भारत अब सीमाओं तक सीमित नहीं है बल्कि रणनीति, तकनीक और नेतृत्व में विश्वगुरु बनने की ओर अग्रसर है। ऑपरेशन सिंदूर केवल सैन्य कार्रवाही नहीं, भारत की संकल्पशक्ति का प्रमाण है। जब मैं विजयोत्सव की बात करता हूं, तो 140 करोड़ भारतीयों की एकता, इच्छा शक्ति उसके प्रति जीत के विजयोत्सव की बात करता हूं। मैं इसी विजयी भाव से इस सदन में भारत का पक्ष रखने के लिए खड़ा हुआ हूं और जिन्हें भारत का पक्ष नहीं दिखता है, उन्हें मैं आईना दिखाने के लिए खड़ा हुआ हूं। मैं 140 करोड़ देशवासियों की भावनाओं में अपना स्वर मिलाने के लिए उपस्थित हुआ हूं।
सिंदूर से लेकर सिंधु तक
हमारी सेनाओं ने आतंकी अड्डों को तबाह कर दिया। पाकिस्तान की न्यूक्लियर धमकी को हमने झूठा साबित कर दिया। भारत ने सिद्ध कर दिया कि न्यूक्लियर ब्लैकमेलिंग अब नहीं चलेगी और न इसके सामने भारत झुकेगा। हमने पाकिस्तान के सीने पर सटीक प्रहार किया। आज तकनीक आधारित युद्ध का युग है। ऑपरेशन सिंदूर इसमें भी सफल सिद्ध हुआ है। पिछले 10 साल में जो तैयारियां हमने कीं, अगर वे न की होतीं, तो हमारा बहुत बड़ा नुकसान हो सकता था। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पहली बार ऐसा हुआ जब आत्मनिर्भर भारत की ताकत को दुनिया ने पहचाना है। मेड इन इंडिया ड्रोन, मेड इन इंडिया मिसाइल ने पूरे पाकिस्तान के हथियारों की पोल खोल करके रख दी। पूरी दुनिया ने देखा कि हमारी कार्रवाई का दायरा कितना बड़ा है। सिंदूर से लेकर सिंधु तक हमने पाकिस्तान पर कार्रवाई की है। ऑपरेशन सिंदूर ने तय कर दिया कि भारत में आतंकी हमले की उसके आकाओं को और पाकिस्तान को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी, अब वे ऐसे ही बचकर नहीं जा सकते।
पाकिस्तान की प्रवक्ता जैसी कांग्रेस
विपक्ष ने हमारी विदेश नीति पर सवाल उठाए। दुनिया में किसी भी देश ने भारत को अपनी सुरक्षा के लिए कार्रवाई करने से नहीं रोका। सिर्फ तीन देशों ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के समर्थन में बयान दिया था। क्वाड हो, ब्रिक्स हो, फ्रांस, रूस, जर्मनी, किसी भी देश का नाम ले लीजिए, तमाम देशों, दुनिया भर से भारत को समर्थन मिला है। आज के युद्ध में सूचना और नैरेटिव की बहुत बड़ी भूमिका है। एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) के प्रयोग से सेनाओं के मनोबल को तोड़ने के प्रयास होते हैं। दुर्भाग्यवश कांग्रेस और उसके सहयोगी पाकिस्तान के ऐसे ही प्रपंच के प्रवक्ता बन चुके हैं।
देश की सेना ने सफलतापूर्वक सर्जिकल स्ट्राइक की तो तुरंत कांग्रेस वालों ने सेना से सबूत मांगे थे। लेकिन जब उन्होंने देश का मिजाज देखा, तो सुर बदल गए। इसके बाद बालाकोट में सेना ने एयर स्ट्राइक की। इस पर वे कुछ कह तो सकते नहीं थे, तो फोटो मांगने लगे। एयर स्ट्राइक हुई, तो फोटो दिखाओ। क्या-कहां गिरा? क्या तोड़ा? कितना तोड़ा? कितने मरे? बस यही पूछते रहे। पाकिस्तान भी यही पूछता था, तो ये भी यही पूछते थे। जब पायलट अभिनंदन पकड़े गए, तब पाकिस्तान में तो खुशी का माहौल होना स्वाभाविक था कि भारत की सेना का एक पायलट उनके हाथ लगा था। लेकिन यहां पर भी कुछ लोग थे, जो कानों-कान में कह रहे थे, अब मोदी फंसा, अब अभिनंदन वहां है, मोदी लाकर के दिखा दे। ‘अब देखते हैं, मोदी क्या करता है।’ और डंके की चोट पर अभिनंदन वापस आया। हम अभिनंदन को ले आए, तो इनकी बोलती बंद हो गई।
कांग्रेस का नकारात्मक रवैया
सेना का विरोध, सेना के प्रति नकारात्मकता, यह कांग्रेस का पुराना रवैया रहा है। देश ने अभी-अभी कारगिल विजय दिवस मनाया, लेकिन देश पूरी तरह जानता है कि उनके कार्यकाल में और आज तक कारगिल की विजय को कांग्रेस ने अपनाया नहीं है। आप सारे वीडियो देखिए, पाकिस्तान के सारे बयान और यहां हमारा विरोध करने वाले लोगों के बयान, फुल स्टॉप-कोमा के साथ एक जैसे हैं। देश हैरान है, कांग्रेस ने पाकिस्तान को क्लीन चिट दे दी है। उनकी यह कहने हिम्मत हुई कि ‘पहलगाम के आतंकी पाकिस्तानी थे, इसका सबूत दो।’ क्या कह रहे हो आप लोग? यह कौन-सा तरीका है? यही मांग पाकिस्तान कर रहा है, यही कांग्रेस कर रही है।
बड़े हमले को किया नाकाम
9 मई को पाकिस्तान ने करीब एक हजार मिसाइलों और सैकड़ों ड्रोन से भारत पर बहुत बड़ा हमला करने की कोशिश की थी। ये मिसाइलें भारत के किसी भी हिस्से पर गिरतीं, तो वहां भयंकर तबाही मचती, लेकिन हमने उन्हें आसमान में ही चूर-चूर कर दिया। हर देशवासी को इस पर गर्व है, लेकिन कांग्रेस के लोग जैसे इंतजार कर रहे थे, कुछ तो गड़बड़ हो। पाकिस्तान ने आदमपुर एयरबेस पर हमले का झूठ फैलाया, उस झूठ को बेचने की भरपूर कोशिश की, पूरी ताकत भी लगा दी। मैं अगले ही दिन आदमपुर पहुंचा और खुद जाकर उनके झूठ को बेनकाब कर दिया। अब कांग्रेस का भरोसा पाकिस्तान के रिमोट कंट्रोल से बनता और बदलता है।
कांग्रेस के पास नहीं थी दूरदृष्टि
हमारी सेनाओं को आधुनिक हथियारों के लिए दशकों तक इंतजार करना पड़ा। इतिहास गवाह है, एक जमाना था जब ‘डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग’ में भारत की आवाज सुनाई देती थी। जिस समय युद्ध तलवारों से लड़ा जाता था तब भी भारत की तलवारें श्रेष्ठ मानी जाती थीं। लेकिन आजादी के बाद जो एक मजबूत डिफेंस इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग का हमारा दायरा था, जो हमारा इकोसिस्टम था, उसको सोच-समझकर के तबाह कर दिया गया, उसको दुर्बल किया गया। अगर इसी नीति पर हम चलते, तो भारत इस 21वीं सदी में ऑपरेशन सिंदूर के संबंध में सोच भी नहीं सकता था। यह हाल करके रखा हुआ था इन्होंने, भारत को सोचना पड़ता कि अगर कोई कार्रवाई करनी है, तो शस्त्र कहां से मिलेंगे? साधन कहां से मिलेगा? बारूद कहां से मिलेगा? समय पर मिलेगा कि नहीं मिलेगा? बीच-बचाव में रुक तो नहीं जाएगा?
कांग्रेस के पास राष्ट्रीय सुरक्षा की दूरदृष्टि न पहले थी और आज तो सवाल ही नहीं उठता। कांग्रेस ने हमेशा राष्ट्र की सुरक्षा को लेकर समझौता किया है। आज जो लोग पूछ रहे हैं, पाकिस्तान अधिक्रांत कश्मीर को वापस क्यों नहीं लिया, उन्हें पहले यह जवाब देना चाहिए कि किसकी सरकार ने पीओके पर पाकिस्तान को कब्जा करने का अवसर दिया था? जब भी मैं नेहरू जी की चर्चा करता हूं, तो कांग्रेस और उसका पूरा इकोसिस्टम बिलबिला जाता है। क्यों?

1962 और 1963 के बीच कांग्रेस के नेता जम्मू-कश्मीर के पूंछ, उरी, नीलम वैली और किशनगंगा को छोड़ देने का प्रस्ताव रख रहे थे। 1966 में कच्छ पर इन्हीं लोगों ने मध्यस्थता स्वीकार की। उन्होंने भारत का करीब 800 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पाकिस्तान को सौंप दिया। 1965 की जंग में हाजी पीर दर्रे को हमारी सेना ने जीत लिया था, लेकिन कांग्रेस ने उसे फिर से लौटा दिया। 1971 में पाकिस्तान के 93,000 फौजी हमारे पास बंदी थे, पाकिस्तान के हजारों वर्ग किलोमीटर पर हमारी सेना ने कब्जा कर लिया था। हम बहुत कुछ कर सकते थे, विजय की स्थिति में थे। उस दौरान अगर थोड़ी सी दूरदृष्टि होती, समझदारी होती, तो पीओके वापस लेने का निर्णय हो सकता था। वह मौका था, लेकिन उसे छोड़ दिया गया। 1974 में श्रीलंका को कच्चातिवु द्वीप गिफ्ट कर दिया गया।
कूटनीति का पाठ न पढ़ाएं
कांग्रेस के जो लोग हमें कूटनीति का पाठ पढ़ा रहे हैं, मैं उन्हें उनकी कूटनीति याद दिलाना चाहता हूं। 26/11 जैसे भयंकर आतंकी हमले के बाद भी कांग्रेस का पाकिस्तान से प्रेम नहीं रुका। एक पाकिस्तानी आतंकी जिंदा पकड़ा गया। पाकिस्तान के मीडिया ने, दुनिया ने यह स्वीकार किया कि पाकिस्तानी है, लेकिन यहां कांग्रेस पार्टी वोट बैंक की राजनीति के लिए क्या कर रही थी? कांग्रेस पार्टी इसको ‘भगवा आतंक’ सिद्ध करने में जुटी हुई थी। कांग्रेस दुनिया को ‘हिंदू आतंकवाद’ की थ्योरी बेचने में लगी हुई थी। कांग्रेस के एक नेता ने अमेरिका के बड़े राजनयिक को यहां तक कह दिया था, कि लश्कर-ए-तैयबा से भी बड़ा खतरा भारत के हिंदू संगठन हैं।
तुष्टीकरण और वोट बैंक की राजनीति के लिए कांग्रेस हमेशा देश की सुरक्षा की बलि चढ़ाती रही। इतने बड़े आतंकी हमले के बाद भी विदेशी दबाव में हमले के कुछ हफ्तों के भीतर ही कांग्रेस सरकार ने पाकिस्तान से बातचीत शुरू कर दी थी। यही नहीं, पाकिस्तान के एक भी राजनायिक को भारत से बाहर निकालने की हिम्मत तक नहीं की गई। एक वीजा तक निरस्त नहीं किया गया। देश पर पाकिस्तान प्रायोजित बड़े-बड़े हमले होते गए, लेकिन यूपीए सरकार ने पाकिस्तान को सबसे प्रिय देश (एमएफएन) का दर्जा दे रखा था, वह कभी वापस नहीं लिया था।
एक तरफ देश मुंबई हमले पर न्याय मांग रहा था, दूसरी तरफ कांग्रेस पाकिस्तान के साथ व्यापार करने में लगी थी। पाकिस्तान वहां से खून की होली खेलने वाले आतंकियों को भेजता रहा और यहां कांग्रेस द्वारा ‘अमन की आस’ के मुशायरे आयोजित किए जाते रहे। हमने आतंकवाद और ‘अमन की आस’ का वह वन वे ट्रैफिक बंद कर दिया। हमने पाकिस्तान का (एमएफएन) का दर्जा रद्द किया, वीजा बंद किया, हमने अटारी वाघा बॉर्डर को बंद किया।
सिंधु जल समझौता था धोखा
