गुजरात की एक विशेष अदालत ने तीन दशक पुराने मामले में फैसला सुनाया है। यह मामला 1993 में अयोध्या में विवादित ढांचा विध्वंस का बदला लेने के लिए रची गई एक खतरनाक आतंकी साजिश से जुड़ा है। जामनगर की टाडा (TADA) अदालत ने अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के इशारे पर हथियारों और विस्फोटकों की तस्करी करने के जुर्म में 12 लोगों को सजा सुनाई है।
क्या थी 1993 की वह खौफनाक साजिश?
यह मामला 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में हुए विवादित ढांचा विध्वंस के बाद की प्रतिक्रिया से जुड़ा है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम और उसके सहयोगियों ने इस विध्वंस का बदला लेने के लिए भारत में बड़े पैमाने पर आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की योजना बनाई थी।
साजिश के तहत गुजरात के जामनगर तट के रास्ते भारी मात्रा में घातक हथियार और विस्फोटक भारत में तस्करी कर लाए गए थे। तस्करी किए गए विस्फोटकों में खतरनाक आरडीएक्स (RDX) भी शामिल था, जिसका उद्देश्य देश के विभिन्न हिस्सों में विस्फोट कर दहशत फैलाना था। तस्करी के लिए जामनगर के समुद्र तट का इस्तेमाल किया गया था ताकि सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बचकर हथियारों की खेप उतारी जा सके।
12 को मिली कड़ी सजा
विशेष टाडा (आतंकवादी और विघटनकारी गतिविधियां अधिनियम) न्यायाधीश आर.पी. मोगेरा ने इस मामले की सुनवाई की। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर 12 आरोपियों को दोषी करार दिया। दोषी ठहराए गए 12 लोगों में से 10 को 5 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है। वहीं दो अन्य मुख्य दोषियों को 7 साल के कठोर कारावास की सजा दी गई है। सबूतों के अभाव में अदालत ने 17 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया है।
लड़ी लंबी कानूनी लड़ाई
इस मामले की एफआईआर (FIR) जुलाई 1993 में जामनगर के ‘बी’ डिवीजन पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी। जांच की प्रक्रिया और कानूनी पेचीदगियों के कारण यह मामला 1993 से 2018 तक सक्रिय जांच के दायरे में रहा और अब जाकर 2026 में इसका अंतिम फैसला आया है।
दाऊद इब्राहिम ने रची थी साजिश
इस मामले में दाऊद इब्राहिम को मुख्य साजिशकर्ता के रूप में नामजद किया गया था। जांच एजेंसियों ने पाया की यह पूरी साजिश दाऊद इब्राहिम की थी। 1993 का वह दौर भारत के लिए सांप्रदायिक और सुरक्षा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील था। दाऊद इब्राहिम जैसे अपराधियों ने धार्मिक भावनाओं का फायदा उठाकर देश को अस्थिर करने की कोशिश की थी। आरोपियों पर टाडा अधिनियम के साथ-साथ भारतीय दंड संहिता, शस्त्र अधिनियम (आर्म्स एक्ट) और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा चलाया गया। जांच एजेंसियों ने यह साबित किया कि तस्करी का उद्देश्य केवल व्यापार नहीं बल्कि देश की एकता और अखंडता को नुकसान पहुंचाना था।
सरकारी वकील गोकानी ने कोर्ट को बताया कि मामले की जांच 1993 से 2018 तक चली, जिसमें कुल 46 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और दाऊद इब्राहिम, टाइगर मेमन और अनीस इब्राहिम समेत 15 अन्य को भगोड़ा घोषित किया गया। यह मुकदमा 2018 में शुरू हुआ और 46 आरोपियों के खिलाफ सात अलग-अलग चार्जशीट दायर की गईं।
पाकिस्तान का भी था हाथ
सरकारी वकील गोकानी ने यह भी बताया कि अभियोजन पक्ष दुबई में दाऊद इब्राहिम के घर पर कैसे साजिश रची गई और पाकिस्तान की मदद से इसे कैसे अंजाम दिया गया। उन्होंने इस बात के भी साक्ष्य दिए कि इसमें पाकिस्तानी नौसेना भी शामिल थी। उनकी मदद से ही आरोपी भारतीय तट तक विस्फोटक और हथियार लेकर आए थे।

















