कश्मीर पर चली आ रही दशकों पुरानी बहस को झकझोर देने वाला दस्तावेज़ अब पहली बार सामने आया है। हाल ही में BlueKraft Digital Foundation द्वारा प्रकाशित 370 Book में पंडित जवाहरलाल नेहरू का वह पत्र शामिल किया गया है जो उन्होंने 4 जुलाई 1947 को महाराजा हरि सिंह को लिखा था।
इस पत्र में नेहरू ने साफ तौर पर महाराजा हरि सिंह के भारत में विलय के आग्रह को ठुकरा दिया था।
अब तक यह धारणा फैलाई गई थी कि कश्मीर के भारत में विलय में देरी महाराजा हरि सिंह की अनिर्णय की वजह से हुई। जबकि सच्चाई इसके बिलकुल उलट है। 370 : Undoing the Unjust: A New Future for J&K पुस्तक में प्रकाशित यह ऐतिहासिक दस्तावेज़ उस पूरे नैरेटिव को उलट देता है, जिसे वामपंथियों द्वारा गढ़ा गया था।
नेहरू के इस पत्र से यह भी उजागर होता है कि स्वतंत्रता से पहले नेहरू और महाराजा हरि सिंह के बीच सीधा संवाद नहीं हुआ था, इस दावे की भी पोल खुल गई है। ब्लूक्राफ्ट डिजिटल फाउंडेशन द्वारा प्रकाशित 370 : Undoing the Unjust: A New Future for J&K किताब में पत्र की मूल प्रति और उसका मूल पाठ दोनों प्रकाशित किए गए हैं, जिसे विशेषज्ञ “विस्फोटक” बता रहे हैं।
इतिहासकारों का कहना है कि यह दस्तावेज़ कश्मीर के विलय की असल कहानी को नए सिरे से लिखेगा।















