धर्मस्थल में सामूहिक दफन का मामला: मानव कंकाल के अवशेष, साड़ी और दफन लाशें मिलीं, जानें कैसे सामने आया था मामला?
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धर्मस्थल में सामूहिक दफन का मामला: मानव कंकाल के अवशेष, साड़ी और दफन लाशें मिलीं, जानें कैसे सामने आया था मामला?

धर्मस्थल में काम कर चुके एक सफाईकर्मी ने अपनी शिकायत में कहा कि साल 1995 से 2014 तक उसे महिलाओं और नाबालिगों के शवों को दफनाने के लिए मजबूर किया गया था।

Written byसुनीता मिश्रासुनीता मिश्रा
Aug 5, 2025, 12:04 pm IST
in कर्नाटक
कर्नाटक धर्मस्थल में सामूहिक दफन की जांच

कर्नाटक धर्मस्थल में सामूहिक दफन की जांच

कर्नाटक के धर्मस्थल में सामूहिक दफन मामले में हर रोज नए खुलासे हो रहे हैं। इस मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) को सोमवार (4 अगस्त) को मानव कंकाल के अवशेष मिले। ये अवशेष धर्मस्थल में नेत्रवती नदी के पास वन क्षेत्र में चल रहे उत्खनन अभियान के छठे दिन मिले। शिकायतकर्ता-गवाह द्वारा दिखाए गए 11वें स्थल से लगभग 100 मीटर दूर मिले मानव अवशेषों में लगभग 100 हड्डियां और एक खोपड़ी शामिल हैं। बताया जा रहा है कि छठे दिन एसआईटी के अधिकारी, शिकायतकर्ता-गवाह, मजदूर, सहायक आयुक्त, फोरेंसिक टीम और अपराध स्थल अधिकारी (एसओसीओ) सुबह लगभग 11 बजे घटनास्थल पर पहुंच गए थे। पुलिस सूत्रों ने इस बरामदगी की पुष्टि की है। हालांकि, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फॉरेंसिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि यह वास्तव में मानव अवशेष हैं या नहीं।

मामला कैसे सामने आया?

यह मामला तक सामने आया है, जब धर्मस्थल में काम कर चुके एक सफाईकर्मी ने मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज कराते हुए दावा किया कि साल 1995 से 2014 तक उसे महिलाओं और नाबालिगों के शवों को दफनाने के लिए मजबूर किया गया था। 3 जुलाई को सफाईकर्मी ने इसकी शिकायत धर्मस्थल पुलिस थाने में कराई थी। अगले दिन 4 जुलाई 2025 को पुलिस ने पूर्व सफाईकर्मी की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया था। शिकायतकर्ता ने अपनी सुरक्षा के लिए गवाह संरक्षण अधिनियम 2018 के तहत संरक्षण की मांग की थी, जिसे 10 जुलाई को मंजूर किया गया। इसके बाद कर्नाटक सरकार ने पिछले दो दशकों में धर्मस्थल में सामूहिक हत्या, बलात्कार और अवैध दफन के संगीन आरोप लगने के बाद जांच के लिए एसआईटी का गठन किया। इंडिया टुडे के मुताबिक, सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी से पता चला है कि बेल्थंगडी पुलिस ने 2000 से 2015 के बीच दर्ज हुई मौतों के रिकॉर्ड्स को हटा दिया है। यह वही समय था जब कई मौतों के संदिग्ध होने के आरोप लगे थे।

अवशेष के साथ गांठ बंधी हुई साड़ी भी मिली

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बरामद किए गए कंकालों के अवशेष के साथ एक साड़ी का टुकड़ा भी मिला है, जिसमें गांठ बंधी हुई थी। इसमें एक लंबी रीढ़ की हड्डी भी मिली है। SIT की प्रारंभिक जांच के अनुसार ये अवशेष दो व्यक्तियों के हो सकते हैं। यानी महिला और पुरुष। जंगल से बाहर ले जाने से पहले कंकाल के अवशेषों को तीन बाल्टियों और दो पीवीसी पाइपों में बंद कर दिया गया था।

