी, बोले- ‘विकास भी और विरासत भी’ के मंत्र से आगे बढ़ रहा उत्तराखंड

nitin nabin saharanpur visit bjp mission 2027

जो यूपी कभी माफिया के लिए बदनाम था, वो आज वैश्विक पहचान बना रहा है : नितिन नबीन

Dehradun Pachhwa Doon Government Land Illegal Religious Structures Encroachment DM Ashish Chauhan Panchjanya

UNGA में पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ का बेतुका बयान, बोले- ‘अगर हमने न रोका होता, तो न्यूयॉर्क-लंदन में घूमते आतंकी’

Dehradun Pachhwa Doon Government Land Illegal Religious Structures Encroachment DM Ashish Chauhan Panchjanya

उत्तराखंड : सरकारी जमीनों पर कब्जे कर बने मस्जिद-मदरसे और ईदगाह, खामोश रहा प्रशासन

RSS Prabhat Gram Workshop Chittorgarh Sah Sarkaryavah Alok Kumar Panchjanya

“गांवों का विकास और जैविक खेती समय की मांग”: चित्तौड़गढ़ में सह सरकार्यवाह आलोक कुमार जी ने दिया विशेष मंत्र

वारेन में बढ़ रही मुस्लिमों की संख्या

मिशिगन को क्यों डरा रहा Dearborn का जिन्न?

साबरमती संवाद में क्रीड़ा भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री प्रसाद महानकर से खेल के आयामों पर पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर बातचीत करते हुए

‘जिससे हारे, उसे गले लगाना ही खेल-धर्म है’

Dehradun MBBS Admission Fake Certificate Fraud SIT Arrests Rupesh Pandit Arvind Kumar Panchjanya

देहरादून MBBS एडमिशन फर्जीवाड़ा: SIT ने 2 मुख्य आरोपियों को किया गिरफ्तार, 20-20 लाख में दिलाया दाखिला!

कल का मौसम: 23 सितंबर को 17 राज्यों में भारी बारिश, 70 की रफ्तार से चलेगी हवा; IMD का अलर्ट

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies