क्या खालिस्तानियों के आगे फिर बिछ गई Canada सरकार! Pannu ने 'Referendum' की इजाजत के लिए किया PM Carney का शुक्रिया
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क्या खालिस्तानियों के आगे फिर बिछ गई Canada सरकार! Pannu ने ‘Referendum’ की इजाजत के लिए किया PM Carney का शुक्रिया

सिख्स फॉर जस्टिस नामक संगठन के नाम से विदेशों में पाकिस्तानी आईएसआई की कथित शह पर भारत विरोधी हरकतें करता आ रहा पन्नू भारत में अपनी आतंकी गतिविधियों के लिए प्रतिबंधित है

Written byAlok GoswamiAlok Goswami
Nov 22, 2025, 04:17 pm IST
in विश्व, विश्लेषण
'रेफरेंडम' का पोस्टर

'रेफरेंडम' का पोस्टर

कनाडा में खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत पन्नू ने एक बार फिर ‘रेफरेंडम’ की साजिश रची है। कल यानी 23 नवंबर को ओटावा में इस जनमत सर्वे के बहाने पन्नू एक बार फिर से बिखरते खालिस्तानी तत्वों को न सिर्फ एकजुट करने की चाल चल रहा है बल्कि वह शायद यह भी दिखाना चाहता है कि भारत सरकार को अब भी चुनौती दे सकता है, भले ही कनाडा में नई कार्नी सरकार आ गई हो। हैरानी की बात है कि कनाडा की कार्नी सरकार ने पिछले दिनों ऐसा दिखाया था जैसे वह खालिस्तानियों पर लगाम कसेगी, लेकिन, वहां बसे अनेक प्रवासी भारतियों के अनुसार, अब इस रेफरेंडम की अनुमति देकर इस सरकार ने भी अपना असली रंग दिखाया है।

जिन्ना के देश की कथित शह पर बरसों से खालिस्तानी अलगाववाद को विदेशों में हवा देता आ रहा आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू एक बार फिर से ‘खालिस्तान रेफरेंडम’ की आड़ में अलगाववादी साजिश रच रहा है। 23 नवंबर को ओटावा में जो जनमत संग्रह आयोजित किया जा रहा है, वह संभवत: पानी का ताप मापने की कोशिश है। क्योंकि पहले के ऐसे तमाम रेफरेंडम औंधे मुंह ही गिरे हैं और कनाडा में बसे अधिकांश सिखों ने इसका मुखर विरोध करके समुदाय को पन्नू के प्रति सावधान किया है।

मोदी-कार्नी: भारत सरकार ने कनाडा सरकार को इस ओर ध्यान देने को कहा है। भारत का आरोप है कि कनाडा सरकार अलगाववादी तत्वों को छूट दे रही है (File Photo)

ऐसे रेफरेंडमों के जरिए पन्नू लगातार बिखरते खालिस्तानी तत्वों को संभवत: एक जगह जुगाड़ने और उनमें भारत विरोध नफरत को और गहराने की कोशिश करता है। इसके जरिए वह विदेशी धरती पर भारत सरकार को चुनौती देता प्रतीत होता है, क्योंकि कनाडा की सरकार की भूमिका इस संदर्भ में बार-बार सवालों के घेरे में रही है। हालांकि यहां इस बात पर भी ध्यान देना जरूरी है कि पन्नू ने एक्स पर अपनी पोस्ट में पीएम कार्नी का रेफरेंडम की इजाजत देने के लिए फोटो सहित धन्यवाद दिया है, लेकिन किसी ईथन नाम के हैंडल ने इसे टैग करके लिखा है कि पन्नू को कार्नी सरकार के इजाजत देने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

Gurpatwant Singh #Pannun claims that the Carney-led Canadian government approved the #Khalistan Referendum at Ottawa’s Billings Estate, but as of now, there is no official confirmation, raising questions about the claim’s authenticity.#cdnpoli pic.twitter.com/BhYGeTJNkF

— Ethan 🇨🇦 (@Ethan113554) November 16, 2025

सिख्स फॉर जस्टिस (SFJ) नामक संगठन के नाम से विदेशों में कथित पाकिस्तानी आईएसआई की शह पर भारत विरोधी हरकतें करता आ रहा पन्नू भारत में अपनी आतंकी गतिविधियों के लिए प्रतिबंधित है। पिछले कुछ वर्षों में उसने लंदन, ऑस्ट्रेलिया, इटली, अमेरिका और कनाडा में ऐसे ‘रेफरेंडम’ आयोजित किए हैं, जो पूरी तरह गैर-आधिकारिक थे और सिर्फ एक शैतानी चाल से बढ़कर कुछ साबित नहीं हुए।

साल 2023 में ब्रिटिश कोलंबिया के सरे शहर में तीसरा ‘रेफरेंडम’ हुआ था, जिसमें आतंकी पन्नू ने 2 लाख लोगों के शामिल होने का फर्जी दावा किया था। इसके बाद जुलाई 2024 में कैलगरी में उसके अनुसार, लगभग 55 हजार लोगों ने भाग लिया था। पन्नू भारत के अनेक राज्यों, जैसे जम्मू-कश्मीर, असम, मणिपुर, नागालैंड में भी अलगाववादी मुहिम चलाने की धमकियां दे चुका है। वह आएदिन भारत में आतंकवादी घटनाएं भड़काने की भी वीडियो पर गीदड़भभकियां देता रहता है।

