कनाडा से हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत के सरे में खालिस्तान अलगाववादियों ने रिपब्लिक ऑफ खालिस्तान का दूतावास बना लिया है। खालिस्तानी आतंकी हरदीप निज्जर के समर्थकों ने एक गुरुद्वारे के बाहर ‘एंबेसी ऑफ खालिस्तान’ का बोर्ड लगाया है। खालिस्तानियों के इस कृत्य पर अभी तक प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
भारत कनाडा में खालिस्तानी गतिविधियों को लेकर कई बार पहले भी अपनी चिंता व्यक्त कर चुका है। ऐसे में इस तरह की घटना फिर होना बेहद चौंकाने वाला है। दूसरी तरफ यह घटना उस वक्त हुई है, जब खालिस्तानी संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) ने आने वाले दिनों में एक और कथित ‘सिख जनमत संग्रह’ (Referendum) की घोषणा की है। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि इससे न केवल भारत विरोधी माहौल भड़काया जा रहा है, बल्कि विदेशी जमीन का इस्तेमाल भारत की संप्रभुता को चुनौती देने के लिए किया जा रहा है।
बोर्ड में रिपब्लिक ऑफ खालिस्तान लिखा
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह बोर्ड गुरु नानक सिख गुरुद्वारा की दीवार पर लगाया गया, जो कि सरे शहर में स्थित है। इस बोर्ड में रिपब्लिक ऑफ खालिस्तान लिखा हुआ है, जिसे देखकर स्थानीय लोग भी हैरान रह गए। हालांकि, कुछ देर बाद उस बोर्ड को हटा लिया गया, लेकिन तब तक इसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके थे। इसे लेकर सोशल मीडिया पर यूजर्स कह रहे हैं कि लगता है मार्क कार्नी भी जस्टिन ट्रूडो की राह पर चल पड़े हैं। यह प्रतीकात्मक ‘दूतावास’ खुले तौर पर प्रतिबंधित आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर का समर्थन करता हुआ बताया जा रहा है। स्थानीय और राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियां खालिस्तान आंदोलन से जुड़े इन घटनाक्रमों पर कड़ी निगरानी रख रही हैं।
कनाडा खालिस्तानियों का गढ़
कनाडा को खालिस्तानी आतंकियों और समर्थकों का गढ़ माना जाता है। 1970 के दशक में पहली बार कनाडा में खालिस्तान आंदोलन को लेकर डाक टिकट जारी किए गए थे। यहीं पर पहली बार खालिस्तानियों ने अपना करेंसी भी जारी किया था। इतने सालों बाद भी कनाडा में कुछ नहीं बदला है। पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के शासनकाल में भी खालिस्तानी कनाडा में भारत विरोधी हरकतों को अंजाम दे रहे थे और अब नए पीएम मार्क कार्नी के शासनकाल में भी खालिस्तानियों की हरकतें हैरान करने वाली हैं।

