भारत के हितों को गिरवी रख देना, यह कांग्रेस की पार्टी की पुरानी आदत है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण सिंधु जल समझौता है। सिंधु जल समझौता किसने किया? नेहरू जी ने किया। मामला किससे जुड़ा था? भारत से निकलने वाली नदियां, हमारे यहां से निकली हुई नदियां, उसका वह पानी था। और वे नदियां हजारों साल से भारत की सांस्कृतिक विरासत रही हैं, भारत की चैतन्य शक्ति रही हैं, भारत को सुजलाम्-सुफलाम् बनाने में उन नदियों का बहुत बड़ा योगदान रहा है। सिंधु नदी, जो सदियों से भारत की पहचान हुआ करती थी, उसी से भारत जाना जाता था, लेकिन नेहरू जी और कांग्रेस ने सिंधु और झेलम जैसी नदियों पर विवाद के लिए पंचायत वर्ल्ड बैंक को दी। वर्ल्ड बैंक फैसला करेगा क्या करना है। नदी हमारी, पानी हमारा।

सिंधु जल समझौता सीधा सीधा भारत की अस्मिता और भारत के स्वाभिमान के साथ किया गया बहुत बड़ा धोखा था। जो पानी था, जो नदियां थीं, जो भारत से निकल रही थीं, उनका 80 प्रतिशत पानी पाकिस्तान को देने के लिए वे राजी हो गए। और इतना बड़ा हिन्दुस्थान, उसको सिर्फ 20 प्रतिशत पानी। ये कौन सी बुद्धिमानी थी? कौन सा देशहित था? कौन सी कूटनीति थी? इतनी बड़ी आबादी वाला हमारा देश, हमारे यहां से निकलती हुई ये नदियां और सिर्फ 20 प्रतिशत पानी! और 80 प्रतिशत पानी उन्होंने उस देश को दिया जो देश खुलेआम भारत को अपना दुश्मन करार देता है। इस पानी पर किसका हक था? हमारे देश के किसानों का, हमारे देश के नागरिकों का, हमारे पंजाब, हमारे जम्मू कश्मीर का। देश के एक बहुत बड़े हिस्से को इन्होंने पानी के संकट में धकेल दिया, इस एक कारण से। राज्यों के भीतर भी पानी को लेकर के आपस में संघर्ष पैदा हुए, प्रतिस्पर्धा पैदा हुई, और उनका जिस पानी पर हक था, उस पर पाकिस्तान मौज करता रहा। और ये दुनिया में अपनी कूटनीति का पाठ पढ़ाते रहते थे।
जब ये सत्ता में थे, जब इनको राज करने का अवसर मिला था, तब देश का हाल क्या था, उसे आज भी देश भुला नहीं है। 2014 से पहले देश में असुरक्षा का जो माहौल था, उसे आज याद करके भी लोग सिहर जाते हैं। आतंकवाद पर लगाम लगाई जा सकती थी। हमारी सरकार ने 11 साल में यह करके दिखाया है, एक बहुत बड़ा सबूत है। 2004 से 2014 के बीच जो आतंकी घटनाएं होती थीं, उन घटनाओं में बहुत बड़ी कमी आई है। इसलिए देश जानना चाहता है, अगर हमारी सरकार आतंकवाद पर नकेल कस सकती है, तो कांग्रेस सरकारों की ऐसी कौन-सी मजबूरी थी कि आतंकवाद को फलने-फूलने दिया?
मेरा कांग्रेस के साथियों से आग्रह है कि एक परिवार के दबाव में पाकिस्तान को क्लीन चिट देना बंद कर दें। जो देश की विजय का क्षण है, कांग्रेस उसे देश के उपहास का क्षण न बनाए। कांग्रेस अपनी गलती सुधारे। मैं आज सदन में फिर स्पष्ट करना चाहता हूं, अब भारत आतंकी नर्सरी में ही आतंकियों को मिट्टी में मिलाएगा। हम पाकिस्तान को भारत के भविष्य से खेलने नहीं देंगे और इसलिए ऑपरेशन सिंदूर खत्म नहीं हुआ है, ऑपरेशन सिंदूर जारी है और यह पाकिस्तान के लिए भी चेतावनी है, वह जब तक भारत के खिलाफ आतंक का रास्ता रोकेगा नहीं, तब तक भारत एक्शन लेता रहेगा। भारत का भविष्य सुरक्षित और समृद्ध होगा, यही हमारा संकल्प है।
