इसी तरह पन्नू सोशल मीडिया के जरिए भारतीय अखंडता को चुनौती देता रहता है, हिंसा के आह्वान करता है और चीन जैसे बाहरी देशों से समर्थन मांगने जैसे बयान देता रहा है। उसने महाकुंभ 2025 जैसे बड़े आयोजनों में विघ्न डालने के आतंकी अभियान चलाने की घोषणा भी की थी।

कनाडा में पूर्ववर्ती जस्टिन त्रूदो सरकार के कार्यकाल में खालिस्तानी गतिविधियों को कथित खुली छूट दी गई थी। तब लगभग रोजाना हिंसक खालिस्तानी तत्व भारतीय उच्चायोग पर प्रदर्शन करते थे और भारतीय राजनयिकों को जान से मारने की धमकियां देते थे। लेकिन उसके बाद वहां सत्ता में आई कार्नी सरकार ने भी ऐसे तत्वों पर लगाम कसने को कुछ खास प्रयास नहीं किया है। कल यानी 23 नवंबर के रेफरेंडम को अधिकारिक अनुमति मिलना ठीक यही दिखाता है। यह चीज कनाडा सरकार की कथनी और करनी में अंतर दिखाती है।

भारत सरकार ने बार-बार कनाडा सरकार को राजनयिक स्तर पर इस ओर ध्यान देने को कहा है। भारत का आरोप है कि कनाडा सरकार अलगाववादी तत्वों को छूट दे रही है और भारत की अखंडता के लिए अपशब्द बोलने वालों को अनदेखा कर रही है।

अफसोस कि कनाडा सरकार ने खालिस्तानियों की इन गतिविधियों को अक्सर ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ की आड़ में अनदेखा किया है। इसीलिए उसने रेफरेंडमों को रोकने की औपचारिक रूप से कभी कार्रवाई नहीं की है। ऐसे आयोजनों पर भारत ने राजनयिक स्तर पर बाकायदा कड़े विरोध दर्ज कराए हैं। खुद पन्नू ने अपने बयानों में कनाडा के सत्ताधीशों के साथ अपनी निकटता की लंबी—चौड़ी बातें की हैं। त्रूदो के कार्यकाल में तो दावे किए जाते थे कि ‘कनाडा सरकार खालिस्तानियों और खालिस्तान समर्थकों के इशारे पर चलती है।’

यहां यह भी याद रहे कि इसी पन्नू के खिलाफ अमेरिका में हत्या की साजिश और अन्य अपरोधों में केस चल रहे हैं, जिसमें भारत की एजेंसियों को साजिश में फंसाने की कोशिश का भी आरोप है।

इसमें संदेह नहीं है कि खालिस्तानी उग्रपंथी गुरपतवंत पन्नू की गतिविधियां मंच बदल-बदलकर भारत विरोधी एजेंडा चलाने और अलगाववादी तत्वों को उकसाने के लिए चली हैं। कनाडा सरकार की बार-बार बदलती नीतियों और रेफरेंडम को आधिकारिक अनुमति से यह स्पष्ट है कि वहां उसके ऐसे तत्वों पर रोक लगाने की कोशिश के दावे खोखले हैं। भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों में भी यह गंभीर बाधा है, जिसे कनाडा ने राजनयिक दबावों के बावजूद अब तक पूरी तरह नियंत्रित नहीं किया है।

पन्नू बिखरते खालिस्तानी तत्वों को एकजुट करने की चाल चल रहा

पन्नू पर भारत में चल रही कार्रवाई

गुरपतवंत सिंह पन्नू के खिलाफ भारत में चल रहे आरोपों की बात करें तो उस पर कई गंभीर आरोप दर्ज हैं। इनमें प्रमुख आरोपों हैं, 15 अगस्त 2025 को स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लाल किले पर तिरंगा फहराने से रोकने के लिए उग्र सिख युवकों को उकसाना और इसके लिए 11 करोड़ रुपये का पुरस्कार घोषित करना। यह आरोप राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने दर्ज किया है, जिसमें पन्नू ने ‘नए खालिस्तान का नक्शा’ भी जारी किया था, जिसमें पंजाब, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा को शामिल दिखाया गया था। पन्नू उस प्रतिबंधित संगठन सिख्स फॉर जस्टिस (एसएफजे) का सदस्य है, जिस पर पंजाब को भारत से अलग कर ‘खालिस्तान’ राज्य बनाने की साजिश और प्रचार का मामला दर्ज है।

वर्तमान में भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियां उसके खिलाफ लगभग 20 आपराधिक मामलों की जांच कर रही हैं, जिसमें आतंकवाद को बढ़ावा देने और युवाओं को चरमपंथी बनाने के आरोप शामिल हैं। इसी पन्नू ने 10 अगस्त 2025 को लाहौर प्रेस क्लब में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी, जिसमें उसने भारत विरोधी बयान दिए थे। भारत सरकार ने पन्नू को 1 जुलाई 2020 को ‘आतंकवादी’ घोषित किया था। पन्नू पर भारत में आतंकवाद, उकसावे, सरकारी अधिकारियों को धमकाने, देश की संप्रभुता को चोट पहुंचाने और अलगाववादी साजिश रचने के अनेक आरोप दर्ज हैं।

Topics: canadapannuIndiareferendumपन्नूpm carneyउग्रपंथottawaKhalistanModiखालिस्तानकनाडा
Alok Goswami
Alok Goswami
A Delhi based journalist with over 25 years of experience, have traveled length & breadth  of the country and been on foreign assignments too. Areas of interest include Foreign Relations, Defense, Socio-Economic issues, Diaspora, Indian Social scenarios, besides reading and watching documentaries on travel, history, geopolitics, wildlife etc. [Read more]
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