31 जुलाई को 15 हड्डियां और खोपड़ी के कुछ टुकड़े मिले

वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी प्रोनब मोहंती के नेतृत्व वाली SIT ने कुल 13 स्थानों में से अब तक 11 स्थानों की जांच पूरी कर ली है। शिकायतकर्ता-गवाह ने पहले धर्मस्थल स्नान घाट के पास और जंगल के अंदर 13 संभावित दफन स्थलों की पहचान की थी। इनमें से अब तक 10 की खुदाई क्रमवार की गई है। हालांकि 11वें स्थल की खुदाई के दौरान गवाह ने पास के किसी अन्य स्थान पर खुदाई करने का अनुरोध किया। दिन भर के काम के लिए लगभग 20 मजदूरों को लगाया गया था। टीम के जंगल में घुसने के कुछ ही देर बाद नमक की दो बोरियां अंदर लाई गईं। एसआईटी अधिकारियों ने इलाके की सुरक्षा के लिए चार कमांडो भी तैनात किए थे। मौके पीआर पुत्तूर की सहायक आयुक्त स्टेला वर्गीस और एसआईटी के पुलिस अधीक्षक जितेंद्र कुमार दयामा मौजूद थे। इससे पहले 31 जुलाई 2025 को शिकायतकर्ता द्वारा पहचाने गए छठे स्थान पर विशेष जांच दल को खुदाई के दौरान 15 हड्डियों और खोपड़ी के कुछ टुकड़ों के साथ आंशिक कंकाल के अवशेष बरामद हुए थे। प्रारंभिक जांच में ये अवशेष पुरुष के बताए गए थे।

साइट नंबर 13 सबसे अहम

अब सिर्फ दो जगहें साइट नंबर 12 और साइट नंबर 13 बची हैं। साइट नंबर 13 को सबसे अहम बताया जा रहा है, क्योंकि वहीं सबसे ज्यादा लाशें दफनाई गई हैं। सफाई कर्मचारी ने धर्मस्थल और उसके आसपास 6 से 7 किलोमीटर के दायरे में करीब 50 जगहों की पहचान की है, जहां लाशें दफन हैं। इनमें से 6 से 7 जगहों पर सामूहिक दफन हुआ है। फिलहाल पहले सिर्फ 13 जगहों की खुदाई हो रही है। शेष खुदाई अगले चरण में होगी।

‘शव को ऐसे दफनाया जैसे कोई कुत्ते को भी नहीं दफनाता’

आरटीआई कार्यकर्ता जयंत टी ने SIT में शिकायत दर्ज कराई है। जयंत ने दावा किया है कि उन्होंने 2002-2003 में एक लड़की के शव को अवैध रूप से दफनाते हुए देखा था। उस वक्त कई अधिकारी भी मौजूद थे। उन्होंने आरोप लगाया कि लड़की के शव को दफनाने के मामले में कानूनी प्राटोकॉल तोड़ा गया। उन लोगों ने शव को ऐसे दफनाया जैसे कोई कुत्ते को भी नहीं दफनाता। वह मंजर सालों तक उन्हें परेशान करता रहा। जयंत के मुताबिक उन्होंने इससे पहले बेल्थांगडी पुलिस थाने में अनुरोध किया था कि उन्हें गुमशुदा लोगों के आंकड़े दिए जाएं। इस पर पुलिस ने कहा था कि अज्ञात शवों का पता लगाने के लिए इस्तेमाल किए गए सभी दस्तावेज, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, वॉल पोस्टर्स, नोटिस और फोटोग्राफ को नष्ट कर दिया गया है। ऐसा ​रूटीन एडमिनिस्ट्रेशन ऑर्डर ​​की वजह से किया गया था।

29 जुलाई से शुरू हुई खुदाई

बता दें कि 29 जुलाई को नेत्रावदी नदी किनारे साइट नंबर 1 से खुदाई शुरू की गई। यहां 15 फीट गहरे गड्ढे के अलावा कुछ नहीं मिला। दूसरे दिन 30 जुलाई को साइट नंबर 2, 3, 4 और 5 पर खुदाई की गई। वहां लाशें नहीं मिलीं, लेकिन साइट नंबर 2 से लाल रंग का फटा ब्लाउज, एक पैन कार्ड और एटीएम कार्ड जरूर मिला था। तीसरे दिन 31 जुलाई को साइट नंबर 6 पर पहली बार मानव कंकाल के अवशेष मिले। मजदूरों ने हाथों से मिट्टी हटाई तो उन्हें हड्डियां मिलीं। 1 अगस्त से 3 अगस्त को साइट नंबर 7, 8, 9 और 10 की खुदाई के दौरान कुछ भी हाथ नहीं लगा, परन्तु छठे दिन 4 अगस्त को साइट नंबर 11 से फिर इंसानी हड्डियां बरामद हुईं। हालांकि इस पूरे मामले में फोरेंसिक रिपोर्ट को सबसे अहम बताया जा रहा है, क्योंकि बरामद अवशेष किसके हैं, ये इस रिपोर्ट से पता चलेगा।

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सुनीता मिश्रा
सुनीता मिश्रा
हरियाणा की कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री। इग्नू दिल्ली से राजनीतिक विज्ञान में मास्टर डिग्री। पत्रकारिता में 10 वर्षों का अनुभव। [Read more]
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